लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में आवासीय प्लॉट आवंटन के नाम पर कथित ₹43 लाख की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के निदेशकों समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आवासीय योजना के तहत प्लॉट आवंटित किए जाने के बावजूद उसे बाद में किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्लॉट आवंटन के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप
शिकायत के अनुसार, आजमगढ़ जिले के सिधारी निवासी भूपेंद्र वीर सिंह ने अपने पश्चिम बंगाल निवासी रिश्तेदार नितिन नरसरिया के साथ अक्टूबर 2024 में लखनऊ में आवासीय प्लॉट खरीदने के लिए अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर से संपर्क किया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान उनकी मुलाकात कंपनी के निदेशक प्रणव अंसल और सुशील अंसल से हुई, जिन्होंने प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
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आवंटन के बाद प्लॉट दूसरे व्यक्ति को बेचने का आरोप
एफआईआर के अनुसार, आरोप है कि एसजीपीजीआई के डॉ. नारायण प्रसाद और उनकी पत्नी रेनू को आवंटित प्लॉट का नामांतरण रियल एस्टेट कारोबारी अभिषेक सिंह के माध्यम से शिकायतकर्ता के नाम कराया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि लगभग ₹43 लाख का भुगतान करने और प्लॉट आवंटित होने के बावजूद वही प्लॉट बाद में किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ।
पुलिस ने शुरू की जांच
पुलिस ने शिकायत के आधार पर अंसल समूह के निदेशकों समेत छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान आवंटन रिकॉर्ड, संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और अन्य संबंधित साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है, ताकि आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सके।
जांच अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
