अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में कथित अंतरराज्यीय ‘प्लाज्मा स्वैप’ मेडिकल धोखाधड़ी मामले में अहमदाबाद ग्रामीण स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए 33 वर्षीय अजीतभाई मिथाभाई सोलंकी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह कथित रूप से जीवनरक्षक रक्त प्लाज्मा की खेप को परिवहन के दौरान बदलकर उसकी जगह निम्न गुणवत्ता अथवा संदिग्ध प्लाज्मा की आपूर्ति करता था। मामले में 1,140 संदिग्ध प्लाज्मा यूनिट जब्त कर वैज्ञानिक परीक्षण के बाद नष्ट कर दी गई हैं, जबकि पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच जारी है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी अहमदाबाद जिले के बावला क्षेत्र का निवासी है। पुलिस ने उसके कब्जे से कथित रूप से इस्तेमाल किया गया एक बोलेरो पिकअप वाहन भी जब्त किया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹2.5 लाख बताई गई है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे रैकेट का संचालन मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी द्वारा किया जा रहा था, जिसने दवा आपूर्ति श्रृंखला और परिवहन व्यवस्था का कथित दुरुपयोग कर प्लाज्मा की अदला-बदली की साजिश रची।
जांच में सामने आया है कि कैंसर, हीमोफीलिया और अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोग होने वाले उच्च गुणवत्ता वाले रक्त प्लाज्मा को परिवहन के दौरान कथित रूप से रोक लिया जाता था। इसके बाद उसकी जगह विभिन्न ब्लड बैंकों से प्राप्त निम्न गुणवत्ता या संदिग्ध प्लाज्मा रखकर खेप को दवा कंपनियों तक पहुंचाया जाता था। जांच में महाराष्ट्र के एक ब्लड बैंक से संभावित आपूर्ति संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
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अहमदाबाद के बी.जे. मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग द्वारा किए गए परीक्षण में मुख्य आरोपी के ठिकाने से बरामद 1,140 प्लाज्मा यूनिट चिकित्सा उपयोग के लिए अनुपयुक्त और संभावित रूप से जोखिमपूर्ण पाई गईं। इसके बाद न्यायालय की निगरानी में गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) से अधिकृत बायोमेडिकल वेस्ट सुविधा केंद्र पर इन यूनिटों का सुरक्षित निस्तारण कराया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क मार्च और अप्रैल के दौरान गुजरात से राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक प्लाज्मा की खेप भेजने में सक्रिय था। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित रूप से बदला गया कोई प्लाज्मा अंतिम दवा निर्माण प्रक्रिया तक पहुंचा था या नहीं तथा इससे कितने मरीज प्रभावित हो सकते थे।
जांच अब वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज, लॉजिस्टिक चैन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर केंद्रित है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क के लाभार्थियों, आपूर्ति श्रृंखला में शामिल अन्य आरोपियों तथा संभावित सहयोगियों की पहचान की जा रही है और आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेजों और वित्तीय ट्रेल का विश्लेषण कर पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी हैं। मामले में लगाए गए सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं तथा अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों, दस्तावेजी प्रमाणों और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएंगे।
