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दिल्ली-NCR में प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता, GRAP-2 लागू; कोयले-लकड़ी से लेकर डीजल जनरेटर तक पर सख्ती

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksNovember 2, 2026No Comments6 Mins Read
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दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद GRAP-2 लागू कर दिया गया है। होटल और ढाबों में कोयले-लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक के साथ डीजल जनरेटर, निजी वाहनों और धूल से होने वाले प्रदूषण पर भी सख्ती की जाएगी।
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दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ने के साथ ही लोगों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। राजधानी की हवा इस सीजन में पहली बार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है। सोमवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 324 दर्ज किया गया। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इसके तहत प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं।

GRAP-2 लागू होने के बाद होटल, रेस्तरां और सड़क किनारे स्थित ढाबों में तंदूर या खाना पकाने के अन्य कार्यों के लिए कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। डीजल जनरेटर के संचालन पर भी सख्त नियंत्रण रहेगा। इसके अलावा निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने, सड़कों की मशीनों से सफाई करने और धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव बढ़ाने जैसे उपाय किए जाएंगे।

प्रशासन का उद्देश्य प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ नियंत्रण करना है, ताकि हवा की गुणवत्ता और अधिक खराब होने से रोकी जा सके। हालांकि, इन उपायों का प्रभाव कितना होगा, यह उनके प्रभावी क्रियान्वयन और मौसम की परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

दिल्ली में AQI 324 पहुंचा, कई इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में

सोमवार को दिल्ली का औसत AQI 324 दर्ज किया गया, जो इस सीजन में पहली बार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंचा है। इससे पहले इस साल 4 फरवरी को राजधानी का AQI 339 दर्ज किया गया था। इस लिहाज से सोमवार को लगभग नौ महीने बाद प्रदूषण का स्तर इस ऊंचाई पर पहुंचा। शाम चार बजे जहांगीरपुरी में AQI 436 दर्ज किया गया, जबकि रोहिणी में 415 और पंजाबी बाग में 413 रहा। इन तीनों इलाकों में हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई।

दिल्ली के 58 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 37 पर AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। वहीं, 17 केंद्रों पर हवा की गुणवत्ता ‘खराब’ रही और तीन केंद्रों पर स्थिति ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई। केवल एक निगरानी केंद्र पर हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’ दर्ज की गई। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण की समस्या किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि राजधानी के बड़े हिस्से को प्रभावित कर रही है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार, AQI 301 से 400 के बीच होने पर हवा ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच होने पर ‘गंभीर’ मानी जाती है। दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है। इसके बेहद छोटे कण सांस के साथ फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को ऐसी स्थिति में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

जारी अनुमान के मुताबिक, 3 से 5 नवंबर तक दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रह सकती है। इसके बाद अगले छह दिनों में कुछ सुधार की संभावना जताई गई है और AQI ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच सकता है। हालांकि, वास्तविक स्थिति मौसम और प्रदूषण के स्रोतों में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगी।

GRAP-2 में कोयले-लकड़ी पर रोक, धूल और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण

दिल्ली-NCR में GRAP का पहला चरण 21 अक्टूबर 2026 को लागू किया गया था। अब प्रदूषण बढ़ने के बाद दूसरा चरण भी लागू कर दिया गया है। GRAP के तहत वायु गुणवत्ता बिगड़ने के साथ अलग-अलग स्तरों पर प्रतिबंध और नियंत्रण संबंधी उपाय लागू किए जाते हैं। दूसरे चरण में पहले चरण के सभी नियम जारी रहते हैं और उनके साथ अतिरिक्त कदम जोड़े जाते हैं।

GRAP-2 के प्रमुख उपायों में होटल, रेस्तरां और ढाबों में कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध शामिल है। इसका उद्देश्य खाना पकाने के दौरान होने वाले धुएं और उत्सर्जन को कम करना है। डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी सख्ती की जाएगी, ताकि बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर प्रदूषण न बढ़े।

निजी वाहनों की संख्या कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने का उपाय भी किया जाएगा। इसके पीछे उद्देश्य लोगों को सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही सड़कों की नियमित और मशीनों से सफाई बढ़ाई जाएगी। धूल उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जाएगा और जरूरत के अनुसार धूल नियंत्रित करने वाले विशेष पदार्थों का इस्तेमाल भी होगा।

निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी इस चरण का अहम हिस्सा है। निर्माण सामग्री को खुले में रखने, ढुलाई के दौरान धूल उड़ने और मलबे के अनुचित प्रबंधन जैसी गतिविधियों पर निगरानी जरूरी होगी। इन उपायों का प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब संबंधित एजेंसियां नियमित निरीक्षण करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।

GRAP-3 और GRAP-4 में बढ़ेंगी पाबंदियां, निर्माण कार्यों से लेकर वाहनों तक पर असर

यदि प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है तो GRAP के तीसरे और चौथे चरण के तहत अधिक सख्त प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं। GRAP-3 में पहले और दूसरे चरण के सभी उपाय जारी रहते हैं। इसके अतिरिक्त गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कार्यों पर रोक लगाई जाती है। इसमें मिट्टी की खुदाई, नींव के लिए पाइलिंग, खुली खाई खोदना, वेल्डिंग, पेंटिंग, प्लास्टर और टाइल लगाने जैसे काम शामिल हैं।

इस चरण में निर्माण सामग्री की ढुलाई पर भी नियंत्रण रहता है। कच्ची सड़कों और खुले इलाकों में सीमेंट, रेत, बालू, गिट्टी तथा फ्लाई ऐश जैसी सामग्री ले जाने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। स्टोन क्रशर, ईंट भट्ठों और खनन से जुड़ी गतिविधियों को भी बंद किया जा सकता है। इसके अलावा बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाली चार पहिया हल्की गाड़ियों के संचालन पर रोक लगाई जा सकती है। प्रदूषण की स्थिति के अनुसार स्कूलों में कक्षाएं ऑनलाइन कराने का निर्णय भी लिया जा सकता है।

GRAP-4 सबसे गंभीर स्तर है। यह तब लागू किया जाता है, जब AQI 450 के पार पहुंच जाता है। इस चरण में हाईवे, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली ट्रांसमिशन और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं सहित निर्माण कार्यों पर व्यापक रोक लगाई जा सकती है। वाहनों के संचालन पर भी अतिरिक्त प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।

शिक्षा और कार्यालयों पर भी इसका असर पड़ सकता है। छोटी कक्षाओं के लिए ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में पढ़ाई का विकल्प दिया जा सकता है। वहीं, सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम कराने तथा बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने का विकल्प अपनाया जा सकता है।

निष्कर्ष

दिल्ली-NCR में प्रदूषण का बढ़ता स्तर केवल पर्यावरण से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी गंभीर चुनौती है। GRAP-2 के तहत लागू किए गए प्रतिबंध प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। हालांकि, स्थायी सुधार के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल, निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना, कचरा और पत्तियां खुले में न जलाना तथा निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण जैसे प्रयास हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकते हैं।

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