गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में यू.पी. को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की शाखा में हुए 21.47 करोड़ के कथित घोटाले में पुलिस ने मुख्य आरोपी पूर्व बैंक मैनेजर पवन कुमार पाल के दोनों बेटों जय प्रताप सिंह और राज प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पिछले करीब नौ महीने से फरार चल रहे थे। पुलिस ने 18 अक्टूबर की शाम उन्हें गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया। मामले में कुल 16 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अब तक नौ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि तीन आरोपी अभी फरार हैं। दो अन्य आरोपियों को अग्रिम जमानत मिली हुई है।
जनवरी 2026 में सामने आया था घोटाला
बैंक में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा 12 जनवरी 2026 को हुआ था। बैंक के सहायक शाखा प्रबंधक भुवन चंद्र सती की शिकायत पर नगर कोतवाली में तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल, तत्कालीन प्रबंधक सुशील गौतम, तत्कालीन सहायक कैशियर पवन कुमार और अजय कुमार समेत कुल 16 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 14 जनवरी 2026 को बैंक के महाप्रबंधक कपिल पाठक ने पवन कुमार पाल, सुशील गौतम और अजय कुमार को निलंबित कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने बैंक के खातों, ऋण वितरण से जुड़े दस्तावेजों और संदिग्ध लेनदेन की जांच शुरू की।
205 खाताधारकों के खातों से 21.47 करोड़ के गबन का आरोप
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर आपसी मिलीभगत से एक गिरोह बनाया था। इस दौरान 205 खाताधारकों के ऋण और बचत खातों के साथ-साथ बैंक के पांच आंतरिक खातों का दुरुपयोग किया गया। इन खातों से कुल 21.47 करोड़ के गबन का आरोप है।
पुलिस की जांच के मुताबिक, ऋण वितरण से पहले आवश्यक दस्तावेजों का उचित सत्यापन नहीं किया गया। कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के आधार पर बड़ी संख्या में ऋण स्वीकृत किए गए। इसके अलावा बैंक के पांच आंतरिक खातों से फर्जी तरीके से 46.13 लाख अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर निकाले गए।
घोटाले की रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर कुछ ऋण खातों की किस्तें चुकाने में भी किया जाता था। इससे खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित होने से बच जाते थे और बैंक मुख्यालय को लंबे समय तक अनियमितताओं की जानकारी नहीं मिल पाती थी।
परिवार के खातों में भी रकम भेजने का आरोप
जांच में मुख्य आरोपी पवन कुमार पाल के परिवार के सदस्यों के बैंक खातों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। आरोप है कि गबन की गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए परिवार के खातों में धनराशि स्थानांतरित की गई थी।
पवन कुमार पाल की मां सुमित्रा पाल के खाते में भी रकम भेजे जाने की बात सामने आई। उनकी अब मृत्यु हो चुकी है। पवन पाल की पत्नी संजना सिंह को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
पुलिस के अनुसार, उनके दोनों बेटों जय प्रताप सिंह और राज प्रताप सिंह की भी कथित तौर पर घोटाले में भूमिका थी। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां आरोपियों के खातों में हुए लेनदेन और कथित तौर पर गबन की गई रकम के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
तीन हजार पन्नों की चार्जशीट, विशेष ऑडिट में पुष्टि
मामले की शुरुआती जांच तत्कालीन क्राइम इंस्पेक्टर सभाजीत सिंह ने की थी। उन्होंने न्यायालय में करीब 3,000 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया था। भारतीय रिजर्व बैंक के पैनल में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंट से कराए गए विशेष ऑडिट में 21.47 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने की बात सामने आई। जांच में पवन कुमार पाल को कथित घोटाले का मुख्य सूत्रधार बताया गया।
बाद में मामले की जांच नगर क्षेत्राधिकारी योगेंद्र सिंह को सौंप दी गई। अप्रैल 2026 में प्रवर्तन निदेशालय की लखनऊ टीम ने भी बैंक से संबंधित दस्तावेज जुटाए थे। इससे मामले में वित्तीय लेनदेन और कथित तौर पर गबन की गई रकम से जुड़े पहलुओं की जांच का दायरा बढ़ा।
नौ आरोपी जेल में, तीन की तलाश जारी
नगर क्षेत्राधिकारी योगेंद्र सिंह के अनुसार, मामले में अब तक नौ आरोपी गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं। इनमें पवन कुमार पाल, जय प्रताप सिंह, राज प्रताप सिंह, अजय कुमार, सुशील कुमार गौतम, राघव राम, शिवाकांत वर्मा, गीता देवी और मोहम्मद असलम शामिल हैं।
तीन आरोपी अब भी फरार हैं। इनमें रितेंद्र पाल सिंह, सहायक कैशियर पवन कुमार और खाताधारक फूल मोहम्मद शामिल हैं। वहीं, दुष्यंत प्रताप और प्रदीप कुमार सिंह को लखनऊ हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली हुई है।
7.02 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क
पुलिस ने आरोपियों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है। 21 अगस्त 2026 को पवन कुमार पाल, सुशील गौतम, राघव राम और शिवाकांत वर्मा की करीब 5.94 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई थी।
इसके बाद 18 अक्टूबर को न्यायालय के आदेश पर फरार आरोपी फूल मोहम्मद की करीब 1.08 करोड़ की संपत्ति भी कुर्क कर ली गई। इस तरह अब तक की गई इन दोनों कार्रवाइयों में कुल 7.02 करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। पुलिस बाकी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। मामले में कथित गबन की पूरी रकम का पता लगाने और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच भी जारी है।
