नई दिल्ली: अमेरिका ने दुनियाभर में अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में वीजा अपॉइंटमेंट को अस्थायी रूप से समायोजित किया है। यह कदम अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा कांसुलर अधिकारियों के लिए शुरू किए गए नए प्रशिक्षण कार्यक्रम के बीच उठाया गया है। प्रशिक्षण का उद्देश्य वीजा आवेदकों की अधिक गहन जांच के लिए अधिकारियों को तैयार करना है, खासकर ऐसे आवेदकों की पहचान करना जो अमेरिका में सार्वजनिक लाभों पर निर्भर हो सकते हैं।
इस बदलाव का असर उन इमिग्रेंट वीजा आवेदकों पर भी पड़ रहा है, जिनके इंटरव्यू पहले से निर्धारित थे। रिपोर्ट के अनुसार, कई आवेदकों को ईमेल के जरिए बताया गया है कि उनके तय अपॉइंटमेंट आगे की तारीखों के लिए स्थानांतरित किए जाएंगे। हालांकि, नई तारीख कब मिलेगी, इसकी कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई गई है। आवेदकों को बाद में नई तारीख के बारे में सूचना देने की बात कही गई है।
अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने Reuters को बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए दुनिया भर के अमेरिकी राजनयिक मिशनों में वीजा सेवाओं के अपॉइंटमेंट को समायोजित किया जा रहा है। यानी यह बदलाव किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के वैश्विक नेटवर्क में किया जा रहा है।
नया प्रशिक्षण ऐसे समय में शुरू किया गया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अमेरिका की आव्रजन व्यवस्था में जांच और निगरानी को लगातार कड़ा कर रहा है। प्रशासन का जोर वीजा जारी करने से पहले आवेदकों की पृष्ठभूमि, संभावित सार्वजनिक लाभ निर्भरता और अन्य जोखिमों की अधिक विस्तृत जांच पर है।
यह घटनाक्रम ट्रंप प्रशासन की एक अन्य आव्रजन नीति पर संघीय अदालत के हालिया फैसले के कुछ दिनों बाद सामने आया है। एक संघीय न्यायाधीश ने 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीजा जारी करने पर लगाई गई पिछली रोक को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने व्यापक प्रतिबंध लागू करते समय अपने कानूनी अधिकार की सीमा पार की थी।
जनवरी में लागू की गई उस नीति में ब्राजील, कोलंबिया, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत कई देशों को शामिल किया गया था। अफ्रीका, पश्चिम एशिया और कैरेबियन क्षेत्र के कई देश भी इसकी सूची में थे। अमेरिकी प्रशासन ने तर्क दिया था कि इन देशों के कुछ आवेदकों में अमेरिका पहुंचने के बाद सार्वजनिक लाभों पर निर्भर होने का जोखिम अधिक है।
हालांकि, मौजूदा कदम को किसी विशेष देश के नागरिकों के लिए वीजा जारी करने पर व्यापक रोक के तौर पर नहीं बताया गया है। विदेश विभाग के अनुसार, फिलहाल अपॉइंटमेंट को प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुरूप समायोजित किया जा रहा है। इसलिए जिन आवेदकों के इंटरव्यू स्थगित हुए हैं, उनके लिए मुख्य समस्या नई तारीख को लेकर अनिश्चितता है।
पहले से तय इंटरव्यू वाले आवेदकों को अब संबंधित अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से आगे की सूचना का इंतजार करना होगा। नई तारीख मिलने तक यात्रा से जुड़े नए इंतजाम करने में भी उन्हें सावधानी बरतनी होगी। खासकर ऐसे मामलों में जहां फ्लाइट, होटल या अन्य बुकिंग पहले से की जा चुकी हो, आवेदकों के लिए आधिकारिक सूचना का इंतजार करना महत्वपूर्ण होगा।
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी प्रशासन ने आव्रजन नियंत्रण को लेकर कई सख्त कदम उठाए हैं। इनमें निर्वासन, वीजा और ग्रीन कार्ड रद्द करने की कार्रवाई, अधिक कड़े स्क्रीनिंग नियम और कुछ रोजगार आधारित वीजा के लिए बढ़ी हुई फीस शामिल हैं।
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अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करना और सार्वजनिक संसाधनों के संभावित दुरुपयोग को रोकना है। नए कांसुलर प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी इसी व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें अमेरिका आने वाले लोगों की पहले से अधिक विस्तृत जांच पर जोर दिया जा रहा है।
भारतीय आवेदकों के लिए इसका तत्काल असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत स्थित अमेरिकी राजनयिक मिशनों में अपॉइंटमेंट शेड्यूल किस तरह बदला जाता है। जिन लोगों की अपॉइंटमेंट पहले से तय है, उन्हें नई तारीख या किसी बदलाव की जानकारी के लिए केवल अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए।
फिलहाल वीजा सेवाओं को स्थायी रूप से बंद करने की घोषणा नहीं हुई है। विदेश विभाग ने इसे प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए अपॉइंटमेंट में अस्थायी समायोजन बताया है। नई तारीखों के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं होने से प्रभावित आवेदकों को आगे की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा। यह कदम अमेरिकी आव्रजन नीति में बढ़ती स्क्रीनिंग और सख्त जांच की दिशा में एक और महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
