नई दिल्ली। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के खिलाफ आपराधिक और दीवानी मानहानि की कार्यवाही शुरू की है। यह विवाद गर्ग की ओर से 2018 में दोनों के बीच कथित मुलाकात को लेकर किए गए दावों से जुड़ा है। दुबे ने कथित आरोपों को गलत और मानहानिकारक बताते हुए पहले गर्ग को कानूनी नोटिस भेजकर बिना शर्त माफी मांगने और टिप्पणियां वापस लेने की मांग की थी। इसके बाद अब उन्होंने अदालत का रुख किया है।
दुबे ने आपराधिक मानहानि की शिकायत पटियाला हाउस कोर्ट में दाखिल की है, जबकि दीवानी मानहानि का मुकदमा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर किया गया है। दीवानी मामले में उन्होंने ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। यह कानूनी कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब दोनों के बीच सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी भी तेज हुई है।
विवाद की शुरुआत गर्ग के उस दावे से हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि दुबे ने 2018 में उनके कार्यालय का दौरा किया था। गर्ग के मुताबिक, उस दौरान दुबे ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से जुड़े कुछ मामलों में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। इनमें स्थानांतरण और अनुबंध से जुड़े मामले शामिल होने का दावा किया गया।
दुबे ने गर्ग के इस दावे को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने गर्ग के कार्यालय का दौरा ही नहीं किया था और उनके बारे में किए गए आरोप झूठे तथा मानहानिकारक हैं। इसी आधार पर उन्होंने कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया। हालांकि, गर्ग ने अपने जवाब में 2018 की कथित मुलाकात को लेकर अपने बयान पर कायम रहने की बात कही है।
दुबे ने इससे पहले गर्ग को कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस के जरिए उन्होंने कथित टिप्पणियों को वापस लेने और बिना शर्त माफी मांगने की मांग की थी। गर्ग के जवाब के बाद विवाद खत्म नहीं हुआ और दुबे ने अदालत में आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू करने का फैसला किया।
दुबे ने 21 सितंबर को भी सार्वजनिक रूप से बताया था कि उन्होंने गर्ग के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया है। उस समय उन्होंने गर्ग की एक पॉडकास्ट में की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी और आरोप लगाया था कि उनके बारे में मानहानिकारक बातें कही गईं।
दोनों के बीच विवाद बाद में आर्थिक और सरकारी आंकड़ों से जुड़े मुद्दों तक भी पहुंच गया। गर्ग ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि के आंकड़े पर सवाल उठाया था। उन्होंने इन आंकड़ों को लेकर सरकार के दावे पर अपनी आपत्ति जताई।
इसके जवाब में दुबे ने गर्ग की आलोचना पर पलटवार किया और पूर्व वित्त मंत्रालय अधिकारी के तौर पर उनके रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। इस तरह व्यक्तिगत आरोपों से शुरू हुआ विवाद बाद में GDP वृद्धि के आंकड़ों और आर्थिक नीतियों से जुड़े सार्वजनिक मतभेद तक पहुंच गया।
मानहानि के दोनों मामलों में अदालत के समक्ष अब यह तय होना है कि संबंधित आरोप और टिप्पणियां कानूनी तौर पर मानहानि की श्रेणी में आती हैं या नहीं। दीवानी मामले में ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की गई है, जबकि आपराधिक मामले में कथित मानहानिकारक बयान को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
फिलहाल, 2018 की कथित मुलाकात और LIC से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप के अनुरोध को लेकर दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से अलग हैं। दुबे ऐसे किसी कार्यालय दौरे से इनकार कर रहे हैं, जबकि गर्ग अपने पहले बताए गए घटनाक्रम पर कायम हैं। अदालत में आगे की कार्यवाही के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने दावों और दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रखेंगे।
