आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में कोरियर फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर ₹1.50 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि एक निजी कंपनी ने पांच वर्ष के लिए कोरियर फ्रेंचाइजी देने के नाम पर सुरक्षा राशि जमा कराई, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी न तो कारोबार शुरू कराया गया और न ही जमा की गई राशि वापस की गई। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि इसी तरह देशभर के करीब एक हजार लोगों से लगभग ₹3,000 करोड़ की रकम जुटाकर कंपनी ने धोखाधड़ी की है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, ताजगंज क्षेत्र के रजरई निवासी नवीन शर्मा ने साइबर क्राइम थाने में दर्ज शिकायत में बताया कि 5 अक्टूबर 2025 को उन्होंने नई दिल्ली स्थित Dallas E Com Infotech Private Limited के कॉरपोरेट कार्यालय में कंपनी के साथ एक अनुबंध किया था। शिकायत के मुताबिक, कंपनी के कर्मचारी हर्षित सिंह ने उनकी मुलाकात श्यामसुंदर और रिशाली राज से कराई, जिन्होंने उन्हें आगरा के पिन कोड 282006 और 282009 क्षेत्र के लिए पांच वर्ष की अवधि का कोरियर पार्टनर बनाने का प्रस्ताव दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कंपनी ने फ्रेंचाइजी आवंटित करने के लिए ₹1.50 लाख सुरक्षा राशि जमा कराने को कहा। कंपनी की ओर से भरोसा दिलाया गया कि प्रशिक्षण, कार्यालय की स्थापना और परिचालन व्यवस्था पूरी करने में लगभग 45 दिन का समय लगेगा, जिसके बाद नियमित रूप से कोरियर सेवा शुरू कर दी जाएगी। इस आश्वासन पर भरोसा करते हुए उन्होंने निर्धारित राशि कंपनी को जमा करा दी।
आरोप है कि निर्धारित 45 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद भी कंपनी ने कोई परिचालन शुरू नहीं कराया। जब शिकायतकर्ता ने कंपनी के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया तो उनके फोन बंद मिले। बाद में जानकारी मिली कि कंपनी की विभिन्न शहरों में संचालित शाखाएं भी बंद हो चुकी हैं। इसके बाद उन्हें अपने साथ धोखाधड़ी होने का संदेह हुआ।
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शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने इसी प्रकार देशभर के लगभग एक हजार लोगों को कोरियर फ्रेंचाइजी देने का झांसा देकर उनसे बड़ी मात्रा में सुरक्षा राशि एकत्र की। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस कथित फ्रेंचाइजी मॉडल के माध्यम से करीब ₹3,000 करोड़ की राशि जुटाई गई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच एजेंसियों द्वारा नहीं की गई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच एजेंसियां कंपनी के पंजीकरण संबंधी दस्तावेज, बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड, अनुबंध, डिजिटल संचार और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कंपनी के निदेशक, कर्मचारी और अन्य संबंधित व्यक्तियों की इस कथित धोखाधड़ी में क्या भूमिका रही।
Future Crime Research Foundation के अनुसार, फ्रेंचाइजी, डीलरशिप, डिस्ट्रीब्यूटरशिप या एजेंसी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में अपराधी अक्सर आकर्षक व्यावसायिक अवसर, सीमित समय के ऑफर और निश्चित आय का लालच देकर लोगों से सुरक्षा जमा या प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं। किसी भी कंपनी में निवेश या फ्रेंचाइजी लेने से पहले उसके कॉर्पोरेट पंजीकरण, जीएसटी विवरण, कार्यालय, पूर्व व्यावसायिक रिकॉर्ड, ग्राहक प्रतिक्रिया और अनुबंध की कानूनी वैधता की स्वतंत्र जांच अवश्य करनी चाहिए। किसी भी बड़ी राशि का भुगतान केवल दस्तावेजों का सत्यापन करने और आधिकारिक बैंक खाते की पुष्टि के बाद ही किया जाना चाहिए। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी संदिग्ध फ्रेंचाइजी प्रस्ताव या निवेश योजना के संबंध में सतर्क रहें और धोखाधड़ी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित एजेंसी या साइबर पुलिस को सूचना दें।
