केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने देश में 100 प्रतिशत एथेनॉल फ्यूल के उपयोग को कानूनी मान्यता देने वाले नियमों को मंजूरी दे दी है, जिसे भारत की ऊर्जा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता घटाकर घरेलू वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना है।
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि हाल ही में रात आठ बजे उन्होंने संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर कर इस नियम को अंतिम रूप दिया। उन्होंने कहा कि देश का लगभग ₹22 लाख करोड़ का ईंधन आयात बिल लगातार अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रहा है और एथेनॉल इसका व्यवहारिक विकल्प बन सकता है।
सरकार का मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है बल्कि यह किसानों के लिए भी अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है, क्योंकि इसका उत्पादन कृषि अवशेषों और गन्ने जैसी फसलों से संभव है।
इस अवसर पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri भी मौजूद रहे, जिन्होंने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि वाहन उद्योग वैकल्पिक ऊर्जा की ओर शिफ्ट कर सके।
हाल ही में Maruti Suzuki ने अपनी वैगनआर का एथेनॉल-संगत संस्करण लॉन्च किया है, जो E20 से लेकर E100 तक के मिश्रण पर चल सकता है। इसी तरह Hero MotoCorp ने भी स्प्लेंडर प्लस और HF डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किए हैं।
मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि Toyota, सुजुकी, एमजी और हुंडई जैसी कंपनियां आने वाले समय में 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलने वाले वाहन बाजार में उतार सकती हैं। इससे ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा तकनीकी बदलाव देखने को मिलेगा।
इसके साथ ही सरकार ने E20 और उससे अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को टैक्स छूट देने का निर्णय लिया है, जिससे इसकी लागत कम हो सके और उपभोक्ताओं के लिए यह अधिक आकर्षक विकल्प बने।
नीति में बदलाव के तहत केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि E85 और 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन को औपचारिक रूप से मान्यता दी जा सके और पेट्रोल पंपों पर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित हो।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत के ऊर्जा सुरक्षा ढांचे में सुधार होगा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होगी। साथ ही यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई है, जिसके तहत नागपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, जिसमें हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन और बसों का संचालन शामिल होगा।
इस परियोजना को भविष्य की ऊर्जा तकनीक के रूप में देखा जा रहा है, जो शून्य उत्सर्जन परिवहन प्रणाली की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
देश में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के इस निर्णय से ऊर्जा बाजार में दीर्घकालिक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तेल आयात बिल में स्थिर कमी आएगी और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा। साथ ही घरेलू उत्पादन श्रृंखला को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार का फोकस अब एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने और किसानों को सप्लाई चेन में अधिक लाभ दिलाने पर केंद्रित है। गन्ना आधारित उद्योगों को इससे नई ऊर्जा मिलने की संभावना है, जिससे ग्रामीण रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
वाहन उद्योग में आने वाले समय में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है, जहां पारंपरिक पेट्रोल इंजन की जगह फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और इलेक्ट्रिफिकेशन का मिश्रित मॉडल देखने को मिलेगा। इससे पर्यावरणीय प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है।
सरकार का यह कदम दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीति सुधार माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है और सतत विकास को गति दे सकता है।
यह नीति ऊर्जा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा दिशा को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है।
