नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की कथित अवैध घुसपैठ से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी की लखनऊ जोनल यूनिट ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 16 जुलाई 2026 को पांच राज्यों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने ₹40 लाख नकद, करीब 180 ग्राम सोना, डिजिटल उपकरण और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।
ED के अनुसार, यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और अन्य स्थानों पर स्थित 16 ठिकानों पर की गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि एक संगठित सिंडिकेट लंबे समय से रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराने, उनकी पहचान छिपाने और फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कराने में सक्रिय था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित नेटवर्क अवैध रूप से भारत आने वाले विदेशी नागरिकों के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य पहचान दस्तावेज तैयार कराने में मदद करता था। इसके बाद उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में बसाने और स्थानीय स्तर पर पहचान स्थापित कराने की कोशिश की जाती थी।
ED अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी अभियान के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि कथित नेटवर्क की पूरी वित्तीय गतिविधियों और इससे जुड़े लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।
जांच एजेंसी ने बताया कि छापेमारी के दौरान मामले से जुड़े कुछ प्रमुख व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए रिकॉर्ड से कथित मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों, अवैध धन के प्रवाह और नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान में मदद मिल सकती है।
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ED की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि अवैध घुसपैठ कराने वाले इस नेटवर्क को आर्थिक रूप से कैसे संचालित किया जा रहा था और क्या इसके जरिए अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से वैध बनाने की कोशिश की गई। एजेंसी बैंक खातों, संपत्तियों, डिजिटल लेनदेन और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की भी जांच कर रही है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में केवल अवैध प्रवेश ही नहीं बल्कि फर्जी दस्तावेज तैयार करना, पहचान की धोखाधड़ी और वित्तीय लेनदेन को छिपाने जैसी गतिविधियां भी जांच के दायरे में आती हैं। ED अब बरामद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों के आधार पर नेटवर्क की संरचना और इसके संचालन के तरीके का पता लगाने में जुटी है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अवैध घुसपैठ से जुड़े नेटवर्क अक्सर पहचान बदलने, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और वित्तीय लेनदेन को छिपाने के लिए स्थानीय संपर्कों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में संगठित अपराध, मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की भी जांच की जाती है।
ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। बरामद साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कथित नेटवर्क का विस्तार किन-किन राज्यों तक था और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या रही है।
