देहरादून के रियल एस्टेट सेक्टर में एक गंभीर विवाद उभरकर सामने आया है, जहां Earthcon Developers Pvt. Ltd. के राजपुर क्षेत्र स्थित रायपुर ग्रीन्स (राजपुर ग्रीन सोसाइटी) प्रोजेक्ट के रेजिडेंट्स ने व्यापक अनियमितताओं और वादाखिलाफी के आरोप लगाते हुए RERA का रुख किया है। जिस प्रोजेक्ट को आधुनिक सुविधाओं और प्रीमियम लाइफस्टाइल के नाम पर बेचा गया था, वही अब निवासियों के लिए “संघर्ष और असुविधा का केंद्र” बनता जा रहा है।
वादों और हकीकत के बीच खाई
निवासियों का आरोप है कि बिल्डर ने आकर्षक ब्रोशर और विज्ञापनों के जरिए स्विमिंग पूल, हेल्थ क्लब, जिम और अन्य प्रीमियम सुविधाओं का वादा किया था। विशेष रूप से छ मंजिल वाली बिल्डिंग में स्विमिंग पूल और फिटनेस सुविधाओं का दावा किया गया था। हालांकि, प्रोजेक्ट में रहने वाले लोगों के अनुसार, आज तक इन सुविधाओं का कोई अस्तित्व नहीं है। इसे वे भ्रामक प्रचार और उपभोक्ताओं के साथ धोखे का स्पष्ट मामला मान रहे हैं।

अधूरी सुविधाओं के बीच पजेशन
रेजिडेंट्स का कहना है कि कॉमन एरिया और जरूरी सुविधाएं पूरी किए बिना ही उन्हें फ्लैट्स का पजेशन दे दिया गया। यह न केवल अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा और जीवन-स्तर से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
आर्थिक बोझ और पारदर्शिता की कमी
सोसाइटी में रहने वाले लोगों ने मेंटेनेंस और बिजली के नाम पर अत्यधिक शुल्क वसूले जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इन खर्चों का कोई स्पष्ट और पारदर्शी विवरण साझा नहीं किया जाता, जिससे संदेह और असंतोष बढ़ रहा है।
RWA गठन में बाधा और कानून की अनदेखी
निवासियों के अनुसार, बिल्डर द्वारा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के गठन में बाधा डाली जा रही है। जबकि नियमों के अनुसार, पजेशन के एक वर्ष के भीतर मेंटेनेंस और प्रबंधन RWA को सौंपना आवश्यक होता है, लेकिन इस प्रोजेक्ट में ऐसा नहीं किया गया। इससे निवासियों को अपने ही आवासीय परिसर के प्रबंधन में भागीदारी से वंचित रहना पड़ रहा है।

बुनियादी सुविधाओं का संकट
सोसाइटी में पानी और बिजली की गंभीर समस्या बताई जा रही है। निवासियों का कहना है कि नियमित बिजली कटौती आम हो गई है और बैकअप के लिए पर्याप्त डीजल तक उपलब्ध नहीं कराया जाता। जल आपूर्ति भी अनियमित है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
जानलेवा बनता बिजली संकट
स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब इसका असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। रेजिडेंट्स के अनुसार, सोसाइटी में 2 से 3 बुजुर्ग ऐसे हैं जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर निर्भर हैं। बिजली कटौती के दौरान उन्हें गंभीर खतरे का सामना करना पड़ा। यह केवल सुविधा की कमी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जीवन से जुड़े जोखिम का मामला बन गया है।
शिकायतों की अनदेखी
निवासियों का आरोप है कि उनकी शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।

RERA में शिकायत और संभावित कार्रवाई
इन सभी मुद्दों को लेकर रेजिडेंट्स ने RERA में शिकायत दर्ज कराई है। RERA के तहत बिल्डर पर ब्रोशर में किए गए वादों को पूरा करने की कानूनी जिम्मेदारी होती है। अधूरी सुविधाओं के साथ पजेशन देना, RWA हैंडओवर में देरी और पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे कार्रवाई के दायरे में आते हैं।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो बिल्डर को अधूरी सुविधाएं पूरी करने, निवासियों को मुआवजा देने और नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना भुगतने का आदेश दिया जा सकता है।
व्यापक असर
यह मामला केवल एक सोसाइटी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और होमबायर्स के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। तेजी से बढ़ते शहरी विकास के बीच यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि नियामक संस्थाओं की सख्ती और बिल्डर्स की जवाबदेही सुनिश्चित करना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
