नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अलग-अलग बैंक धोखाधड़ी मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे दो घोषित अपराधियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार, दोनों आरोपी संबंधित मामलों में अदालत की कार्यवाही से बच रहे थे और लगातार कई वर्षों से फरार थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जितेंद्र कुमार और पूजा पाहवा के रूप में हुई है।
CBI के मुताबिक दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी लंबे समय तक की गई खुफिया जानकारी जुटाने और लक्षित कार्रवाई के बाद हुई। एक आरोपी पर वर्ष 2002-03 से जुड़े होम लोन फ्रॉड का मामला है, जबकि दूसरे पर इंडियन ओवरसीज बैंक से जुड़ी ₹10.16 करोड़ की कथित धोखाधड़ी और रकम के दुरुपयोग का आरोप है।
पहले मामले में जितेंद्र कुमार पर आरोप है कि उसने फर्जी और जाली वेतन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर होम लोन हासिल किया था। इस कथित धोखाधड़ी से GIC Housing Finance Limited को ₹65.90 लाख का नुकसान होने की बात सामने आई है। CBI के अनुसार लोन की राशि जारी होने के तुरंत बाद संबंधित खाते को Non-Performing Asset (NPA) घोषित कर दिया गया था।
जांच एजेंसी ने बताया कि मामले में वर्ष 2006 में जितेंद्र कुमार समेत कुल 19 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। हालांकि, कुमार कथित तौर पर अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान लगातार अनुपस्थित रहा। CBI के अनुसार उसने वर्ष 2009 से अदालत की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया और गिरफ्तारी से बचता रहा।
लगातार अनुपस्थिति के बाद अदालत ने जनवरी 2013 में जितेंद्र कुमार को घोषित अपराधी घोषित कर दिया था। CBI ने उसके ठिकाने और गतिविधियों के संबंध में जानकारी जुटाने के बाद मंगलवार को दिल्ली के द्वारका मोड़ इलाके से उसे गिरफ्तार कर लिया।
दूसरा मामला इंडियन ओवरसीज बैंक से जुड़ा है। इसमें पूजा पाहवा पर आरोप है कि उसने झूठे और जाली दस्तावेजों के आधार पर हासिल की गई कैश क्रेडिट सुविधा की रकम को कथित तौर पर दूसरी जगह स्थानांतरित किया और उसका दुरुपयोग किया। CBI के अनुसार इस कथित धोखाधड़ी से बैंक को ₹10.16 करोड़ का नुकसान हुआ।
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एजेंसी के मुताबिक संबंधित बैंक खाता वर्ष 2012 में NPA घोषित किया गया था। मामले में वर्ष 2017 में पूजा पाहवा समेत छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। जांच आगे बढ़ने पर चार बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी पूरक चार्जशीट दाखिल की गई। इन अधिकारियों पर कथित तौर पर लाभार्थी कंपनी और संबंधित व्यक्तियों के साथ मिलकर साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया।
CBI के अनुसार पूजा पाहवा को वर्ष 2023 में घोषित अपराधी घोषित किया गया था। लगातार खुफिया जानकारी जुटाने और लक्षित कार्रवाई के बाद एजेंसी ने उसे 4 अगस्त को पंजाब के लुधियाना से पकड़ा। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
दोनों मामलों में CBI की कार्रवाई का फोकस ऐसे आरोपियों को पकड़ने पर रहा, जो लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया से बचते हुए फरार चल रहे थे। एजेंसी ने कहा कि आरोपियों को पकड़ने के लिए उपलब्ध सूचनाओं का लगातार विश्लेषण किया गया और उनके संभावित ठिकानों की पहचान के बाद कार्रवाई की गई।
पहले मामले में फर्जी वेतन प्रमाणपत्रों के आधार पर ऋण प्राप्त करने का आरोप है, जबकि दूसरे मामले में बैंक की क्रेडिट सुविधा से प्राप्त रकम के कथित दुरुपयोग और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच हुई। दोनों मामलों में बैंकिंग प्रणाली में दस्तावेजों के सत्यापन और ऋण राशि के इस्तेमाल की निगरानी से जुड़े जोखिम सामने आते हैं।
CBI के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले से न्यायिक प्रक्रिया चल रही थी और उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया जाना था। एजेंसी अब संबंधित मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
