वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को पद से हटाने की कोशिश फिर तेज कर दी है। व्हाइट हाउस ने कुक को एक पत्र भेजकर बताया है कि राष्ट्रपति उन्हें फेडरल रिजर्व बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से हटाने पर विचार कर रहे हैं। कुक को कथित मॉर्गेज फ्रॉड के आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए 21 दिन का समय दिया गया है।
5 अगस्त की तारीख वाले पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति कुक को उनके पद से हटाने पर विचार कर रहे हैं। प्रशासन ने आरोप लगाया है कि कुक ने 2021 में कुछ मॉर्गेज दस्तावेजों में संपत्तियों को प्राथमिक निवास के तौर पर दर्शाया, जिससे उन्हें कथित तौर पर बेहतर ऋण शर्तें मिल सकती थीं। कुक ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और उन्हें हटाने की ट्रंप की पिछली कोशिश को चुनौती दी थी।
कुक के खिलाफ यह मामला पहली बार 2025 में सामने आया था। तब ट्रंप प्रशासन ने उन पर मॉर्गेज से जुड़ी गलत जानकारी देने के आरोप लगाए थे और ट्रंप ने उन्हें फेडरल रिजर्व से हटाने की कोशिश की थी। हालांकि, कुक ने पद छोड़ने से इनकार किया था। मामला बाद में अदालतों तक पहुंचा और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जून 2026 में तत्काल हटाने की कोशिश पर रोक लगाते हुए कुक को अपने पद पर बने रहने की अनुमति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुख्य रूप से इस बात से जुड़ा था कि कुक को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब देने का पर्याप्त अवसर दिया गया था या नहीं। अदालत ने तत्काल हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ने से रोकते हुए प्रशासन को उचित प्रक्रिया का पालन करने की दिशा में संकेत दिया। अब व्हाइट हाउस का नया पत्र उसी प्रक्रिया के तहत कुक से जवाब मांगने की कोशिश के रूप में सामने आया है।
फेडरल रिजर्व के गवर्नर को हटाने का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता देश की मौद्रिक नीति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। कानून के तहत फेडरल रिजर्व के गवर्नर को केवल उचित कारण यानी “for cause” के आधार पर हटाया जा सकता है। इसी प्रावधान को लेकर ट्रंप प्रशासन और कुक के बीच कानूनी विवाद गहरा चुका है।
लिसा कुक को 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन ने फेडरल रिजर्व बोर्ड में नामित किया था। वह फेडरल रिजर्व की गवर्नर बनने वाली पहली अश्वेत महिला हैं। ट्रंप और फेडरल रिजर्व के बीच तनाव का एक बड़ा कारण ब्याज दरों को लेकर भी रहा है। ट्रंप लंबे समय से कम ब्याज दरों की मांग करते रहे हैं, जबकि फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर मौद्रिक नीति को लेकर स्वतंत्र रुख बनाए रखा है।
5 अगस्त को ही कुक ने अलास्का में एक आर्थिक कार्यक्रम में बोलते हुए महंगाई को अभी भी ऊंचा बताया था। उन्होंने संकेत दिया था कि यदि आर्थिक परिस्थितियां इसकी मांग करती हैं तो फेड ब्याज दरों में बदलाव करने के लिए तैयार रहेगा। कुक का यह रुख ट्रंप प्रशासन की तेजी से कम ब्याज दरों की इच्छा से अलग माना जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन की ओर से कुक को हटाने की नई कोशिश ऐसे समय में सामने आई है जब व्हाइट हाउस और फेडरल रिजर्व के बीच संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर बहस पहले से तेज है। आलोचकों का कहना है कि केंद्रीय बैंक पर राजनीतिक दबाव बढ़ने से ब्याज दरों और महंगाई पर लिए जाने वाले फैसलों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। वहीं प्रशासन का रुख है कि राष्ट्रपति को उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार है जिनके बारे में गंभीर कदाचार के आरोप सामने आए हैं।
कुक पर लगाए गए मॉर्गेज फ्रॉड के आरोप अभी आरोपों के स्तर पर हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ इन आरोपों में कोई आपराधिक दोषसिद्धि नहीं हुई है और उन्होंने गलत काम से इनकार किया है।
अब कुक के पास प्रशासन के आरोपों का जवाब देने के लिए 21 दिन हैं। इसके बाद ट्रंप प्रशासन यह तय कर सकता है कि उन्हें हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। मामला आगे बढ़ने की स्थिति में फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता, राष्ट्रपति के अधिकार और “for cause” हटाने की कानूनी सीमा पर एक बार फिर अदालतों में महत्वपूर्ण बहस होने की संभावना है।
ट्रंप और कुक के बीच यह टकराव केवल एक अधिकारी के पद से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं है। इसका असर अमेरिकी मौद्रिक नीति की स्वतंत्रता और केंद्रीय बैंक पर राजनीतिक प्रभाव की सीमाओं को लेकर व्यापक बहस पर भी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के पिछले हस्तक्षेप के बाद अब प्रशासन की नई प्रक्रिया इस विवाद के अगले कानूनी चरण का आधार बन सकती है।
