मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक प्रमुख ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स कंपनी के रिटर्न शिपमेंट से जुड़े ₹1.31 करोड़ के कथित गबन का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में कंपनी के एक टीम लीडर और एक डिलीवरी बॉय को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है। आरोप है कि आरोपियों ने ग्राहकों द्वारा रद्द किए गए या डिलीवर न हो सके उत्पादों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत विक्रेताओं तक वापस भेजने के बजाय उन्हें अवैध रूप से बेच दिया। पुलिस के अनुसार, इस कथित हेराफेरी के कारण कंपनी को करोड़ों रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ।
पुलिस के अनुसार, मामला मझोला थाना क्षेत्र स्थित Instacart Services Private Limited से जुड़ा है। कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि रामभवन सिंह, निवासी सेक्टर-119, नोएडा, की शिकायत पर प्रमोद कुमार, मुकेश, गौरव कुमार तथा कुछ अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कंपनी की रिवर्स लॉजिस्टिक्स प्रणाली का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर रिटर्न शिपमेंट का गबन किया गया।
जांच में सामने आया कि जनवरी से जुलाई 2026 के बीच ग्राहकों द्वारा वापस किए गए अथवा डिलीवर न हो पाने के कारण लौटे 36,165 रिटर्न शिपमेंट कथित रूप से विक्रेताओं तक नहीं पहुंचाए गए। इन उत्पादों की कुल अनुमानित कीमत ₹1,31,42,472 बताई गई है। आरोप है कि कंपनी के डिजिटल रिकॉर्ड में इन शिपमेंट को सफलतापूर्वक विक्रेताओं के पास लौटाया हुआ दर्शाया गया, जबकि वास्तविकता में ऐसा नहीं हुआ। इससे कंपनी के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच बड़ा अंतर सामने आया।
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारी प्रमोद कुमार के साथ मिलकर कथित साजिश रची थी। योजना के तहत रिटर्न शिपमेंट को आधिकारिक प्रक्रिया से हटाकर अपने कब्जे में रखा जाता था और बाद में उन्हें विभिन्न माध्यमों से बेच दिया जाता था। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि इस प्रक्रिया को लंबे समय तक व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया गया, जिससे कंपनी को समय रहते अनियमितताओं की जानकारी नहीं मिल सकी।
मामले का खुलासा होने के बाद मझोला थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टीम लीडर मुकेश और डिलीवरी बॉय गौरव कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से 32 कट्टों में रखे 994 उत्पाद बरामद किए हैं, जिनकी पहचान कंपनी के रिटर्न शिपमेंट का हिस्सा होने के रूप में की जा रही है। बरामद सामान का मिलान कंपनी के डिजिटल रिकॉर्ड और इन्वेंट्री विवरण से कराया जा रहा है ताकि वास्तविक नुकसान का सटीक आकलन किया जा सके।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी गौरव कंपनी छोड़कर एक अन्य ई-कॉमर्स कंपनी में टीम इंचार्ज के रूप में कार्यरत था। वहीं, इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी बताए जा रहे प्रमोद कुमार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इस कथित गबन में अन्य कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति भी शामिल थे और चोरी का सामान किन माध्यमों से बेचा गया।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आधुनिक ई-कॉमर्स कंपनियां पूरी तरह डिजिटल इन्वेंट्री और लॉजिस्टिक्स सिस्टम पर निर्भर हैं। यदि रिवर्स लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस प्रबंधन और डिजिटल रिकॉर्ड का नियमित ऑडिट न किया जाए तो अंदरूनी मिलीभगत से बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान हो सकता है। उन्होंने कंपनियों को प्रत्येक रिटर्न शिपमेंट की एंड-टू-एंड ट्रैकिंग, नियमित इन्वेंट्री ऑडिट, कर्मचारी सत्यापन, डिजिटल लॉग की निगरानी तथा संदिग्ध गतिविधियों का एआई आधारित विश्लेषण अपनाने की सलाह दी, ताकि इस प्रकार की धोखाधड़ी को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। डिजिटल रिकॉर्ड, वेयरहाउस डेटा, शिपमेंट ट्रैकिंग, वित्तीय लेनदेन और बरामद सामान के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
