नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ₹3,400 करोड़ के बड़े IT और AI अपग्रेड प्लान को मंजूरी दी है। इस निवेश का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम को आधुनिक बनाना, साइबर फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाना और ग्राहकों को सुरक्षित डिजिटल सेवाएं प्रदान करना है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब देश में डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड, फिशिंग अटैक, अकाउंट टेकओवर और AI आधारित साइबर हमलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। बैंकिंग सेक्टर लगातार अधिक जटिल और तकनीकी रूप से उन्नत खतरों का सामना कर रहा है।
PNB के एमडी और CEO अशोक चंद्र ने कहा कि बैंक AI आधारित एनालिटिक्स, प्रेडिक्टिव फ्रॉड डिटेक्शन और ऑटोमेटेड कस्टमर सर्विस सिस्टम को तेजी से लागू कर रहा है, जिससे सुरक्षा और सेवा दोनों में सुधार होगा।
बैंक जल्द ही जनरेटिव AI और डेटा एनालिटिक्स के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने हेतु RFP जारी करेगा, जिसमें साइबर रिस्क मैनेजमेंट और रियल टाइम फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम पर विशेष फोकस होगा।
इस पहल के तहत ‘स्ट्रैटेजिक इनोवेशन लैब’ स्थापित की गई है, जिसमें 200 से अधिक इंजीनियर AI और साइबर सुरक्षा परियोजनाओं पर काम करेंगे।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में AI आधारित फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है और साइबर अपराधी लगातार नई तकनीकों का उपयोग कर सुरक्षा प्रणालियों को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज के समय में साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर और AI टूल्स का उपयोग कर पारंपरिक सुरक्षा परतों को बायपास करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में बैंकों को रियल टाइम मॉनिटरिंग और व्यवहार आधारित एनालिटिक्स पर अधिक ध्यान देना होगा।”
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वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो PNB ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में ₹5,225 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। हालांकि शुद्ध ब्याज आय में 3.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जिससे बैंकिंग मार्जिन पर दबाव बना रहा। इसके बावजूद बैंक की जमा वृद्धि 9.1 प्रतिशत और बचत खातों में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बैंक ने लगभग 47 लाख नए खातों के माध्यम से ₹22,000 करोड़ की जमा राशि जुटाई है, जबकि MSME ऋण पोर्टफोलियो बढ़कर ₹1.95 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
भारत में डिजिटल भुगतान और मोबाइल बैंकिंग के विस्तार के साथ साइबर फ्रॉड के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल सेंटर, OTP स्कैम और मैलवेयर आधारित हमले अब आम होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग सिस्टम जितना अधिक डिजिटल हो रहा है, उतना ही साइबर अपराधियों के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। इसी वजह से बैंक अब AI और मशीन लर्निंग आधारित सुरक्षा सिस्टम की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, ताकि संदिग्ध गतिविधियों को रियल टाइम में पहचाना जा सके और नुकसान से पहले ही रोका जा सके।
यह स्पष्ट है कि बैंकिंग सेक्टर में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। PNB का यह कदम अन्य बैंकों के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो साइबर सुरक्षा और AI आधारित तकनीक में निवेश बढ़ा सकते हैं। नियामक संस्थाएं भी लगातार बैंकों को सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के निर्देश दे रही हैं। ग्राहकों को भी सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या मैसेज से सतर्क रहें और अपने बैंकिंग विवरण साझा न करें। आने वाले समय में AI आधारित सिस्टम बैंकिंग सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकते हैं।
