नई दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से व्यापक संस्थागत सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ‘Build New NTA’ मिशन के तहत एजेंसी ने साइबर सुरक्षा, सूचना सुरक्षा, फोरेंसिक जांच, टेस्ट सेंटर प्रबंधन और परीक्षा मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वरिष्ठ विशेषज्ञों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह पहल पिछले वर्षों में सामने आए पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
एनटीए ने अपने आधिकारिक लिंक्डइन पोस्ट में कहा है कि प्रो. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स (HLCE) की सिफारिशों के आधार पर एजेंसी अपने इतिहास के सबसे बड़े संस्थागत सुधार से गुजर रही है। एजेंसी के अनुसार अकादमिक गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, संचालन और प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि देशभर के करोड़ों अभ्यर्थियों को अधिक भरोसेमंद और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराई जा सके।
इस अभियान के तहत चार वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर भर्ती निकाली गई है। इनमें जनरल मैनेजर (Assessment – Research & Development and Psychometrics), जनरल मैनेजर (Test Centre Network and Operations), चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर (CISO) तथा जनरल मैनेजर (Vigilance, Investigation and Forensics) के पद शामिल हैं। इन नियुक्तियों का उद्देश्य परीक्षा संचालन, डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और जांच तंत्र को पहले से अधिक मजबूत बनाना है।
इन वरिष्ठ पदों के अलावा एनटीए ने यंग प्रोफेशनल्स के लिए भी अवसर उपलब्ध कराए हैं। एजेंसी ने सिविल सेवा परीक्षाओं में शामिल हो चुके योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। भर्ती प्रक्रिया के तहत अकादमिक रिसर्च के 12 पद, लीगल रिसर्च के दो पद तथा फाइनेंस एंड अकाउंट्स रिसर्च के दो पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों के माध्यम से नीति निर्माण, अनुसंधान और परीक्षा सुधारों में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
यह भर्ती ऐसे समय में शुरू की गई है जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लागू करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भविष्य के अनुरूप बनाने के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। यह विशेषज्ञ समिति परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल अवसंरचना, तकनीकी नवाचार, प्रशासनिक सुधार और संचालन संबंधी व्यवस्थाओं पर विस्तृत सिफारिशें तैयार करेगी।
Future Crime Research Foundation (FCRF) का मानना है कि देश में बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली डिजिटल परीक्षाओं के लिए केवल मजबूत आईटी अवसंरचना पर्याप्त नहीं है, बल्कि साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, जोखिम प्रबंधन और रीयल-टाइम निगरानी जैसी बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था भी आवश्यक है। संस्था के अनुसार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर समन्वित सुधार जरूरी हैं।
Algoritha Security के एक शोधकर्ता का कहना है कि आधुनिक परीक्षा प्रणालियों की सुरक्षा के लिए एआई आधारित थ्रेट डिटेक्शन, नेटवर्क मॉनिटरिंग, डिजिटल लॉग विश्लेषण, एक्सेस कंट्रोल और निरंतर सुरक्षा ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को अपनाना समय की आवश्यकता है। इससे संभावित साइबर हमलों, डेटा लीक और परीक्षा प्रक्रिया में छेड़छाड़ के प्रयासों की शुरुआती स्तर पर ही पहचान कर उन्हें रोका जा सकता है।
हालांकि यह भर्ती सीधे किसी एक घटना से जुड़ी कार्रवाई नहीं है, लेकिन इसे परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने और भविष्य में पेपर लीक तथा साइबर सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी विशेषज्ञता, मजबूत सुरक्षा ढांचा, पारदर्शी संचालन और प्रभावी निगरानी को एकीकृत किया जाता है, तो देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को लंबे समय तक मजबूत आधार मिल सकता है।
