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याददाश्त बचाना चाहते हैं? हार्वर्ड डॉक्टर ने बताए 5 खाने से परहेज़ करें

BharatSpeaksBy BharatSpeaksAugust 13, 2025No Comments2 Mins Read

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की न्यूट्रिशनल साइकियाट्रिस्ट डॉ. उमा नाइडू ने पांच ऐसे सामान्य खाद्य पदार्थों की पहचान की है, जो लंबे समय में मस्तिष्क की कार्यक्षमता को कमजोर कर सकते हैं और डिमेंशिया का खतरा बढ़ा सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर न्यूरोलॉजिकल रोगों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

1. अतिरिक्त शर्करा और स्मृति पर असर

डॉ. नाइडू का कहना है कि सोडा, मिठाइयों और हाई-फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप वाले खाद्य पदार्थ मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस हिस्से को प्रभावित कर सकते हैं, जो स्मृति और सीखने के लिए अहम है। अत्यधिक शर्करा का सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा और डायबिटीज़ को जन्म देता है, जो आगे चलकर संज्ञानात्मक गिरावट (cognitive decline) से जुड़े हैं।

2. तली हुई चीज़ें और न्यूरल इंफ्लेमेशन

फ्रेंच फ्राइज, पकौड़े, तला हुआ चिकन जैसी डीप-फ्राइड चीज़ें उच्च तापमान पर बनने वाले हानिकारक यौगिकों से भरपूर होती हैं। ये रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा कर मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के प्रवाह को बाधित कर सकती हैं, जिससे स्मृति कमजोर होती है और प्रतिक्रिया समय धीमा हो जाता है।

3. प्रोसेस्ड मीट, कार्बोहाइड्रेट और शराब का असर

सफेद ब्रेड, पास्ता जैसे उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले कार्बोहाइड्रेट अचानक रक्त शर्करा बढ़ाते हैं, जिससे ऑक्सीडेटिव तनाव और न्यूरॉन्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वहीं, शराब का अधिक सेवन नींद, पोषण अवशोषण और न्यूरोट्रांसमीटर संतुलन को बिगाड़ता है।
बेकन, सॉसेज और सलामी जैसे प्रोसेस्ड मीट्स में पाए जाने वाले नाइट्रेट्स आंत के माइक्रोबायोम को बदल सकते हैं और मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर डाल सकते हैं।

अध्ययन का व्यापक संदेश
डॉ. नाइडू की सिफारिशें MIND डाइट के अनुरूप हैं, जो मेडिटरेनियन और DASH डाइट का संयोजन है। इसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, बेरीज, साबुत अनाज, नट्स और जैतून का तेल शामिल है, जो उम्र बढ़ने के साथ संज्ञानात्मक ह्रास को धीमा कर सकते हैं।
हाल के एक हार्वर्ड अध्ययन ने यह भी पाया कि उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा और गुर्दे की समस्याएं जैसे कारक चुपचाप मस्तिष्क की क्षमता को कम करते हैं।
डॉ. नाइडू कहती हैं, “स्मृति की सुरक्षा किसी एक जादुई भोजन से नहीं, बल्कि रोज़ाना किए जाने वाले सही चुनावों से होती है।”

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