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Home»Policy Watch»बीपीटीपी लिमिटेड पर फेमा उल्लंघन के मामले में ₹4.84 करोड़ का शमन शुल्क, निदेशकों पर भी कार्रवाई
Policy Watch

बीपीटीपी लिमिटेड पर फेमा उल्लंघन के मामले में ₹4.84 करोड़ का शमन शुल्क, निदेशकों पर भी कार्रवाई

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksOctober 2, 2026No Comments3 Mins Read
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विदेशी निवेशकों को वैकल्पिक खंड के साथ शेयर जारी करने में नियमों के उल्लंघन का मामला; ईडी की जांच के बाद आरबीआई ने कंपनी और दोनों निदेशकों के लिए अलग-अलग राशि तय की
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गुरुग्राम। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बीपीटीपी लिमिटेड और उसके दो निदेशकों पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े मामले में कुल ₹4.84 करोड़ का शमन शुल्क लगाया है। आरबीआई ने 17 सितंबर 2026 को शमन आदेश जारी किया। इसमें कंपनी को ₹4,03,62,500 और उसके निदेशकों सुधांशु त्रिपाठी तथा काबुल चावला को ₹40,36,250-₹40,36,250 का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
मामला कंपनी की ओर से विदेशी निवेशकों को शेयर जारी करने से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि शेयरों के आवंटन में ऐसे वैकल्पिक खंड (ऑप्शनैलिटी क्लॉज) का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें निवेशकों को सुनिश्चित प्रतिफल या निश्चित निकास मूल्य का आश्वासन दिया गया था। यह व्यवस्था फेमा के तहत लागू नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मिली जानकारी के आधार पर इस मामले में फेमा के प्रावधानों के तहत जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान विदेशी निवेश से संबंधित लेनदेन और शेयर आवंटन की प्रक्रिया की पड़ताल की गई। जांच पूरी होने के बाद ईडी ने न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में फेमा 20/2000-आरबी के विनियमन 5(1) के उल्लंघन का उल्लेख किया गया था।
शिकायत के मुताबिक, उल्लंघन से जुड़ी कुल राशि ₹537.50 करोड़ थी। आरोप का मुख्य आधार विदेशी निवेशकों को ऐसे शेयर जारी करना था, जिनसे जुड़े समझौते में वैकल्पिक खंड शामिल था। इस खंड के तहत निवेशकों को भविष्य में शेयरों से बाहर निकलने के लिए एक सुनिश्चित प्रतिफल या निकास मूल्य मिलने का आश्वासन दिया गया था।
मामले की जांच और नियामकीय प्रक्रिया के बाद बीपीटीपी लिमिटेड तथा उसके निदेशकों ने फेमा उल्लंघन के शमन के लिए आरबीआई के समक्ष आवेदन किया। शमन प्रक्रिया के तहत कंपनी और संबंधित व्यक्तियों ने मामले को निर्धारित नियामकीय प्रक्रिया के माध्यम से निपटाने का अनुरोध किया।
आरबीआई की ओर से इस मामले में ईडी से भी संदर्भ किया गया। इसके बाद ईडी ने शमन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किया। एनओसी मिलने के बाद आरबीआई ने 17 सितंबर को शमन आदेश पारित किया और कंपनी तथा दोनों निदेशकों के लिए अलग-अलग भुगतान राशि तय की।
आदेश के मुताबिक बीपीटीपी लिमिटेड को ₹4.03625 करोड़ का भुगतान करना होगा। वहीं निदेशक सुधांशु त्रिपाठी और काबुल चावला को ₹40.3625 लाख-₹40.3625 लाख का भुगतान करना होगा। तीनों भुगतानों को जोड़ने पर कुल राशि ₹4.8435 करोड़ बनती है।
फेमा के तहत शमन की व्यवस्था का उद्देश्य उल्लंघनों का नियामकीय तरीके से निपटारा करना है। फेमा को मुख्य रूप से नागरिक कानून माना जाता है और इसकी धारा 15 में उल्लंघनों के शमन का प्रावधान है। इस प्रक्रिया के जरिए संबंधित पक्ष निर्धारित शर्तों के तहत उल्लंघन को स्वीकार कर मामले का निपटारा करा सकते हैं।
शमन व्यवस्था का एक उद्देश्य स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना और ऐसे मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता को कम करना भी है। इसके जरिए विदेशी मुद्रा से जुड़े उल्लंघनों का अपेक्षाकृत तेज तरीके से निपटारा किया जा सकता है। वर्तमान शमन प्रक्रिया विदेशी मुद्रा (शमन कार्रवाई) नियम, 2024 के तहत संचालित होती है।
ईडी की ओर से भी शमन योग्य फेमा उल्लंघनों में नियामकीय प्रक्रिया के तहत एनओसी जारी की जाती है। बीपीटीपी लिमिटेड का मामला इसी प्रक्रिया के तहत आरबीआई के शमन आदेश के साथ आगे बढ़ा। इसके साथ संबंधित फेमा उल्लंघन पर कंपनी और उसके दोनों निदेशकों के खिलाफ शमन की प्रक्रिया पूरी हो गई है।
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