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Home»Policy Watch»विदेशी फंडिंग के सहारे चल रहे कथित घुसपैठ नेटवर्क का ईडी ने किया बड़ा खुलासा, बिना केवाईसी बैंक खाते खोलने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच तेज
Policy Watch

विदेशी फंडिंग के सहारे चल रहे कथित घुसपैठ नेटवर्क का ईडी ने किया बड़ा खुलासा, बिना केवाईसी बैंक खाते खोलने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच तेज

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 18, 2026No Comments3 Mins Read
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पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में छापों के बाद संदिग्ध एनजीओ, एफसीआरए खातों और बैंकिंग चैनलों की पड़ताल; अवैध धन हस्तांतरण और दस्तावेज नेटवर्क जांच के दायरे में
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लखनऊ (उत्तर प्रदेश): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की कथित अवैध घुसपैठ, फर्जी पहचान दस्तावेज तैयार कराने और विदेशी फंडिंग के माध्यम से संचालित नेटवर्क की जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने का दावा किया है। एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ संदिग्ध संगठनों और व्यक्तियों ने विदेश से प्राप्त धनराशि का उपयोग कथित रूप से अवैध गतिविधियों के लिए किया तथा जांच से बचने के उद्देश्य से रकम को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। अब ईडी पूरे वित्तीय नेटवर्क, बैंकिंग लेनदेन और संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।

हाल ही में ईडी ने पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में 17 से अधिक स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस कार्रवाई के दौरान कई गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और उनसे जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली गई। जांच एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद हुए हैं, जिनका फोरेंसिक और वित्तीय विश्लेषण किया जा रहा है।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संस्थाओं को कथित रूप से विदेशों से फंडिंग प्राप्त होती रही। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन धनराशियों का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया तथा क्या धन को विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर उसके वास्तविक स्रोत और उपयोग को छिपाने की कोशिश की गई। ईडी अब धन के प्रवाह (मनी ट्रेल) की विस्तृत जांच कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू बिना उचित नो योर कस्टमर (KYC) प्रक्रिया के बैंक खाते खोले जाने के आरोपों से भी जुड़ा है। एजेंसी यह जांच कर रही है कि किन परिस्थितियों में कथित रूप से ऐसे खाते खोले गए और क्या इस प्रक्रिया में किसी बैंक अधिकारी, वित्तीय संस्था या अन्य मध्यस्थ की भूमिका रही। यदि जांच में किसी प्रकार की नियामकीय या कानूनी अनियमितता सामने आती है तो संबंधित संस्थाओं के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

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ईडी उन बैंकों की भी जांच कर रही है जहां कथित रूप से कुछ एनजीओ के एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) से जुड़े खाते संचालित किए जा रहे थे। एजेंसी यह सत्यापित कर रही है कि विदेशी अंशदान प्राप्त करने और उसके उपयोग के दौरान सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं विदेशी फंड का उपयोग अवैध गतिविधियों या पहचान दस्तावेज तैयार कराने जैसे कार्यों में तो नहीं किया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भी इस कथित नेटवर्क की गतिविधियों की अलग से पड़ताल की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई की है। वर्तमान जांच का उद्देश्य इन मामलों के बीच संभावित वित्तीय और संगठनात्मक संबंधों का पता लगाना भी है।

मामले में अब तक किसी नए व्यक्ति या संस्था के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किए गए हैं और जांच जारी है। एजेंसियां बरामद दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन का मिलान कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली स्पष्ट हो सके।

जांच अधिकारियों का कहना है कि यदि वित्तीय अनियमितताओं, विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेजों या बैंकिंग नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ प्रचलित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ईडी विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर मामले की बहुस्तरीय जांच आगे बढ़ा रही है।

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