मुंबई: पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के ₹13,850 करोड़ के चर्चित बैंक घोटाला मामले में विशेष केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के बहनोई और मामले में आरोपी से सरकारी गवाह (एप्रूवर) बने मयंक मेहता के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह प्रतीत हो कि मयंक मेहता न्यायिक प्रक्रिया से बचने, मुकदमे में देरी करने या फरार होने का प्रयास कर रहे हैं।
2 जुलाई को पारित अपने आदेश में विशेष सीबीआई अदालत ने कहा कि मयंक मेहता ने जांच और न्यायिक कार्यवाही के दौरान लगातार सहयोग किया है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने मामले से संबंधित सभी तथ्यों और कथित साजिश में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका का पूर्ण एवं सत्य खुलासा करने पर सहमति जताई थी, जिसके आधार पर उन्हें अदालत से क्षमादान (पार्डन) प्रदान किया गया। अदालत के अनुसार, ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह निष्कर्ष निकले कि वह भविष्य में न्यायिक प्रक्रिया से बचने का प्रयास करेंगे।
ब्रिटिश नागरिक और भारतीय मूल के मयंक मेहता पिछले लगभग 35 वर्षों से हांगकांग में रह रहे हैं तथा हांगकांग और चीन में विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े हैं। उन्होंने अदालत से एलओसी रद्द करने का अनुरोध करते हुए कहा कि उन्हें व्यापारिक बैठकों और व्यावसायिक कारणों से थाईलैंड, वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित कई देशों की नियमित यात्रा करनी पड़ती है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि जनवरी 2021 में विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज दो मामलों में मयंक मेहता को क्षमादान प्रदान किया था। इसके बाद सितंबर 2021 में ईडी मामलों में उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट भी रद्द कर दिए गए थे। बाद में सितंबर 2025 में विशेष सीबीआई अदालत ने पूरक आरोपपत्र से संबंधित मामले में भी उन्हें क्षमादान प्रदान किया।
सीबीआई ने मयंक मेहता के खिलाफ जुलाई 2021 में लुक आउट सर्कुलर जारी किया था। एलओसी निरस्त करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि मयंक मेहता लगातार अदालत के समक्ष उपस्थित होते रहे हैं और जांच एजेंसियों के निर्देशों का पालन करते रहे हैं। अदालत ने यह भी माना कि चूंकि वह सरकारी गवाह बन चुके हैं और दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत उनका बयान पहले ही दर्ज किया जा चुका है, इसलिए एलओसी रद्द किए जाने से सीबीआई की जांच या अभियोजन को कोई नुकसान नहीं होगा।
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हालांकि, विशेष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके इस आदेश से वर्ष 2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा विदेश यात्रा की अनुमति देते समय लगाई गई शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा। उन शर्तों के तहत मयंक मेहता को विदेश यात्रा के दौरान सीबीआई द्वारा मांगी गई सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी होगी तथा जांच एजेंसी के समक्ष आवश्यकतानुसार उपस्थित होना होगा।
पंजाब नेशनल बैंक घोटाला मामला जनवरी 2018 में सामने आया था, जब सीबीआई ने नीरव मोदी, पीएनबी के कुछ अधिकारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, नीरव मोदी और उनकी कंपनियों ने फरवरी से मई 2017 के बीच पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा से कथित रूप से लगभग 150 लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) धोखाधड़ी से प्राप्त किए, जिनके आधार पर विदेशी शाखाओं से बड़े पैमाने पर ऋण हासिल किया गया।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन फर्जी एलओयू के माध्यम से भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से भारी वित्तीय सुविधाएं प्राप्त की गईं, जिससे पंजाब नेशनल बैंक को लगभग ₹13,850 करोड़ का नुकसान हुआ। इस बहुचर्चित बैंक घोटाले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अब भी विभिन्न आरोपियों के खिलाफ जारी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि लुक आउट सर्कुलर रद्द करने का आदेश केवल मयंक मेहता के संबंध में है, क्योंकि उन्होंने जांच में सहयोग किया है और सरकारी गवाह का दर्जा प्राप्त कर लिया है। वहीं, पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ न्यायिक और जांच संबंधी कार्यवाही पूर्ववत जारी रहेगी।
