लुधियाना। पंजाब के लुधियाना में कृषि मशीनरी क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा कॉर्पोरेट विवाद अब आपराधिक जांच के दायरे में पहुंच गया है। डेहलों थाना पुलिस ने एक कृषि मशीनरी निर्माण कंपनी के जापानी मैनेजिंग डायरेक्टर सहित पांच अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि डेमो, फील्ड ट्रायल और कृषि प्रदर्शनियों के लिए रिटर्नेबल आधार पर ली गई ₹61.60 लाख से अधिक मूल्य की मशीनें दो वर्ष बीत जाने के बावजूद वापस नहीं की गईं।
मामला गांव आलमगीर स्थित जगतसुख इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता जगजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि संबंधित कंपनी के अधिकारियों ने वर्ष 2023 के दौरान विभिन्न राज्यों में कृषि प्रदर्शनियों और फील्ड डेमो के लिए विशेष कृषि मशीनें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। अधिकारियों ने यह आश्वासन दिया था कि मशीनों का उपयोग केवल सीमित अवधि के लिए किया जाएगा और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें वापस लौटा दिया जाएगा।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर मुनेनोरी ओहटा, डिप्टी डायरेक्टर तकायुकी साइटो, हरमीत सिंह, ऋत्विक दास और तोशियो कोंडो के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों पर आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत के अनुसार, जगतसुख इंडस्ट्रीज ने आरोपियों के आश्वासनों पर भरोसा करते हुए चार राइड-ऑन बूम स्प्रेयर मशीनें डिलीवरी चालानों के माध्यम से भेजी थीं। इन चालानों पर स्पष्ट रूप से “रिटर्नेबल” और “रिटर्नेबल बेसिस” अंकित किया गया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि मशीनों की वापसी संबंधी शर्तों की पुष्टि ई-मेल पत्राचार के जरिए भी की गई थी, जिससे यह स्पष्ट था कि मशीनों का स्वामित्व मूल कंपनी के पास ही रहेगा और उपयोग के बाद उन्हें लौटाना अनिवार्य होगा।
जानकारी के अनुसार, चारों मशीनें हरियाणा और महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों पर कृषि डेमो और प्रदर्शनियों में उपयोग के लिए भेजी गई थीं। प्रत्येक मशीन की कीमत लगभग ₹15.40 लाख बताई गई है। इस प्रकार चारों मशीनों का कुल मूल्य ₹61.60 लाख से अधिक बैठता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद कई बार मौखिक और लिखित अनुरोध किए गए, लेकिन मशीनें वापस नहीं की गईं।
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जगतसुख इंडस्ट्रीज का कहना है कि यदि मशीनों को स्थायी रूप से बेचना होता तो कंपनी पहले ही उनका पूरा भुगतान प्राप्त करती। मशीनें केवल इस भरोसे पर भेजी गई थीं कि उनका उपयोग अस्थायी रूप से किया जाएगा और बाद में उन्हें सुरक्षित रूप से लौटा दिया जाएगा। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने शुरू से ही मशीनें अपने कब्जे में रखने की मंशा से उन्हें प्राप्त किया और वापसी के वादे का इस्तेमाल केवल भरोसा जीतने के लिए किया।
मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब कथित तौर पर दो वर्षों तक मशीनों की वापसी नहीं हुई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया और मशीनों की बरामदगी के साथ-साथ आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। शिकायत में कहा गया है कि मशीनों को लौटाने के लिए कई बार संपर्क किया गया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पुलिस के अनुसार, कंपनी के प्रतिनिधियों को जांच में शामिल होने और अपना पक्ष रखने के लिए कई बार बुलाया गया था, लेकिन वे निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए। अब आरोपियों को औपचारिक रूप से जांच में शामिल होने के लिए समन जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
मामले की जांच कर रही थाना डेहलों की प्रभारी ने बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों, ई-मेल रिकॉर्ड, डिलीवरी चालानों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मशीनें वर्तमान में कहां हैं और क्या उन्हें जानबूझकर वापस नहीं किया गया। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब केवल कारोबारी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कथित आपराधिक विश्वासघात और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों के कारण कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण जांच का विषय बन गया है।
