लखनऊ। आधार से जुड़ी सेवाओं और शिकायतों के लिए कार्यालयों में लगने वाली भीड़ को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से लखनऊ से शुरू की गई टोकन मैनेजमेंट प्रणाली अब देशभर में लागू की जाएगी। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने लखनऊ आधार कार्यालय की ओर से विकसित क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और डिजिटल टोकन व्यवस्था को सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में लागू करने का निर्णय लिया है। यह फैसला 17वें आधार दिवस के अवसर पर कोलकाता में आयोजित आधार संवाद कार्यक्रम में लिया गया।
कार्यक्रम के दौरान यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौरभ विजय, सदस्य प्रो. मौसम, मुख्यालय के उप महानिदेशक विवेक चंद्र वर्मा और लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के उप महानिदेशक प्रशांत कुमार सिंह ने इस व्यवस्था को राष्ट्रव्यापी स्तर पर अपनाए जाने की पहल की शुरुआत की। नई प्रणाली का उद्देश्य आधार से जुड़ी सेवाओं के लिए कार्यालय पहुंचने वाले नागरिकों को पहले से समय निर्धारित करने और डिजिटल टोकन प्राप्त करने की सुविधा देना है।
यूआईडीएआई के क्षेत्रीय और राज्य कार्यालयों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग आधार से जुड़ी शिकायतों, दस्तावेजों में सुधार, अपडेट और अन्य सेवाओं के लिए पहुंचते हैं। अधिक भीड़ वाले दिनों में कार्यालयों की क्षमता से ज्यादा लोगों के पहुंचने के कारण कुछ नागरिकों को बिना सेवा प्राप्त किए वापस लौटना पड़ता था। खासकर दूर-दराज के इलाकों से आने वाले लोगों के लिए यह समस्या अधिक कठिन होती थी। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए लखनऊ कार्यालय ने टोकन मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया था।
नई व्यवस्था में नागरिक अपने मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन करके ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा यूआईडीएआई की सेवा वेबसाइट के माध्यम से भी अपॉइंटमेंट लेने की सुविधा उपलब्ध है। अपॉइंटमेंट बुक करने के बाद नागरिक को डिजिटल टोकन मिलेगा, जिसके आधार पर वह निर्धारित समय के अनुसार संबंधित कार्यालय में पहुंच सकता है।
अग्रिम अपॉइंटमेंट की सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी। यूआईडीएआई के मुताबिक, इस सेवा के लिए नागरिकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्यालयों में अनावश्यक इंतजार और भीड़ को कम करने के साथ सेवा वितरण को अधिक व्यवस्थित बनाना है। डिजिटल टोकन व्यवस्था से नागरिकों को यह जानकारी पहले से मिल सकेगी कि उन्हें आधार संबंधी काम के लिए कब कार्यालय पहुंचना है।
यह सुविधा विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जा रही है जो आधार संबंधी काम के लिए दूर-दराज के जिलों से क्षेत्रीय या राज्य कार्यालयों तक आते हैं। इसके अलावा बिना पूर्व योजना के कार्यालय पहुंचने वाले वॉक-इन नागरिकों और निश्चित समय में सेवा लेने की जरूरत वाले लोगों को भी इससे सुविधा मिलने की उम्मीद है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की व्यवस्था से नागरिकों के समय और यात्रा से जुड़े खर्च को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
टोकन व्यवस्था को देशभर में लागू करने का निर्णय ऐसे समय में हुआ है जब आधार से संबंधित सेवाओं की मांग लगातार बनी हुई है। नाम, पता, जन्मतिथि और अन्य विवरणों में सुधार के अलावा मोबाइल नंबर या अन्य जानकारी अपडेट कराने तथा बायोमीट्रिक अपडेट जैसी सेवाओं के लिए भी बड़ी संख्या में लोग आधार केंद्रों और कार्यालयों का रुख करते हैं। डिजिटल व्यवस्था के जरिए इन सेवाओं के लिए आने वाले लोगों के प्रवाह को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने की कोशिश की जा रही है।
आधार संवाद कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश को बच्चों के आधार में सबसे अधिक अनिवार्य बायोमीट्रिक अपडेट करने वाले राज्य के रूप में पुरस्कृत किए जाने की जानकारी भी सामने आई। दावे के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में उत्तर प्रदेश में 71 लाख बच्चों के आधार में अनिवार्य बायोमीट्रिक अपडेट किया गया है।
बच्चों के आधार में निर्धारित उम्र पर बायोमीट्रिक जानकारी अपडेट करना जरूरी होता है, ताकि आधार रिकॉर्ड में बच्चे की बदलती शारीरिक पहचान से जुड़ी जानकारी समय पर दर्ज हो सके। उत्तर प्रदेश में इतने बड़े स्तर पर बायोमीट्रिक अपडेट को आधार सेवाओं के विस्तार और बच्चों के रिकॉर्ड को अद्यतन रखने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया है।
लखनऊ से शुरू हुई डिजिटल टोकन व्यवस्था को अब देशभर में लागू किए जाने से आधार कार्यालयों में सेवा लेने की प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, टोकन और कार्यालय स्तर पर सेवा वितरण के बीच समन्वय कितना प्रभावी रहता है।
