अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे और दान राशि को लेकर उठे विवाद ने अब औपचारिक जांच का रूप ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित इस तीन सदस्यीय टीम को दानपत्रों में कथित हेरफेर, नकदी की गणना में अनियमितताओं और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकारी आदेश के अनुसार, यह SIT पूरे प्रकरण की गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। प्रशासन का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तीर्थ क्षेत्र की पारदर्शिता और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर किसी प्रकार का सवाल न उठे।
तीन सदस्यीय SIT का गठन
इस जांच टीम में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। टीम का नेतृत्व विजय विश्वास पंत (मंडलायुक्त, लखनऊ) करेंगे। इसके अलावा किरण एस. (आईजी, लखनऊ रेंज) और नील रतन (विशेष सचिव, वित्त) को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
टीम को निर्देश दिया गया है कि वह दान काउंटरों, नकदी प्रबंधन, रिकॉर्डिंग प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करे।
ट्रस्ट की पहल और केंद्र सरकार की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया था, लेकिन बाद में स्थिति को देखते हुए मामले की आंतरिक समीक्षा शुरू की गई। रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने स्थिति का जायजा लिया और केंद्रीय स्तर पर भी रिपोर्ट भेजी गई।
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़े संकेतों के बाद ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी या अफवाहों पर विराम लगाया जा सके। इसके बाद राज्य सरकार ने तत्काल SIT गठन का निर्णय लिया।
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घटनाक्रम की टाइमलाइन में बढ़ा विवाद
मामले से जुड़े घटनाक्रम जून महीने की शुरुआत से तेजी से सामने आए, जिससे विवाद गहराता चला गया।
05 जून: सुरक्षा कर्मियों द्वारा एक संदिग्ध व्यक्ति को रोका गया, जिसके पास से नकदी बरामद होने की बात सामने आई।
06 जून: चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों से पूछताछ की गई।
07 जून: राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए, जिसमें दान राशि में गड़बड़ी के दावे किए गए।
08 जून: आंतरिक जांच के दौरान नकदी बरामदगी की खबरें सामने आईं।
09 जून: पूर्व लेखाकार से जुड़े आरोप सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
10 जून: नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया।
11 जून: उन्होंने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी।
12 जून: विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों के साथ बैठकों की खबरें सामने आईं।
13 जून: पूरे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT गठन की आधिकारिक घोषणा की।
जांच के दायरे में क्या-क्या होगा
SIT अब यह जांच करेगी कि दान की राशि का संग्रह, रिकॉर्डिंग और बैंकिंग प्रक्रिया किस तरह से संचालित की जा रही थी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि सोशल मीडिया पर फैल रही सूचनाओं का स्रोत क्या था और क्या इन दावों के पीछे किसी प्रकार की संगठित साजिश या गलतफहमी शामिल है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह भी देखा जाएगा कि नकदी प्रबंधन के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं और क्या किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है।
प्रशासन का रुख
सरकारी स्तर पर स्पष्ट किया गया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। प्रशासन का मानना है कि यह मामला संवेदनशील है और इससे धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं, इसलिए हर पहलू की बारीकी से जांच जरूरी है।
फिलहाल SIT ने अपनी कार्यवाही शुरू कर दी है और जल्द ही प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने की संभावना है।
