जयपुर, राजस्थान। राजस्थान में पिछले वर्ष झालावाड़ के एक सरकारी स्कूल की छत गिरने की घटना के बाद राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए ₹503 करोड़ के स्कूल भवन मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर एक जमीनी जांच ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच में आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर व्यापक संरचनात्मक मरम्मत करने के बजाय केवल सतही कार्य कर पूरा भुगतान प्राप्त कर लिया गया।
यह राशि राज्य के 20,000 से अधिक सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों की मरम्मत, छतों को मजबूत बनाने तथा विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वीकृत की गई थी। हालांकि जांच में आरोप लगाया गया है कि कई स्कूलों में ठेकेदारों ने केवल दिखाई देने वाली दरारों को भरने, वॉटरप्रूफ कोटिंग, पेंट और सफेदी जैसे सीमित कार्य किए, जबकि निविदा में निर्धारित कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक कार्य या तो अधूरे रहे या किए ही नहीं गए।
यह जमीनी जांच जयपुर, अजमेर, दौसा, नागौर और डीडवाना-कुचामन जिलों के लगभग 20 सरकारी स्कूलों में की गई। निरीक्षण के दौरान प्रमाणित सिविल इंजीनियरों और शहरी नियोजन विशेषज्ञों की सहायता से यह आकलन किया गया कि मौके पर किया गया कार्य निविदा की निर्धारित शर्तों के अनुरूप था या नहीं।
जयपुर जिले में, जहां 1,691 स्कूलों के लिए लगभग ₹33.77 करोड़ स्वीकृत किए गए थे, जांच में आरोप लगाया गया कि कई स्कूलों में वॉटरप्रूफिंग का कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार जहां बहु-स्तरीय वॉटरप्रूफिंग की जानी थी, वहां केवल कुछ परतें ही लगाई गईं और कई स्थानों पर छतों पर पानी जमा होने तथा दरारें दिखाई देने की स्थिति बनी रही।
दौसा जिले में भी इसी प्रकार की अनियमितताओं के आरोप सामने आए। ड्रोन सर्वेक्षण के दौरान कथित रूप से पाया गया कि कुछ स्कूलों में केवल सीमित हिस्सों पर ही वॉटरप्रूफिंग की गई, जबकि छतों को मजबूत करने, आरसीसी मरम्मत, प्लास्टर, जल निकासी व्यवस्था तथा क्षतिग्रस्त हिस्सों के प्रतिस्थापन जैसे कई कार्य नहीं किए गए। कुछ स्कूल अधिकारियों ने भी बताया कि केवल मामूली वॉटरप्रूफ कोटिंग करने के बाद ठेकेदार कार्य पूरा बताकर चले गए।
नागौर जिले में निरीक्षण के दौरान कई स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में वॉटरप्रूफिंग की परतें उखड़ती हुई दिखाई देने का दावा किया गया। जांच के अनुसार कई स्थानों पर व्यापक छत मरम्मत या जल निकासी सुधार के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले, जबकि इन कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत की गई थी।
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अजमेर जिले में भी आरोप लगाया गया कि कुछ स्कूलों में छत मरम्मत, वॉटरप्रूफिंग और अन्य सिविल कार्य पूर्ण नहीं किए गए, जबकि भुगतान जारी होने की बात सामने आई। एक स्कूल की प्रधानाचार्य ने कथित रूप से कहा कि ठेकेदार ने बिना विद्यालय प्रशासन से परामर्श किए कम समय में कार्य पूरा कर दिया और वह कार्य की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं।
जिला प्रशासनों ने स्वीकार किया कि कार्यों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। अधिकारियों ने बताया कि जिन जिलों में शिकायतें सामने आई हैं, वहां जांच शुरू कर दी गई है या जांच की प्रक्रिया चल रही है। डीडवाना-कुचामन में अधिकारियों ने बताया कि मामले की तकनीकी जांच लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंपी गई है और उसकी रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है।
आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए योजना के क्रियान्वयन से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि भुगतान जारी करने से पहले कार्यों का विभिन्न स्तरों पर सत्यापन किया गया था, जिसमें इंजीनियरिंग अधिकारियों, विद्यालय प्रबंधन, स्थानीय समितियों तथा जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों द्वारा निरीक्षण शामिल था। उनका कहना है कि यदि किसी विशेष मामले में निम्न गुणवत्ता के कार्य या अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
मामले में लगाए गए आरोपों की अभी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। कथित वित्तीय या संविदात्मक अनियमितताओं का अंतिम निर्धारण संबंधित सरकारी जांच, उपलब्ध साक्ष्यों तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
