रियाद: सऊदी अरब में कथित वीजा धोखाधड़ी और फर्जी भर्ती व्यवस्था का सामना करने के बाद तमिलनाडु की 27 वर्षीय भारतीय नर्स मारिया स्टेला मार्टिन आखिरकार भारत लौट आई हैं। उन्हें भारतीय दूतावास और डम्माम पुलिस की मदद से सऊदी अरब से सुरक्षित बाहर निकाला गया। मार्टिन 7 अगस्त को अपने गृह राज्य तमिलनाडु पहुंचीं। उनकी वापसी ने विदेश में नौकरी के लिए जाने वाले भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों के सामने मौजूद भर्ती संबंधी जोखिमों और फर्जी एजेंटों से सावधान रहने की जरूरत को फिर उजागर किया है।
मार्टिन बीएससी डिग्रीधारी नर्स हैं और बेहतर रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गई थीं। हालांकि, वहां पहुंचने के बाद उन्हें कथित तौर पर ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा जो उनके मूल रोजगार प्रस्ताव और वीजा व्यवस्था से अलग थीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह एक कथित वीजा धोखाधड़ी रैकेट में फंस गई थीं। मामले में सहायता मिलने के बाद उन्हें भारत वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
भारत लौटने के लिए हवाई टिकट का खर्च भारतीय दूतावास ने वहन किया। इससे मार्टिन को आर्थिक परेशानी के बीच अपने घर वापस आने में मदद मिली। उनकी सुरक्षित वापसी में डम्माम पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। मार्टिन और उनके समर्थकों की ओर से भारतीय दूतावास तथा डम्माम पुलिस की सहायता के लिए आभार जताया गया है।
फर्जी भर्ती का बढ़ता जोखिम
इस मामले ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर नर्सिंग और स्वास्थ्य क्षेत्र के युवाओं को आकर्षक वेतन और प्रतिष्ठित अस्पतालों में नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजने वाले एजेंटों की गतिविधियों को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
मामले से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ एजेंट नर्सिंग और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित नौकरियों का विज्ञापन करते हैं, लेकिन उम्मीदवारों के सऊदी अरब पहुंचने के बाद उन्हें कथित तौर पर अलग तरह के काम में लगा दिया जाता है। इनमें घरेलू काम, यहां तक कि सऊदी या प्रवासी परिवारों के घरों में हाउस मेड के रूप में काम करना भी शामिल हो सकता है।
ऐसी परिस्थितियों में विदेश पहुंचे कामगारों के लिए न केवल रोजगार संबंधी नुकसान का खतरा रहता है, बल्कि वे अपने दस्तावेज, कानूनी स्थिति और आर्थिक संसाधनों को लेकर भी मुश्किल में पड़ सकते हैं। भाषा, स्थानीय कानून और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं होने से उनकी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
विदेश जाने से पहले जागरूकता की जरूरत
मार्टिन के मामले के बाद सऊदी अरब में नौकरी करने की तैयारी कर रहे भारतीय नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए प्रस्थान से पहले विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की मांग उठी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं मंजू मणिकुट्टन और मणिकुट्टन ने ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
प्रस्तावित जागरूकता सत्रों में सऊदी अरब के श्रम कानून, कार्यस्थल के नियम, कर्मचारियों के अधिकार, रोजगार अनुबंध, वीजा और अन्य दस्तावेजों की जांच, पेशेवर जिम्मेदारियां तथा स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक मानदंडों की जानकारी दी जा सकती है। इसके अलावा, विदेश में किसी आपात स्थिति का सामना करने पर भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की प्रक्रिया भी समझाई जा सकती है।
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि विदेश जाने से पहले उम्मीदवारों को अपने रोजगार प्रस्ताव की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। एजेंट द्वारा दिए गए दस्तावेजों के आधार पर ही निर्णय लेने के बजाय नियोक्ता, नौकरी की प्रकृति, वेतन, कार्यस्थल और वीजा की वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है।
नौकरी तलाशने वालों के लिए चेतावनी
विदेश में रोजगार पाने की कोशिश कर रहे भारतीयों के लिए यह मामला एक महत्वपूर्ण चेतावनी के तौर पर सामने आया है। किसी भी एजेंट को बड़ी रकम देने से पहले उसकी विश्वसनीयता और कानूनी स्थिति की जांच करना जरूरी है। उम्मीदवारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस पद के लिए भर्ती की जा रही है, वही काम विदेश पहुंचने के बाद वास्तव में दिया जाए।
मारिया स्टेला मार्टिन की सुरक्षित भारत वापसी से फिलहाल उन्हें राहत मिली है, लेकिन यह मामला विदेश में नौकरी की तलाश करने वाले भारतीयों के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को रेखांकित करता है। फर्जी भर्ती और वीजा धोखाधड़ी पर रोक लगाने के साथ-साथ संभावित पीड़ितों को समय पर कानूनी और राजनयिक सहायता उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
