अहमदाबाद/सूरत: गुजरात के सूरत में निजी लॉकर सुविधा देने वाली ‘सेफ हाउस’ के सिंगणपोर शाखा से 206 तोला सोने के आभूषण, जिनकी अनुमानित कीमत ₹2.67 करोड़ बताई जा रही है, चोरी होने के मामले ने शहर में सनसनी फैला दी है। पुलिस को शुरुआती जांच में यह किसी बाहरी गिरोह की वारदात नहीं बल्कि संस्थान के भीतर रची गई सुनियोजित साजिश प्रतीत हो रही है। मामले में शाखा प्रबंधक महेश, उसके दो बेटों हर्ष और हरिकृष्ण तथा लॉकर तोड़ने में कथित रूप से माहिर मणिलाल की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
इस घटना के सामने आते ही सूरत के हजारों लॉकर धारकों में दहशत फैल गई। सोशल मीडिया और स्थानीय खबरों के जरिए सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में ग्राहक सेफ हाउस की विभिन्न शाखाओं में अपने लॉकरों की जांच के लिए पहुंच गए। कई स्थानों पर लंबी कतारें लग गईं और अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
पुलिस के अनुसार, सेफ हाउस की सूरत में तीन शाखाओं में 2,500 से अधिक निजी लॉकर संचालित हैं। ऐसे में इस कथित चोरी ने निजी लॉकर सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह घटना केवल एक लॉकर तक सीमित नहीं हो सकती और कई अन्य ग्राहकों के लॉकर भी निशाने पर रहे हों। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कथित रूप से ग्राहकों की अनुपस्थिति में अलग-अलग समय पर लॉकर खोले और बिना तत्काल संदेह उत्पन्न किए उनमें रखे सोने के आभूषण निकाल लिए। पुलिस का मानना है कि यह पूरी योजना लंबे समय तक बेहद सावधानी से अंजाम दी गई ताकि किसी को तुरंत इसकी भनक न लगे और बाद में चोरी किए गए आभूषण बाजार में बेचकर आर्थिक लाभ कमाया जा सके।
यह मामला तब उजागर हुआ जब सूरत निवासी रमेश वाघाणी ने अपने परिवार के लॉकर से अधिकांश आभूषण गायब पाए। शिकायत के अनुसार, उनकी पत्नी हीरेनबेन के नाम पर वर्ष 2020 में सिंगणपोर शाखा में लॉकर नंबर B/202 किराये पर लिया गया था, जिसके लिए हर महीने ₹1,700 किराया दिया जाता था। 8 मई 2026 को परिवार के सदस्य लॉकर की जांच कर चुके थे और उस समय सभी आभूषण सुरक्षित थे।
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करीब दो महीने बाद पारिवारिक कार्यक्रम के लिए जब परिवार दोबारा लॉकर खोलने पहुंचा तो अंदर केवल एक मंगलसूत्र, दो कंगन और तीन अंगूठियां मिलीं, जबकि लगभग 63 तोला सोने के आभूषण गायब थे। इसके बाद परिवार ने शाखा प्रबंधन से सीसीटीवी फुटेज दिखाने की मांग की।
शिकायत के अनुसार, कई घंटे तक फुटेज देखने की प्रक्रिया चलती रही, लेकिन इसी दौरान काउंटर पर मौजूद हर्ष कथित रूप से घबरा गया। आरोप है कि उसने कहा कि मामला अब “बहुत गर्म” हो गया है और उसने काफी जोखिम उठा लिया है। इसके बाद उसने फुटेज दिखाने से इनकार कर दिया और दावा किया कि हार्ड डिस्क से सीसीटीवी रिकॉर्डिंग हट चुकी है। इस घटनाक्रम के बाद परिवार का संदेह और गहरा गया तथा उन्होंने सिंगणपोर-दभोली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
घटना की जानकारी फैलते ही सेफ हाउस की वराछा स्थित शाखाओं पर भी ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई लोगों ने अपने लॉकर तत्काल खोलकर आभूषण और नकदी निकाल ली। कुछ ग्राहकों ने यह भी शिकायत की कि उनके लॉकर खोलने में तकनीकी दिक्कतें आईं और शाखा कर्मचारियों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
रमेश वाघाणी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 316(2), 316(5) और 61(2) के तहत आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने महेश, हर्ष और हरिकृष्ण को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि कथित लॉकर तोड़ने वाले मणिलाल सहित अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कितने लॉकरों से छेड़छाड़ हुई, चोरी गया सोना कहां पहुंचा और इस पूरे कथित फर्जीवाड़े का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है।
