नई दिल्ली। भारत में यूट्यूब की क्रिएटर इकोनॉमी अब डिजिटल कंटेंट से आगे बढ़कर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा बनती जा रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में देश में यूट्यूब से जुड़े क्रिएटर इकोसिस्टम ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब ₹18,000 करोड़ का योगदान दिया। इसी दौरान इस इकोसिस्टम ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 9.6 लाख नौकरियों को समर्थन दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में यूट्यूब चैनलों की संख्या और उनसे होने वाली कमाई लगातार बढ़ रही है। जून 2026 तक देश में 20,000 से अधिक यूट्यूब चैनलों के पास एक मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर थे। यह आंकड़ा दिखाता है कि भारत में वीडियो क्रिएशन अब केवल मनोरंजन या व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों के लिए नियमित आय और व्यवसाय का जरिया बन रहा है।
क्रिएटर इकोनॉमी के विस्तार का एक महत्वपूर्ण संकेत उन चैनलों की बढ़ती संख्या है, जो प्लेटफॉर्म से पर्याप्त राजस्व हासिल कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में ₹10 लाख या उससे अधिक कमाई करने वाले यूट्यूब चैनलों की संख्या में 20 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई। इससे पता चलता है कि कंटेंट निर्माण के साथ विज्ञापन, ब्रांड साझेदारी और अन्य डिजिटल कमाई के अवसरों का दायरा भी बढ़ रहा है।
भारत में इंटरनेट और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच ने इस बदलाव को गति दी है। छोटे शहरों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में क्रिएटर अलग-अलग भाषाओं में वीडियो बना रहे हैं। शिक्षा, तकनीक, गेमिंग, मनोरंजन, खाना, यात्रा, फिटनेस, समाचार और स्थानीय संस्कृति जैसे क्षेत्रों में चैनलों की संख्या बढ़ी है। क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार कंटेंट ने भी दर्शकों का आधार व्यापक किया है।
यूट्यूब की क्रिएटर इकोनॉमी का असर केवल वीडियो बनाने वाले लोगों तक सीमित नहीं है। इसके आसपास कैमरा और ऑडियो उपकरण, वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक्स, डिजिटल मार्केटिंग, प्रबंधन, विज्ञापन, ब्रांड सहयोग और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए भी काम के अवसर पैदा होते हैं। इसी व्यापक गतिविधि को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट ने 9.6 लाख नौकरियों को क्रिएटर इकोसिस्टम से जुड़े होने का अनुमान दिया है।
क्रिएटर के लिए आय के पारंपरिक स्रोतों में प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले विज्ञापन शामिल हैं, लेकिन समय के साथ कमाई के दूसरे रास्ते भी बढ़े हैं। ब्रांड के साथ साझेदारी, प्रायोजित सामग्री और दर्शकों से जुड़ी अन्य डिजिटल सेवाओं ने सफल चैनलों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर बनाए हैं। इससे कंटेंट निर्माण कई मामलों में एक छोटे डिजिटल व्यवसाय के रूप में विकसित हुआ है।
एक मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर वाले 20,000 से ज्यादा चैनलों का आंकड़ा भी भारत के डिजिटल दर्शक बाजार के आकार को दर्शाता है। बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच बनाने वाले चैनलों के लिए ब्रांड और विज्ञापनदाताओं की दिलचस्पी बढ़ सकती है, जबकि क्रिएटर के लिए लगातार गुणवत्तापूर्ण सामग्री तैयार करने और दर्शकों को बनाए रखने की चुनौती भी बनी रहती है।
रिपोर्ट में ₹10 लाख या उससे अधिक वार्षिक राजस्व वाले चैनलों की संख्या में 20 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना गया है। इसका अर्थ यह है कि क्रिएटर इकोनॉमी में केवल बड़े और पहले से स्थापित चैनल ही नहीं, बल्कि नए और मध्यम स्तर के चैनल भी कमाई के दायरे में प्रवेश कर रहे हैं।
भारत में डिजिटल कंटेंट की खपत बढ़ने के साथ आने वाले वर्षों में क्रिएटर आधारित कारोबार का स्वरूप और व्यापक होने की संभावना है। हालांकि, इस क्षेत्र में आय सभी क्रिएटर के लिए समान नहीं होती और सफलता दर्शकों की संख्या, कंटेंट की गुणवत्ता, विषय, विज्ञापन बाजार तथा कमाई के अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर करती है। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े यह संकेत देते हैं कि यूट्यूब का क्रिएटर इकोसिस्टम भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार और आर्थिक योगदान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
