नई दिल्ली। ब्रिटेन के संचार नियामक ऑफकॉम (Ofcom) ने ऑनलाइन फर्जी विज्ञापनों पर लगाम कसने के लिए बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ सख्त नियामकीय प्रस्ताव जारी किए हैं। प्रस्तावित नियमों के तहत यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स, स्नैपचैट, रेडिट, पिनटेरेस्ट, रोब्लॉक्स और क्वोरा जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स को अपने मंच पर चलने वाले धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों की पहचान, रोकथाम और त्वरित हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करनी होगी। यदि प्रस्ताव कानून का रूप ले लेते हैं, तो नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 1.8 करोड़ पाउंड या उनके वैश्विक वार्षिक कारोबार के 10 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
ऑफकॉम के अनुसार, उसके सर्वेक्षण में पाया गया कि ब्रिटेन के आधे से अधिक वयस्क ऑनलाइन संभावित फर्जी विज्ञापनों का सामना कर चुके हैं, जबकि एक-तिहाई से अधिक लोगों ने बताया कि उन्हें ऐसे विज्ञापन नियमित रूप से दिखाई देते हैं। नियामक का कहना है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना आवश्यक हो गया है।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स को ऐसे खातों पर प्रतिबंध लगाना होगा जो फर्जी विज्ञापन प्रकाशित करते हैं या प्रतिष्ठित कंपनियों की पहचान का दुरुपयोग कर लोगों को ठगने का प्रयास करते हैं। इसके साथ ही प्रतिबंधित किए गए उपयोगकर्ताओं को नए खाते बनाकर दोबारा मंच का दुरुपयोग करने से रोकने के लिए भी प्रभावी तकनीकी उपाय लागू करने होंगे।
ऑफकॉम के ऑनलाइन सुरक्षा निदेशक ओलिवर ग्रिफिथ्स ने कहा कि लंबे समय से तकनीकी कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर सक्रिय धोखेबाजों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही थीं, जिससे बड़ी संख्या में लोग फर्जी विज्ञापनों का शिकार बने। उन्होंने कहा कि कंपनियों को तुरंत मजबूत कदम उठाकर ऐसे विज्ञापनों और उन्हें प्रकाशित करने वाले तत्वों को हटाना चाहिए, ताकि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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ये प्रस्ताव ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट (Online Safety Act) के तहत तैयार किए गए हैं। इस कानून के अंतर्गत कैटेगरी-1, 2A और 2B में आने वाले प्लेटफॉर्म्स पर अतिरिक्त पारदर्शिता और जवाबदेही संबंधी दायित्व लागू होंगे। इन सेवाओं को ऐसी प्रणालियां विकसित करनी होंगी, जो उपयोगकर्ताओं को फर्जी विज्ञापनों से बचाएं, शिकायत मिलने पर सामग्री को शीघ्र हटाएं तथा धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों की उपलब्धता की अवधि को न्यूनतम रखें।
ऑफकॉम ने अपनी प्रारंभिक सूची में फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, टिकटॉक, एक्स, स्नैपचैट, रेडिट, पिनटेरेस्ट, क्वोरा और रोब्लॉक्स को उन प्रमुख सेवाओं में शामिल किया है, जिन पर सबसे कड़े दायित्व लागू किए जाने का प्रस्ताव है। वहीं एप्पल iMessage, मेटा मैसेंजर, थ्रेड्स और विकिपीडिया को संभावित उभरती हुई कैटेगरी-1 सेवाओं के रूप में निगरानी में रखा गया है।
इस बीच उपभोक्ता संगठन Which? ने ऑफकॉम के प्रस्तावों का स्वागत करते हुए कहा कि यह ऑनलाइन धोखाधड़ी से लाभ कमाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि संगठन ने यह भी कहा कि प्रस्तावित समय-सीमा के कारण उपभोक्ताओं को प्रभावी सुरक्षा मिलने में अभी समय लग सकता है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कारण ऑनलाइन ठगी लगातार अधिक परिष्कृत और खतरनाक होती जा रही है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि फर्जी विज्ञापन आज साइबर अपराधियों के सबसे प्रभावी हथियारों में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि एआई आधारित नकली वीडियो, डीपफेक, ब्रांड इम्पर्सनेशन और सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों के जरिए अपराधी निवेश, नौकरी, ई-कॉमर्स और वित्तीय सेवाओं के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे खतरों से निपटने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को विज्ञापन सत्यापन प्रणाली, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, त्वरित शिकायत निवारण और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ प्रभावी समन्वय को अनिवार्य रूप से मजबूत करना होगा, ताकि उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बेहतर सुरक्षा मिल सके।
