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Policy Watch

अब 100% इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों का रास्ता साफ, केंद्र ने बदले मोटर वाहन नियम

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksOctober 26, 2026No Comments4 Mins Read
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केंद्र सरकार ने E100 ईंधन के लिए मोटर वाहन नियमों में संशोधन किया। जानिए E20 और E100 में अंतर और वाहन चालकों पर इसका असर।
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में E100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल ईंधन के इस्तेमाल को नियामकीय मंजूरी देने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित कर दिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 26 अक्टूबर 2026 को अधिसूचित इन बदलावों से वाहन निर्माता कंपनियों के लिए अधिक इथेनॉल वाले ईंधन पर चलने वाले वाहनों के विकास और पेशकश का रास्ता स्पष्ट होगा।

संशोधित नियमों के तहत E85 और E100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रणों का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें निर्माता ने इनके अनुरूप डिजाइन किया हो और जिनको आवश्यक प्रमाणन प्राप्त हो। इसका मतलब है कि सामान्य पेट्रोल या E20 ईंधन के लिए तैयार मौजूदा गाड़ियों में सीधे E100 इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। ऐसा करना वाहन के इंजन और ईंधन प्रणाली के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

E20 और E100 में क्या है अंतर?

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। वहीं E85 में लगभग 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। E100 का मतलब लगभग पूरी तरह इथेनॉल से बने ईंधन से है। इसकी सटीक संरचना निर्धारित ईंधन विनिर्देशों के अनुसार हो सकती है।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन इस तरह तैयार किए जाते हैं कि वे पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन पर चल सकें। इसके लिए इंजन और ईंधन आपूर्ति प्रणाली को उच्च इथेनॉल सांद्रता के अनुकूल बनाया जाता है। ऐसे वाहन ईंधन के मिश्रण के अनुसार अपने संचालन को समायोजित करने में सक्षम होते हैं।

हालांकि, E20 पेट्रोल के लिए स्वीकृत वाहन को फ्लेक्स-फ्यूल वाहन नहीं माना जा सकता। किसी गाड़ी में E100 इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं, यह उसके निर्माता की तकनीकी स्वीकृति और प्रमाणन पर निर्भर करेगा।

मोटर वाहन नियमों में क्या बदला?

सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 115 और नियम 115E के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन किए हैं। इनमें उत्सर्जन संबंधी तालिकाओं, ईंधन विनिर्देशों और वाहन परीक्षण की प्रक्रियाओं में E100 को शामिल किया गया है। पहले कई प्रावधानों में E85 का उल्लेख था, जिसे संशोधित कर E85 या E100 किया गया है।

नियमों में एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव हल्के पेट्रोल और डीजल वाहनों से संबंधित निर्धारित सकल वाहन भार सीमा में किया गया है। संबंधित प्रावधानों के तहत यह सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी गई है। इसके अलावा, तकनीकी तालिकाओं और वैकल्पिक ईंधनों से जुड़े कुछ संदर्भों में भी संशोधन किया गया है।

ये बदलाव अप्रैल 2026 में जारी मसौदा नियमों पर सार्वजनिक आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाने के बाद अधिसूचित किए गए हैं।

वाहन निर्माताओं के लिए नए अवसर

E100 को नियमों में शामिल किए जाने से उन वाहन कंपनियों को नियामकीय स्पष्टता मिलेगी, जो अधिक इथेनॉल वाले ईंधन पर चलने वाले मॉडल विकसित कर रही हैं। जून 2026 में मारुति सुजुकी इंडिया ने अपनी वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल कार पेश की थी, जिसे E20 से E100 तक के इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों पर चलाने के लिए तैयार किया गया है।

टोयोटा, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी कंपनियां भी भारतीय बाजार के लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम कर रही हैं। हालांकि, इन वाहनों का व्यापक इस्तेमाल ईंधन की उपलब्धता, कीमत, वाहन की लागत और ग्राहकों के लिए परिचालन खर्च जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश

भारत लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति को बढ़ावा दे रहा है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू कृषि आधारित उद्योगों के लिए मांग बढ़ाना और परिवहन क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधनों को प्रोत्साहित करना है।

देश में E20 पेट्रोल की शुरुआत इसी रणनीति का हिस्सा है। अब E100 को नियामकीय ढांचे में शामिल करने से ऐसे वाहनों के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ेंगी, जो पेट्रोल के स्थान पर अधिक मात्रा में इथेनॉल का उपयोग कर सकते हैं।

हालांकि, इस संशोधन का अर्थ यह नहीं है कि सभी पेट्रोल पंपों पर E100 तत्काल उपलब्ध हो जाएगा या सामान्य पेट्रोल वाहनों में इसका इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। इसके लिए उपयुक्त वाहनों के निर्माण और प्रमाणन के साथ ईंधन की आपूर्ति तथा वितरण व्यवस्था का विकास भी जरूरी होगा।

कुल मिलाकर, नए नियम भारत में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के विस्तार की दिशा में एक अहम नियामकीय कदम हैं। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वाहन निर्माता ऐसे मॉडल कितनी तेजी से बाजार में लाते हैं और उच्च इथेनॉल वाले ईंधन की उपलब्धता कितनी व्यापक होती है।

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