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Home»Fraud Alert»बैंकों का ₹14,131 करोड़ वापस, लेकिन माल्या को राहत नहीं; ईडी ने कहा—मनी लॉन्ड्रिंग का केस अलग
Fraud Alert

बैंकों का ₹14,131 करोड़ वापस, लेकिन माल्या को राहत नहीं; ईडी ने कहा—मनी लॉन्ड्रिंग का केस अलग

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 11, 2026No Comments4 Mins Read
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बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय ने कहा—पीएमएलए के तहत जब्त संपत्तियों से बैंकों की वसूली होने भर से आपराधिक मामला खत्म नहीं होता; माल्या पर किंगफिशर एयरलाइंस के लिए लिए गए करीब ₹9,000 करोड़ के कर्ज में से कम से कम ₹3,500 करोड़ की कथित हेराफेरी का आरोप
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मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय ने बॉम्बे हाईकोर्ट में स्पष्ट किया है कि कारोबारी विजय माल्या की संपत्तियों से बैंकों को बड़ी रकम वापस मिल जाने के बावजूद उनके खिलाफ चल रहा धनशोधन का मामला खत्म नहीं हो सकता। एजेंसी ने कहा कि बैंकों की ओर से कर्ज की वसूली और धनशोधन अपराध की आपराधिक कार्यवाही दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। किसी संपत्ति को वैध दावेदारों को लौटाए जाने से धनशोधन के आरोप स्वतः समाप्त नहीं होते।
ईडी की ओर से अदालत में दाखिल हलफनामे के मुताबिक, अगस्त 2021 तक माल्या से संबंधित करीब ₹14,131.6 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियां भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह को सौंप दी गई थीं। इन संपत्तियों की बहाली का उद्देश्य बैंकों और अन्य वैध दावेदारों को हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई में मदद करना था। एजेंसी ने कहा कि यह कार्रवाई धनशोधन निवारण कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका आपराधिक मुकदमे पर कोई स्वतः प्रभाव नहीं पड़ता।
मामला माल्या की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है जिसके तहत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त की गई संपत्तियों का इस्तेमाल बैंकों के कर्ज की वसूली के लिए करने की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट इस मामले में यह भी देख रहा है कि जब्त संपत्तियों से हुई वसूली और माल्या के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही के बीच कानूनी संबंध किस तरह निर्धारित किया जाए।
ईडी के अनुसार, माल्या पर बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के लिए बैंकों से लिए गए करीब ₹9,000 करोड़ के कर्ज में से कम से कम ₹3,500 करोड़ की कथित हेराफेरी और धनशोधन का आरोप है। एजेंसी ने वर्ष 2016 में माल्या की कई संपत्तियों को धनशोधन निवारण कानून के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया था। इसके बाद वर्ष 2019 में विशेष अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक और अन्य ऋणदाता बैंकों को इन संपत्तियों का इस्तेमाल कर्ज की वसूली के लिए करने की अनुमति दी थी। इसमें यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड से जुड़े शेयर भी शामिल थे।
माल्या ने वर्ष 2020 में विशेष अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने दलील दी कि जब बैंकों की देनदारी की पर्याप्त भरपाई हो चुकी है और संपत्तियों से वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, तो संपत्तियों की बहाली को चुनौती देने वाली कार्यवाही व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी हो गई है। बचाव पक्ष ने मामले को मुख्य रूप से वाणिज्यिक विवाद के रूप में देखने और इसे समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

ईडी ने इस दलील को गलत और कानूनी रूप से असंगत बताया। एजेंसी ने कहा कि धनशोधन की कार्यवाही केवल बैंक के बकाये की वसूली तक सीमित नहीं है। यह अनुसूचित अपराध से हासिल कथित अपराध की आय और उसके धनशोधन से संबंधित आपराधिक आरोपों पर आधारित है। इसलिए बैंकों को पैसा वापस मिलने या उनकी वित्तीय देनदारी कम होने का अर्थ यह नहीं है कि धनशोधन के अपराध के कथित तत्व समाप्त हो गए।
एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि पीएमएलए के तहत संपत्तियों की बहाली का प्रावधान उन वैध दावेदारों को राहत देने के लिए है, जिन्हें अपराध से जुड़े वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा हो। इस प्रक्रिया का उद्देश्य संपत्ति की स्थिति को कानून के अनुरूप तय करना है, जबकि आपराधिक मुकदमे में यह निर्धारित किया जाता है कि आरोपी ने धनशोधन का अपराध किया है या नहीं।
ईडी का तर्क है कि वसूली की गई रकम और बैंकों की वास्तविक देनदारी का निर्धारण कर्ज वसूली की कार्यवाही में महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि माल्या के खिलाफ धनशोधन के आरोपों के आवश्यक कानूनी तत्व मौजूद हैं या नहीं। एजेंसी के मुताबिक, दोनों कार्यवाहियों का उद्देश्य और कानूनी आधार अलग है।
माल्या के खिलाफ कार्रवाई ऐसे समय में हुई थी जब किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए भारी कर्ज की अदायगी नहीं हो सकी थी और बैंकों ने अपनी रकम वापस पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने भी धनशोधन के आरोपों की जांच करते हुए संपत्तियां जब्त कीं। अब बैंकों को संपत्तियों के माध्यम से बड़ी रकम वापस मिलने के बावजूद अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि क्या इससे माल्या के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही पर कोई कानूनी असर पड़ता है।
ईडी का स्पष्ट रुख है कि संपत्तियों की बहाली और बैंक की रकम की वसूली को धनशोधन के आरोपों से अलग देखा जाना चाहिए। ऐसे में बैंकों को ₹14,131 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियों की बहाली और उससे हुई वसूली माल्या के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले को अपने आप समाप्त करने का आधार नहीं बनती।
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