नई दिल्ली: टेक कंपनी एप्पल के खिलाफ अमेरिका में एक बड़ा मुकदमा दायर किया गया है। आरोप है कि कंपनी अपने ऐप स्टोर पर उपलब्ध एक फर्जी क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट ऐप को समय रहते रोकने में विफल रही, जिसके कारण तीन निवेशकों के लगभग ₹15.78 करोड़ (करीब 18.35 लाख अमेरिकी डॉलर) मूल्य के बिटकॉइन की कथित चोरी हो गई। मुकदमे में दावा किया गया है कि एप्पल ने अपने ऐप स्टोर को सुरक्षित और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म के रूप में प्रचारित किया, लेकिन उसी प्लेटफॉर्म पर मौजूद फर्जी ऐप ने निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया।
यह मामला अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित उत्तरी जिला संघीय अदालत में जेम्स रामिरेज़, क्रिस्टोफर एलिस और जालेन डेलगाडो ने दायर किया है। शिकायत में कहा गया है कि एप्पल के सुरक्षा दावों के कारण उपयोगकर्ताओं ने ऐप स्टोर पर उपलब्ध ऐप को भरोसेमंद मान लिया और बिना अतिरिक्त सत्यापन के उसे डाउनलोड कर लिया।
मुकदमे के केंद्र में ‘स्पैरो वॉलेट’ (Sparrow Wallet) के नाम से उपलब्ध एक नकली ऐप है। वास्तविक स्पैरो वॉलेट एक लोकप्रिय ओपन-सोर्स बिटकॉइन वॉलेट है, लेकिन उसका कोई आधिकारिक आईओएस संस्करण कभी जारी नहीं किया गया। यह केवल विंडोज, मैकओएस और लिनक्स जैसे डेस्कटॉप प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसके बावजूद, कथित तौर पर एक जालसाज ऐप ने उसी नाम, लोगो और इंटरफेस की नकल कर एप्पल ऐप स्टोर पर जगह बना ली।
मुकदमे के अनुसार, पीड़ितों ने इस ऐप को असली समझकर डाउनलोड किया और उसमें अपने क्रिप्टो वॉलेट की रिकवरी ‘सीड फ्रेज’ दर्ज कर दी। इसके बाद यह संवेदनशील जानकारी कथित रूप से साइबर अपराधियों के नियंत्रण वाले वॉलेट तक पहुंच गई और बिटकॉइन चोरी कर लिए गए।
शिकायत में कहा गया है कि जेम्स रामिरेज़ को लगभग ₹7.53 करोड़, क्रिस्टोफर एलिस को करीब ₹7.23 करोड़ और जालेन डेलगाडो को लगभग ₹1.03 करोड़ मूल्य के बिटकॉइन का नुकसान हुआ। यह घटनाएं मई से अगस्त 2025 के बीच हुईं, जबकि अब इस मामले ने एप्पल के खिलाफ संघीय अदालत में कानूनी लड़ाई का रूप ले लिया है।
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याचिकाकर्ताओं ने एप्पल पर तीन प्रमुख आरोप लगाए हैं। पहला, यदि कंपनी आईओएस ऐप वितरण पर पूर्ण नियंत्रण रखती है और सुरक्षा के नाम पर केवल अपने ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करने की अनुमति देती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी बनती है कि वह स्पष्ट रूप से फर्जी और प्रतिरूप (इम्पर्सोनेशन) वाले ऐप की पहचान कर उन्हें हटाए। दूसरा, ऐप स्टोर को पूरी तरह सुरक्षित बताने वाले प्रचार ने उपभोक्ताओं को गुमराह किया। तीसरा, वास्तविक स्पैरो वॉलेट के डेवलपर क्रेग रॉ द्वारा वर्षों से फर्जी ऐप की शिकायत किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, क्रेग रॉ ने एप्पल को कई बार ऐसे नकली ऐप की जानकारी दी थी। उन्होंने उपयोगकर्ताओं को सतर्क करने के लिए एक आधिकारिक ‘प्लेसहोल्डर’ ऐप भी जमा कराने का प्रयास किया, जिसमें स्पष्ट लिखा गया था कि स्पैरो वॉलेट का कोई आईओएस संस्करण उपलब्ध नहीं है। हालांकि शुरुआत में एप्पल ने उनके डेवलपर खाते पर ही कार्रवाई की चेतावनी दी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।
फिलहाल एप्पल ने अदालत में मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि कंपनी ने तकनीकी मीडिया को बताया है कि संबंधित फर्जी ऐप हटा दिए गए हैं और उनसे जुड़े डेवलपर खातों को भी समाप्त कर दिया गया है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अब लोकप्रिय ब्रांड, वित्तीय ऐप और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म की हूबहू नकल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी क्रिप्टो वॉलेट या वित्तीय ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी उपलब्धता डेवलपर की आधिकारिक वेबसाइट से अवश्य सत्यापित करनी चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि किसी भी मोबाइल ऐप में बिना पुष्टि किए सीड फ्रेज, प्राइवेट की या रिकवरी पासफ्रेज दर्ज करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। उनके अनुसार, सोशल इंजीनियरिंग और नकली ऐप आज साइबर अपराधियों के सबसे प्रभावी हथियार बन चुके हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि उपयोगकर्ता किसी भी क्रिप्टो या बैंकिंग ऐप को डाउनलोड करने से पहले डेवलपर का नाम, आधिकारिक वेबसाइट, डाउनलोड इतिहास और समीक्षाओं का मिलान करें। बड़ी राशि निवेश करने से पहले छोटे लेनदेन के जरिए ऐप की विश्वसनीयता जांचना भी सुरक्षित माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सतर्कता करोड़ों रुपये के नुकसान से बचा सकती है।
