आगरा: साइबर अपराधियों ने झारखंड के रांची में संचालित साई नाथ एजुकेशनल के नाम पर कथित तौर पर फर्जी वेबसाइट बनाकर छात्रों को गुमराह किया। फर्जी वेबसाइट के जरिए प्रवेश और परीक्षा परिणाम से जुड़ी जानकारी दिखाए जाने का मामला सामने आया है। एक छात्रा ने इस वेबसाइट के माध्यम से ₹32 हजार फीस जमा की, लेकिन रकम संस्थान के खाते में नहीं पहुंची। इसके बाद संस्थान के ट्रस्टी की शिकायत पर मामले की जांच शुरू हुई।
साई नाथ एजुकेशनल ट्रस्ट का मुख्यालय आगरा में है। ट्रस्टी चंद्र प्रकाश अग्रवाल के मुताबिक, संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट sainathuniversity.com और sainathuniversity.net हैं। प्रवेश प्रक्रिया, शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षा परिणाम से संबंधित आधिकारिक जानकारी इन्हीं प्लेटफॉर्म के माध्यम से जारी की जाती है।
मामला तब सामने आया जब एक छात्रा ने संस्थान से संपर्क कर बताया कि उसने फीस के तौर पर ₹32 हजार जमा किए थे, लेकिन भुगतान संस्थान के बैंक खाते में नहीं पहुंचा। इसके बाद छात्रा को प्रवेश और फीस की स्थिति को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ा।
छात्रों को गुमराह करने के लिए बनाई फर्जी वेबसाइट
संस्थान की ओर से जांच किए जाने पर sainathuniversityresult.com नाम की एक वेबसाइट का पता चला। आरोप है कि यह वेबसाइट आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती बनाई गई थी, ताकि प्रवेश और परिणाम से जुड़ी जानकारी तलाशने वाले छात्र भ्रमित हो सकें।
संस्थान का आरोप है कि फर्जी वेबसाइट के जरिए छात्रों को गुमराह किया जा रहा था। इससे न केवल संस्थान की प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका थी, बल्कि छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर भी खतरा पैदा हो सकता था। इसके बाद ट्रस्टी ने पुलिस से शिकायत कर फर्जी वेबसाइट को बंद कराने और उसके पीछे मौजूद लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पुलिस अब वेबसाइट के तकनीकी विवरण, उसके निर्माण, पंजीकरण और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इसके साथ ही बैंक से उस खाते की जानकारी मांगी जा रही है, जिसमें वेबसाइट के जरिए छात्रों से रकम जमा कराने का आरोप है।
बिहार के वेबसाइट डिजाइनर की भूमिका सामने आई
साइबर क्राइम टीम की जांच में फर्जी वेबसाइट तैयार करने वाले व्यक्ति की पहचान बिहार निवासी वेबसाइट डिजाइनर नीरज मिश्रा के रूप में हुई है। पुलिस अब उसकी भूमिका, वेबसाइट तैयार करने के लिए उसे दिए गए निर्देश और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के मुताबिक, फर्जी वेबसाइट के जरिए एक बैंक खाते में रकम जमा कराई गई थी। अब खाते के धारक और उसमें हुए लेन-देन की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल संस्थान के सामने केवल एक छात्रा की शिकायत आई है, लेकिन पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर अन्य पीड़ित भी सामने आ सकते हैं।
जांच एजेंसियां वेबसाइट के डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही हैं। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी वेबसाइट कितने समय तक सक्रिय रही, कितने छात्रों ने उसे देखा और क्या अन्य छात्रों से भी प्रवेश या परीक्षा के नाम पर रकम ली गई।
क्या है फिशिंग?
फिशिंग साइबर अपराध का एक तरीका है, जिसमें अपराधी असली कंपनी, बैंक, सरकारी विभाग या संस्थान से मिलती-जुलती वेबसाइट, ईमेल, संदेश या लिंक तैयार करते हैं। इसका उद्देश्य लोगों को भ्रमित कर पासवर्ड, बैंक खाते की जानकारी, डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जानकारी जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल करना या सीधे रकम वसूलना होता है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, फिशिंग हमले तब अधिक खतरनाक हो जाते हैं जब अपराधी किसी वास्तविक संस्थान की वेबसाइट जैसी दिखने वाली साइट तैयार करते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी भुगतान या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले वेबसाइट का आधिकारिक वेब एड्रेस स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है, खासकर प्रवेश, परीक्षा और वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामलों में।
पुलिस अब फर्जी वेबसाइट और उससे जुड़े बैंक खाते की जांच कर रही है। तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के विश्लेषण से फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क, संभावित पीड़ितों की संख्या और रकम के प्रवाह का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
