नई दिल्ली: भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल HDFC बैंक संभावित अमेरिकी सिक्योरिटीज कानून उल्लंघनों को लेकर अमेरिका की तीन शेयरधारक कानून फर्मों की जांच के दायरे में आ गया है। हालांकि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है और इसे न तो किसी नियामक एजेंसी की औपचारिक कार्रवाई माना जा रहा है और न ही बैंक के खिलाफ दायर मुकदमा। फिलहाल संबंधित कानून फर्में यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या निवेशकों को बैंक की ओर से कोई भ्रामक या अधूरी जानकारी दी गई थी, जिससे उन्हें वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
अमेरिका की Glancy Prongay Wolke & Rotter LLP, Law Offices of Frank R. Cruz और Law Offices of Howard G. Smith ने अलग-अलग नोटिस जारी कर HDFC बैंक के खिलाफ संभावित संघीय सिक्योरिटीज कानून उल्लंघनों की जांच शुरू करने की घोषणा की है। तीनों फर्मों ने उन निवेशकों से संपर्क करने की अपील की है जिन्हें बैंक के शेयरों में गिरावट के कारण नुकसान हुआ हो, ताकि संभावित कानूनी दावों का मूल्यांकन किया जा सके।
इन जांचों की पृष्ठभूमि मई 2026 में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट से जुड़ी है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि HDFC बैंक ने अपने मार्केटिंग विभाग से जुड़े कुछ भुगतानों को लेकर आंतरिक सतर्कता जांच शुरू की थी। आरोप यह भी लगाया गया कि महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) को अधिक ब्याज भुगतान करने के लिए लगभग ₹45 करोड़ को मार्केटिंग खर्च के रूप में दर्शाया गया।
कानून फर्मों के अनुसार, इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध HDFC बैंक की अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs) के भाव में तेज गिरावट आई। 27 मई 2026 को बैंक का ADR लगभग 4.1% गिरकर 23.78 डॉलर पर बंद हुआ। फर्मों का कहना है कि यदि यह साबित होता है कि निवेशकों को भ्रामक जानकारी दी गई थी या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए थे, तो प्रभावित निवेशकों के लिए सामूहिक मुकदमे (क्लास एक्शन) का आधार बन सकता है।
HDFC बैंक के ADR न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं, इसलिए बैंक पर अमेरिकी संघीय सिक्योरिटीज कानूनों के तहत आवश्यक खुलासों और निवेशक सूचना संबंधी नियम लागू होते हैं। इसी कारण अमेरिकी कानून फर्में मामले की स्वतंत्र जांच कर रही हैं।
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हालांकि बैंक ने इन आरोपों को पहले ही पूरी तरह खारिज कर दिया है। मई में जारी अपने बयान में HDFC बैंक ने कहा था कि उसके पास मजबूत आंतरिक निगरानी, ऑडिट और नियंत्रण व्यवस्था मौजूद है तथा किसी भी मुद्दे का समाधान निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है। बैंक ने यह भी कहा कि चुनिंदा तथ्यों के आधार पर किसी प्रकार की अनियमितता या दोष सिद्ध मान लेना पूरी तरह गलत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में इस प्रकार की जांच असामान्य नहीं होती। जब किसी सूचीबद्ध कंपनी के शेयरों में किसी नकारात्मक खबर के बाद उल्लेखनीय गिरावट आती है, तो कई शेयरधारक कानून फर्में संभावित क्लास एक्शन मुकदमे की संभावना तलाशने के लिए प्रारंभिक जांच शुरू करती हैं। ऐसी जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि क्या कंपनी ने निवेशकों के साथ कोई महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने में चूक की या भ्रामक बयान दिए।
फिलहाल HDFC बैंक के खिलाफ किसी अमेरिकी नियामक संस्था ने कोई औपचारिक कार्रवाई शुरू नहीं की है और न ही किसी अदालत में मुकदमा दायर हुआ है। तीनों कानून फर्में केवल निवेशकों से जानकारी जुटा रही हैं और उपलब्ध तथ्यों का मूल्यांकन कर रही हैं। आगे चलकर यदि उन्हें पर्याप्त आधार मिलता है, तभी संभावित सिक्योरिटीज क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया जा सकता है।
इस बीच, HDFC बैंक के शेयरों पर दबाव बना हुआ है। शुक्रवार को बैंक का शेयर लगभग 1% की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। जून तिमाही के वित्तीय नतीजों के बाद शेयर लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में कमजोरी दर्ज कर रहा था। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक बैंक के शेयर में लगभग 25% की गिरावट आ चुकी है। बाजार की नजर अब इस बात पर रहेगी कि अमेरिकी कानून फर्मों की प्रारंभिक जांच आगे किसी औपचारिक कानूनी कार्रवाई में बदलती है या मामला इसी स्तर पर समाप्त हो जाता है।
