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Home»क्राइम»चार साल से पुलिस को चकमा दे रहा था एलडीए फर्जीवाड़े का आरोपी, ₹35 लाख की डील ने खोला राज
क्राइम

चार साल से पुलिस को चकमा दे रहा था एलडीए फर्जीवाड़े का आरोपी, ₹35 लाख की डील ने खोला राज

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 4, 2026No Comments4 Mins Read
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जाली दस्तावेजों के जरिए 1,250 वर्गफुट के एलडीए प्लॉट की बिक्री कराने का आरोप; बिक्री की रकम का हिस्सा बैंक खाते में पहुंचा, तकनीकी निगरानी के बाद गोमती नगर विस्तार से गिरफ्तारी
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लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की संपत्ति से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में करीब चार साल से गिरफ्तारी से बच रहे 36 वर्षीय सचिन सिंह को लखनऊ क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक ऐसे गिरोह का हिस्सा था, जिसने एलडीए की संपत्ति से जुड़े जाली दस्तावेज तैयार कर उसे अवैध तरीके से बेचने की कथित साजिश रची। पुलिस ने उसे 1 सितंबर को गोमती नगर विस्तार के छोटा भरवारा इलाके में इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास से गिरफ्तार किया।
मामला गोमती नगर के विराज खंड स्थित एलडीए के 1,250 वर्गफुट के भूखंड से जुड़ा है। जांच के अनुसार, इस संपत्ति से संबंधित कथित जाली दस्तावेज शिवानी रस्तोगी के नाम पर तैयार किए गए थे। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल भूखंड की बिक्री का रास्ता तैयार करने के लिए किया गया। इसके बाद संपत्ति वैष्णवी सोनी को बेची गई और बाद में रंजना देवी के हाथों ₹35 लाख में दोबारा बेच दी गई।
जांच के दौरान पुलिस को बिक्री से जुड़े वित्तीय लेनदेन में सचिन सिंह की कथित भूमिका का सुराग मिला। जांचकर्ताओं के अनुसार, संपत्ति की बिक्री से प्राप्त रकम का एक हिस्सा उसके बैंक खाते में स्थानांतरित हुआ था। बैंक खाते में पहुंची इस रकम ने पुलिस को कथित साजिश में उसकी भूमिका की ओर इशारा किया। इसके बाद उसके बैंक लेनदेन और मामले से जुड़े अन्य रिकॉर्ड की जांच की गई।
पुलिस के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने और अपने खिलाफ कार्रवाई की भनक लगने के बाद सचिन सिंह कथित तौर पर फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने लखनऊ छोड़कर ललितपुर में ठिकाना बना लिया था। लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहने के कारण उसकी तलाश लगातार जारी रही। बाद में तकनीकी निगरानी के जरिए जांचकर्ताओं को उसकी गतिविधियों और संभावित ठिकाने के बारे में जानकारी मिली।
तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने उसकी लोकेशन की पुष्टि करने के बाद निगरानी बढ़ाई। इसके बाद टीम ने उसे छोटा भरवारा क्षेत्र में घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि एलडीए के कथित फर्जीवाड़े में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी और संपत्ति की बिक्री से उसे कितनी रकम मिली थी।

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पुलिस के अनुसार, सचिन सिंह बीएससी स्नातक है। जांचकर्ता यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि कथित जाली दस्तावेज किसने तैयार किए और उन्हें वास्तविक दस्तावेजों की तरह इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे। इसके अलावा, एलडीए के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर किस स्तर पर हुआ और संपत्ति को अलग-अलग लोगों के नाम स्थानांतरित कराने में किसकी भूमिका रही, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
जांच में बैंक खाते का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। पुलिस यह मिलान कर रही है कि संपत्ति की बिक्री से जुड़ी रकम किस तारीख को और किस माध्यम से आरोपी के खाते में पहुंची। इसके साथ ही बिक्री दस्तावेज, संपत्ति के रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। इससे कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के बीच पैसों के लेनदेन की पूरी कड़ी सामने आने की उम्मीद है।
एलडीए की संपत्तियों से जुड़े फर्जीवाड़े के मामलों में जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर वास्तविक मालिकाना हक को बदलने या संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति के नाम बेचने की कोशिश की जाती है। इस मामले में भी पुलिस कथित तौर पर तैयार किए गए दस्तावेजों की सत्यता और उनके आधार पर किए गए सभी लेनदेन की जांच कर रही है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर उसके कथित सहयोगियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर संपत्ति की बिक्री और रकम के बंटवारे तक पूरी प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे। यदि जांच के दौरान अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि एलडीए की संपत्तियों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। मौजूदा मामले में दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को एक साथ जोड़कर कथित साजिश की पूरी तस्वीर तैयार की जा रही है।
फिलहाल सचिन सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। पुलिस उसके कथित सहयोगियों और संपत्ति के जाली दस्तावेज तैयार करने से लेकर ₹35 लाख में बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं।
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