मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के सरकारी आवास की भूमि पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा करने के प्रयास के मामले में पुलिस ने दो सगे भाइयों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर सरकारी भूमि पर अवैध रूप से स्वामित्व का दावा पेश करने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार किए, अधिकारियों और न्यायालय को गुमराह किया तथा वर्षों तक स्वयं को संपत्ति का मालिक बताकर किराया भी वसूला। मामले में अन्य नामजद आरोपियों की तलाश जारी है और पुलिस विभिन्न दस्तावेजों तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र के बल्लभ मोहल्ला, मंडी चौक निवासी सुधीर कुमार धवन और उसके भाई सुनील कुमार धवन को सिविल लाइंस थाना पुलिस ने बुधवार रात गिरफ्तार किया। दोनों को गुरुवार को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। इस मामले में सुमित धवन, अंकित धवन, सुधा टंडन, विपिन कुमार धवन तथा दिल्ली के शालीमार बाग निवासी बीना तलवार को भी नामजद किया गया है। पुलिस शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में 11 जुलाई को सिविल लाइंस थाने में उपनिरीक्षक हरेंद्र सिंह की तहरीर पर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र तथा अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्रशासनिक जांच के दौरान सरकारी भूमि पर स्वामित्व संबंधी दावों और प्रस्तुत दस्तावेजों में कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपियों ने कूटरचित अभिलेखों के माध्यम से एसएसपी आवास की भूमि पर अपना अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया और सरकारी अभिलेखों के विपरीत स्वयं को वैध स्वामी के रूप में प्रस्तुत किया। पुलिस का यह भी दावा है कि आरोपियों ने लगभग 19 वर्षों के दौरान स्वयं को संपत्ति का मालिक बताकर ₹28.45 लाख से अधिक का किराया वसूला। जांच के दौरान संबंधित किरायेदारी रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है ताकि कथित आर्थिक लाभ की वास्तविक सीमा का पता लगाया जा सके।
पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपियों के खिलाफ चड्ढा कोठी नामक एक अन्य संपत्ति से जुड़े मामले में भी जांच चल रही है। आरोप है कि उस संपत्ति पर दावा करने के लिए भी फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या दोनों मामलों में समान तरीके से दस्तावेज तैयार किए गए और क्या इसके पीछे किसी संगठित भूमि फर्जीवाड़ा नेटवर्क की भूमिका रही है।
कमिश्नर द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, विवादित भूमि मूल रूप से गांव छावनी की गाटा संख्या 455-ए के रूप में अंग्रेजी शासनकाल से सरकारी अभिलेखों में आईपीएस अधिकारियों के आवास हेतु दर्ज थी। बाद में बंदोबस्त प्रक्रिया के दौरान इसे गाटा संख्या 1348-एफ के रूप में दर्ज किया गया। इसी भूमि पर वर्षों से एसएसपी का सरकारी आवास स्थित है और राजस्व अभिलेखों में इसे सार्वजनिक संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया है।
जांच में यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि जिस महिला से आरोपियों ने कथित रूप से भूमि की रजिस्ट्री कराने का दावा किया, उसके पास इस संपत्ति का वैध स्वामित्व किस आधार पर था। प्रशासन का आरोप है कि स्वामित्व की वैध श्रृंखला उपलब्ध न होने के बावजूद कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी भूमि पर अधिकार जताने का प्रयास किया गया। इन दस्तावेजों की अब विधिक और तकनीकी जांच कराई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के विरुद्ध पहले भी अन्य संपत्ति विवादों से जुड़े मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। चड्ढा ग्रुप के इंद्रजीत सिंह चड्ढा ने भी इनके खिलाफ एक मामला दर्ज कराया था, जबकि वर्ष 2024 में आवास विकास कॉलोनी निवासी कारोबारी उमेश चंद्र ने भी इनके विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इन सभी मामलों में कार्यप्रणाली समान रही है।
पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत विवेचना जारी है। राजस्व अभिलेखों, पंजीकरण दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन, न्यायालयी रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर शेष आरोपियों की गिरफ्तारी और आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
