अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद जिले के वेलाल क्षेत्र में मिनरल वॉटर सप्लाई के नाम पर बड़े पैमाने पर ठगी का मामला सामने आया है, जिसने व्यापारिक समुदाय में हलचल मचा दी है। आरोप है कि यहां एक मिनरल वॉटर प्लांट संचालित करने वाले दंपति ने ‘बंटी–बबली’ की तर्ज पर कई व्यापारियों से एडवांस में लाखों रुपये लेकर ऑर्डर तो स्वीकार किए, लेकिन तय समय पर माल की सप्लाई नहीं की। मामला सामने आने के बाद पूरे नेटवर्क को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, पालड़ी क्षेत्र में मिनरल वॉटर का कारोबार करने वाले एक व्यापारी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने आगामी सीजन में सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए वेलाल स्थित औद्योगिक पार्क में संचालित एक प्लांट के मालिक निलेश देलवाडिया और उनकी पत्नी अश्मिता से संपर्क किया था। बातचीत के दौरान दंपति ने दावा किया कि उनके पास पर्याप्त उत्पादन क्षमता है और वे बड़े ऑर्डर आसानी से पूरा कर सकते हैं।
विश्वास में लेकर व्यापारी ने करीब 10 हजार बॉक्स मिनरल वॉटर का ऑर्डर दिया और इसके एवज में एडवांस के तौर पर बड़ी राशि का भुगतान कर दिया। लेकिन तय समय बीतने के बावजूद न तो पूरा ऑर्डर सप्लाई किया गया और न ही रकम लौटाई गई। धीरे-धीरे मामला गंभीर होता गया और पीड़ित पक्ष को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है।
आरोप यह भी है कि यही दंपति केवल एक व्यापारी ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों से भी इसी तरह एडवांस भुगतान लेकर माल की डिलीवरी नहीं कर रहे थे। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह एक संगठित तरीके से चलाया जा रहा आर्थिक धोखाधड़ी का नेटवर्क हो सकता है, जिसमें अलग-अलग व्यापारियों को टारगेट किया गया।
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स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पीड़ित व्यापारी ने अपने पैसे वापस मांगने की कोशिश की। आरोप है कि इस दौरान निलेश देलवाडिया ने न केवल रकम लौटाने से इनकार किया, बल्कि धमकी भी दी कि यदि दबाव बनाया गया तो उसे झूठे मामले में फंसाया जा सकता है। इस तरह की धमकी से व्यापारिक समुदाय में भय का माहौल भी बताया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि आरोपित दंपति के खिलाफ पहले भी इसी तरह के आर्थिक लेनदेन से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। अब नए आरोपों के बाद यह संभावना और मजबूत हो गई है कि अन्य पीड़ित भी आगे आकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। व्यापारियों के बीच यह मामला तेजी से फैल रहा है और कई लोग अपने पुराने लेनदेन की समीक्षा करने लगे हैं।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और संबंधित दस्तावेज, लेनदेन रिकॉर्ड तथा भुगतान की जानकारियां खंगाली जा रही हैं। शुरुआती संकेत बताते हैं कि कई लाख रुपये के लेनदेन में अनियमितताएं पाई गई हैं, जिससे मामला और गंभीर हो सकता है।
व्यापारिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में एडवांस पेमेंट के आधार पर बिना ठोस एग्रीमेंट और सत्यापन के बड़े ऑर्डर देना जोखिम भरा साबित हो सकता है। यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि व्यापारिक लेनदेन में पारदर्शिता और दस्तावेजी सुरक्षा बेहद जरूरी है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और यह संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं, जिससे इस कथित ठगी के दायरे का और बड़ा खुलासा हो सकता है।
