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Policy Watch

Meta पर सरकार का शिकंजा जारी, एल्गोरिदम और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर बढ़ी पूछताछ

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksAugust 6, 2026No Comments3 Mins Read
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PM मोदी की पोस्ट हटने के विवाद के बाद कंपनी के ग्लोबल अधिकारियों से बातचीत जारी; CSAM, डीपफेक और भारतीय कानूनों के अनुपालन पर सरकार ने मांगी विस्तृत जानकारी
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नई दिल्ली: सोशल मीडिया कंपनी मेटा और केंद्र सरकार के बीच कंटेंट मॉडरेशन, एल्गोरिदम और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर चर्चा जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट अस्थायी रूप से हटाए जाने के विवाद के बाद मेटा के वैश्विक अधिकारियों की सरकार के साथ लगातार बैठकें हो रही हैं। सरकार ने कंपनी से उसके तकनीकी सिस्टम, कंटेंट निगरानी व्यवस्था और भारत में लागू नियमों के पालन को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है।

सूत्रों के मुताबिक, मेटा की ग्लोबल टीम अगले कुछ दिनों तक भारत में रह सकती है और सरकारी अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत होने की संभावना है। इन बैठकों में व्हाट्सएप से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। सरकार यह समझना चाहती है कि मेटा के प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की समीक्षा किस प्रक्रिया के तहत होती है और संवेदनशील मामलों में निर्णय लेने के लिए कौन-से तकनीकी मानक अपनाए जाते हैं।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत में काम करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल अपने देश के नियमों के आधार पर संचालित नहीं हो सकते। उन्हें भारत के कानूनों और सामाजिक जिम्मेदारियों का पालन करना होगा। सरकार का कहना है कि सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वे अपने उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराएं और कानूनों का पालन सुनिश्चित करें।

सरकार की ओर से मेटा से उसके एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली, कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम, शिकायत निवारण व्यवस्था और सुरक्षा उपायों से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और डीपफेक जैसे गंभीर मुद्दों से निपटने के लिए कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सिस्टम की भी समीक्षा की जा रही है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के भी मेटा की ग्लोबल टीम के साथ बैठक करने की संभावना है। मंत्रालय के अधिकारी कंपनी की तकनीकी टीम के साथ बातचीत जारी रखेंगे। सूत्रों के अनुसार, मेटा से तकनीकी विवरण, सिस्टम लॉग और पोस्ट हटाने या प्रतिबंधित करने से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं।

Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब मेटा के प्लेटफॉर्म फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पोस्ट कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं रही। इसके बाद कंपनी के अधिकारियों ने सरकार से संपर्क कर इस घटना पर खेद जताया। मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रमुख जोएल कपलान ने कंपनी की ओर से सरकार को हुई असुविधा के लिए माफी मांगी थी और इसे तकनीकी गलती बताया था।

सरकार ने इस मामले के अलावा मेटा के कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम, डीपफेक रोकने की क्षमता और बाल सुरक्षा से जुड़े उपायों पर भी सवाल उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को भारत में काम करते समय स्थानीय कानूनों और नियामकीय अपेक्षाओं का पालन करना होगा।

सरकार ने मेटा की सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म को तीसरे पक्ष द्वारा डाले गए कंटेंट के लिए कुछ परिस्थितियों में कानूनी सुरक्षा मिलती है, लेकिन इसके लिए कंपनियों को निर्धारित शर्तों का पालन करना होता है।

सूत्रों के अनुसार, सरकार अन्य बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे एक्स और टेलीग्राम के साथ भी नियमित संवाद कर रही है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों के अनुरूप काम करें और गलत सूचना, डीपफेक तथा अवैध सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।

मेटा और सरकार के बीच चल रही यह बातचीत आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है। इस पूरे मामले को भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, एल्गोरिदमिक पारदर्शिता और ऑनलाइन सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।

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