वाराणसी: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रावण माह के दौरान उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच ‘सुगम दर्शन’ कराने के नाम पर कथित ठगी का मामला सामने आया है। चौक पुलिस ने मंदिर के गेट नंबर-4 के पास कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग पुजारी जैसे कपड़े पहनकर श्रद्धालुओं से संपर्क करते थे और पैसे लेकर उन्हें जल्द या आसान दर्शन कराने का भरोसा देते थे।
पुलिस के मुताबिक, गोदौलिया, चौक और मैदागिन इलाके में कुछ लोगों के पुजारी बनकर श्रद्धालुओं को भ्रमित करने और VIP या सुगम दर्शन के नाम पर रकम वसूलने की शिकायतें मिल रही थीं। श्रावण के दौरान इन इलाकों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए पुलिस ने मामले की निगरानी बढ़ाई।
जांच के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर पुजारी जैसे परिधान में घूमते थे और मंदिर में जल्दी प्रवेश की तलाश कर रहे श्रद्धालुओं को निशाना बनाते थे। वे श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाते थे कि वे कम समय में दर्शन की व्यवस्था करा सकते हैं। आरोप है कि पैसे लेने के बाद वे अलग-अलग बहाने बनाकर श्रद्धालुओं को गुमराह करते थे और वादा पूरा नहीं करते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लाल बाबू पांडेय, 35, आशीष पांडेय, 24, दिलीप पांडेय, 44, यश दुबे, 20 और सुशील कुमार दास, 21 के रूप में हुई है। लाल बाबू पांडेय देवरिया के पिपरपाती का रहने वाला है, जबकि आशीष पांडेय वाराणसी के लहरतारा नई बस्ती का निवासी है। दिलीप पांडेय पड़ाव के सुजाबाद नई बस्ती का रहने वाला बताया गया है।
यश दुबे मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रांझी के भारत कॉलोनी का निवासी है, जबकि सुशील कुमार दास बिहार के दरभंगा जिले के बेहरा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। पुलिस अब आरोपियों की पृष्ठभूमि और मंदिर क्षेत्र में सक्रिय अन्य लोगों से उनके संभावित संपर्कों की जांच कर रही है।
शिकायतों के बाद पुलिस ने मंदिर और आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाले। संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया। स्थानीय सूचना तंत्र से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने मंदिर गेट के आसपास संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की और आरोपियों को हिरासत में लिया।
पुलिस के अनुसार, शिकायतों, CCTV फुटेज और स्थानीय सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई। आरोपियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के तहत कार्रवाई करते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरफ्तार आरोपी अलग-अलग काम कर रहे थे या किसी बड़े गिरोह का हिस्सा थे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मंदिर क्षेत्र में सक्रिय किसी स्थानीय पंडा, मंदिर सुरक्षा कर्मी या अन्य व्यक्ति की कथित ठगी में कोई भूमिका थी या नहीं।
श्रावण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचने के कारण पुलिस को आशंका है कि ऐसे लोग अलग-अलग रास्तों और भीड़ वाले स्थानों पर श्रद्धालुओं को निशाना बना सकते हैं। इसी को देखते हुए मंदिर के आसपास निगरानी और जांच बढ़ाई जा रही है।
आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर कितने श्रद्धालुओं से पैसे लिए गए और इस गतिविधि में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच में यदि किसी बड़े नेटवर्क या अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
