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Home»Policy Watch»ऑनलाइन स्कैम पर म्यांमार का सबसे सख्त वार: जबरन साइबर ठगी करवाने पर अब मौत की सजा का प्रावधान
Policy Watch

ऑनलाइन स्कैम पर म्यांमार का सबसे सख्त वार: जबरन साइबर ठगी करवाने पर अब मौत की सजा का प्रावधान

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 28, 2026No Comments4 Mins Read
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साइबर फ्रॉड, मानव तस्करी और क्रिप्टो स्कैम पर शिकंजा कसने के लिए संसद ने पारित किया नया कानून; ऑनलाइन स्कैम सेंटर चलाने वालों को भी आजीवन कारावास तक की सजा
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यांगून: साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए म्यांमार ने दुनिया के सबसे कठोर कानूनों में से एक लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सैन्य समर्थित संसद ने मंगलवार को एंटी-ऑनलाइन स्कैम विधेयक पारित कर दिया, जिसके तहत लोगों को बंधक बनाकर, हिंसा या यातना देकर ऑनलाइन ठगी कराने वाले दोषियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। कानून में ऑनलाइन स्कैम सेंटर संचालित करने और बड़े पैमाने पर क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क चलाने वालों के लिए भी आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।

राजधानी नेपीडॉ में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में विधेयक को मंजूरी दी गई। संसद अध्यक्ष आंग लिन द्वे ने सरकारी टेलीविजन प्रसारण के दौरान इसकी पुष्टि की। निचले सदन के सांसद आए चान ने भी बताया कि चर्चा के बाद विधेयक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया और मृत्युदंड संबंधी प्रावधान अंतिम कानून का हिस्सा बना रहा।

मई में सार्वजनिक किए गए मसौदा विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति हिंसा, अवैध हिरासत, यातना या क्रूर व्यवहार के जरिए किसी को ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर करता है तो उसे 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। यदि इस अपराध के दौरान पीड़ित की मौत हो जाती है, तो दोषी को मृत्युदंड दिया जाएगा।

कानून में उन लोगों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है जो संगठित रूप से ऑनलाइन स्कैम सेंटर संचालित करते हैं या डिजिटल मुद्रा यानी क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का संचालन करते हैं। ऐसे मामलों में अदालत दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा सुना सकेगी।

Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference

पिछले कुछ वर्षों में गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे म्यांमार में ऑनलाइन ठगी का विशाल नेटवर्क तेजी से फैला है। देश दक्षिण-पूर्व एशिया के उस साइबर अपराध गलियारे का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है, जहां से दुनिया भर के लोगों को फर्जी निवेश योजनाओं, रोमांस स्कैम, क्रिप्टो निवेश, फर्जी कॉल सेंटर और अन्य डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए निशाना बनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, इन स्कैम सेंटरों में हजारों विदेशी नागरिकों को नौकरी का झांसा देकर बुलाया गया और बाद में उन्हें जबरन साइबर ठगी करने के लिए बंधक बनाकर रखा गया। कई पीड़ितों ने बचाए जाने के बाद बताया कि उनसे मारपीट की गई, यातनाएं दी गईं और लक्ष्य पूरा न करने पर गंभीर शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

यह नया कानून म्यांमार की नई सरकार द्वारा पारित पहला प्रमुख विधेयक भी है। सरकार का नेतृत्व पूर्व सैन्य प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग कर रहे हैं। उन्होंने 2021 में सैन्य तख्तापलट कर निर्वाचित सरकार को हटाया था, जिसके बाद देश में व्यापक संघर्ष और गृहयुद्ध शुरू हो गया। अप्रैल 2026 में प्रतिबंधित चुनावों के बाद उन्होंने नागरिक राष्ट्रपति का पद संभाला, हालांकि विपक्षी नेता आंग सान सू की और उनकी पार्टी चुनाव प्रक्रिया से बाहर रहे।

कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा संसद पूरी तरह सैन्य समर्थक है और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पश्चिमी देशों और लोकतंत्र समर्थक संगठनों ने इन चुनावों की आलोचना करते हुए उन्हें सैन्य शासन की छवि सुधारने का प्रयास बताया है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार में जारी गृहयुद्ध और कमजोर प्रशासनिक नियंत्रण का फायदा उठाकर संगठित अपराध गिरोहों ने किलेनुमा परिसरों में बड़े साइबर स्कैम नेटवर्क खड़े कर लिए हैं। यहां से संचालित ठगी गिरोह एशिया, यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों के नागरिकों को निशाना बनाते हैं। नए कानून का उद्देश्य ऐसे नेटवर्क पर कड़ा कानूनी शिकंजा कसना, मानव तस्करी पर रोक लगाना और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के खिलाफ सख्त संदेश देना है। साथ ही यह कानून जबरन साइबर अपराध कराने वाले संगठनों पर कार्रवाई के लिए म्यांमार की न्याय व्यवस्था को व्यापक कानूनी अधिकार भी प्रदान करता है।

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