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Home»Policy Watch»फर्जी सोने के आभूषण गिरवी रख ₹50 लाख तक की बैंक धोखाधड़ी का खुलासा; शिवमोगा में सरगना राहुल गिरफ्तार
Policy Watch

फर्जी सोने के आभूषण गिरवी रख ₹50 लाख तक की बैंक धोखाधड़ी का खुलासा; शिवमोगा में सरगना राहुल गिरफ्तार

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 13, 2026No Comments4 Mins Read
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राष्ट्रीयकृत बैंकों और सहकारी संस्थाओं से नकली सोने पर ऋण लेने का आरोप; फर्जी BIS हॉलमार्क, कई बैंक खातों और अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच तेज, मुख्य सप्लायर समेत अन्य आरोपी फरार।
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बेंगलुरु: कर्नाटक के शिवमोगा में पुलिस ने फर्जी सोने के आभूषण गिरवी रखकर राष्ट्रीयकृत बैंकों और सहकारी वित्तीय संस्थानों से लाखों रुपये का ऋण हासिल करने वाले एक कथित संगठित बैंक धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके सरगना राहुल को गिरफ्तार किया है। इससे पहले पुलिस उसके भाई और सह-आरोपी लोकेश को भी गिरफ्तार कर चुकी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने लगभग 700 ग्राम नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर विभिन्न संस्थानों से ₹40 लाख से ₹50 लाख के बीच ऋण प्राप्त किया। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर संचालित हो रहा था और इसके अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार, राहुल और उसका भाई लोकेश, जो तीर्थहल्ली तालुक के बग्गोडी गांव के निवासी हैं, नकली सोने के आभूषण तैयार कर उन्हें असली के रूप में गिरवी रखकर बैंक ऋण प्राप्त करते थे। जांच में पता चला कि इन आभूषणों में केवल 10 से 30 प्रतिशत तक वास्तविक सोने की परत चढ़ाई जाती थी, जिससे प्रारंभिक जांच के दौरान वे असली प्रतीत होते थे। आरोप है कि गिरोह ने आभूषणों पर फर्जी BIS हॉलमार्क भी अंकित किए, ताकि बैंक अधिकारियों और मूल्यांकनकर्ताओं को धोखा दिया जा सके।

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने राहुल, लोकेश, सुधा और राजेश सहित विभिन्न नामों से बैंक खाते खुलवाए और उन्हीं के माध्यम से कई वित्तीय संस्थानों में नकली आभूषण गिरवी रखकर ऋण प्राप्त किया। पुलिस के अनुसार, जिन संस्थानों को कथित रूप से निशाना बनाया गया उनमें पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, डीसीसी बैंक की गोपाल और विद्यानगर शाखाएं, सिरी सौहार्द सोसाइटी, सरस्वती कोऑपरेटिव सोसायटी तथा अन्नपूर्णेश्वरी ज्वेलरी शामिल हैं।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के पीछे एक बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि शरथ नामक व्यक्ति, जो तीर्थहल्ली क्षेत्र का निवासी है, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक था। वह कथित रूप से पंजाब के अमृतसर से नकली सोने के आभूषण मंगवाकर हवाई मार्ग से कर्नाटक पहुंचाता था। पुलिस का कहना है कि शरथ स्वयं बैंकों में नहीं जाता था, बल्कि राहुल और लोकेश के माध्यम से पूरी धोखाधड़ी को अंजाम दिलाता था।

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मामले का खुलासा तब हुआ जब पंजाब नेशनल बैंक की एक शाखा में गिरवी रखे गए आभूषणों की जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद शाखा प्रबंधक की शिकायत पर डोड्डापेट पुलिस ने जांच शुरू की। विस्तृत जांच के दौरान कई अन्य बैंकों और सहकारी संस्थाओं में भी इसी तरह के संदिग्ध लेनदेन का पता चला, जिससे बड़े बैंक धोखाधड़ी नेटवर्क की आशंका मजबूत हुई।

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान यह पुष्टि हुई है कि राहुल ने अकेले सरस्वती सौहार्द सोसाइटी में 165 ग्राम नकली सोना गिरवी रखकर लगभग ₹10.68 लाख का ऋण प्राप्त किया था। इसके अलावा उसने अन्नपूर्णेश्वरी ज्वेलरी में भी नकली आभूषण गिरवी रखकर ₹50,000 का अतिरिक्त ऋण लिया। जांच एजेंसियां अब अन्य बैंक खातों, गिरवी रखे गए आभूषणों और वित्तीय लेनदेन का फोरेंसिक विश्लेषण कर रही हैं, ताकि धोखाधड़ी की वास्तविक राशि और नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाया जा सके।

Algoritha Security के एक शोधकर्ता ने कहा कि वित्तीय संस्थानों को केवल प्रारंभिक दृश्य निरीक्षण या हॉलमार्क पर निर्भर रहने के बजाय उन्नत धातु परीक्षण, जोखिम आधारित सत्यापन और मजबूत केवाईसी प्रक्रियाओं को अपनाना चाहिए। उनके अनुसार संगठित धोखाधड़ी गिरोह फर्जी पहचान, नकली हॉलमार्क और कई बैंक खातों का उपयोग कर वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ऑडिट, तकनीकी सत्यापन और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी ऐसे मामलों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

पुलिस ने बताया कि फरार आरोपी शरथ और अन्य संदिग्धों की तलाश के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या इसी नेटवर्क ने कर्नाटक के अन्य जिलों या दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की बैंक धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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