नई दिल्ली: देश में बढ़ते साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए 15 जुलाई 2026 तक 61 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन बंद कर दिए हैं। सरकार के अनुसार, यह कार्रवाई नागरिकों द्वारा संचार साथी (Sanchar Saathi) पोर्टल पर दर्ज कराई गई 11.18 लाख संदिग्ध धोखाधड़ी संचार रिपोर्टों के आधार पर की गई। इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और बिग डेटा एनालिटिक्स पर आधारित प्रणाली के जरिए सत्यापन में विफल रहने वाले 88 लाख से अधिक मोबाइल कनेक्शन भी निष्क्रिय किए गए हैं।
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल कनेक्शनों की पहचान के लिए ASTR (Artificial Intelligence and Big Data Analytics Tool) विकसित किया है। यह AI आधारित प्रणाली संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों का विश्लेषण कर फर्जी या नियमों का उल्लंघन करने वाले नंबरों की पहचान करती है।
मंत्री ने बताया कि ASTR के माध्यम से सत्यापन प्रक्रिया में असफल पाए गए 88 लाख से अधिक मोबाइल कनेक्शनों को भी 15 जुलाई 2026 तक बंद कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में साइबर अपराध, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी कॉल सेंटर और डिजिटल ठगी के मामलों में ऐसे मोबाइल कनेक्शनों का इस्तेमाल किया जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियम, 1961 के अनुसार साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन आती है, जबकि पुलिस और कानून-व्यवस्था राज्य सरकारों के विषय हैं। इसके बावजूद दूरसंचार विभाग दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सक्रिय रूप से तकनीकी समाधान विकसित कर रहा है।
इसी दिशा में विभाग ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) तैयार किया है, जिसके माध्यम से भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच दो-तरफा सूचना साझा की जाती है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य साइबर अपराधियों द्वारा मोबाइल कनेक्शन और दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को समय रहते पहचानना और रोकना है।
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सरकार ने बताया कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भी अपने विनियमित संस्थानों को डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए परामर्श जारी किया है। दूरसंचार विभाग ने इस संबंध में कई प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं और अब तक 50 से अधिक SEBI विनियमित संस्थान इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। इससे वित्तीय क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी विभिन्न एजेंसियों के बीच तेजी से साझा की जा सकेगी।
संचार मंत्री ने देश में दूरसंचार अवसंरचना के विस्तार की जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान में 5G सेवाएं देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध हैं तथा यह 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुकी हैं। पिछले तीन वर्षों में देश में 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशनों (BTS) की संख्या 1,40,623 (31 मार्च 2023) से बढ़कर 5,62,971 (30 जून 2026) हो गई है, जो डिजिटल कनेक्टिविटी के तेजी से विस्तार को दर्शाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) के तहत 30 जून 2026 तक 136 अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनके लिए लगभग ₹543 करोड़ की स्वीकृत वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। ये परियोजनाएं 6G, क्वांटम कम्युनिकेशन, सैटेलाइट एवं नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क, ऑप्टिकल सिस्टम, स्वदेशी 5G कोर और दूरसंचार सुरक्षा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों से संबंधित हैं।
सरकार ने भारतनेट परियोजना की प्रगति का भी उल्लेख किया। देशभर की 2,65,014 ग्राम पंचायतों को जोड़ने के लक्ष्य के तहत 2,14,912 ग्राम पंचायतों को भारतनेट फेज-I और फेज-II के अंतर्गत पहले ही जोड़ा जा चुका है। वहीं, जून 2026 तक संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (ABP) के तहत 13,494 ग्राम पंचायतों को उच्च गति इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपग्रेड किया गया है।
साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी के विशेषज्ञ तथा पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर अपराधी फर्जी मोबाइल कनेक्शन, सिम कार्ड और डिजिटल पहचान का दुरुपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। उनके अनुसार, AI आधारित पहचान प्रणाली और विभिन्न एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम सूचना साझाकरण से संगठित साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
