रांची। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने सीआईएसएफ के रांची स्थित क्षेत्रीय वेतन एवं लेखा कार्यालय (आरपीएओ) में तैनात तीन अधिकारियों को ₹48,400 रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में वरिष्ठ लेखा अधिकारी संतोष कुमार महतो और सहायक लेखा अधिकारी सुनील कुमार तथा सुजीत सिंह शामिल हैं। सीबीआई ने रिश्वतखोरी के मामले में कार्रवाई के बाद आरोपियों से जुड़े रांची और धनबाद के पांच ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया।
सीबीआई के अनुसार, कार्रवाई सीआईएसएफ की प्रयागराज स्थित एनटीपीसी इकाई में तैनात हेड कांस्टेबल रविकांत त्रिपाठी की शिकायत के आधार पर की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरपीएओ में लंबित विभिन्न बिलों का भुगतान कराने और उनकी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले तीनों लेखा अधिकारी रिश्वत की मांग कर रहे थे। इनमें यात्रा भत्ता (टीए), बच्चों की शिक्षा भत्ता (सीईए) और अन्य लंबित दावों से संबंधित बिल शामिल बताए गए हैं।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने आरोपों का सत्यापन कराया। जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद आगे की कार्रवाई की गई। सीबीआई ने कार्रवाई के लिए झारखंड सरकार से आवश्यक सहमति प्राप्त की और 26 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की।
इसके बाद सीबीआई ने रिश्वत लेते अधिकारियों को पकड़ने के लिए आरपीएओ कार्यालय में योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। गुरुवार को शिकायतकर्ता को आरोपियों को रिश्वत की रकम देने के लिए भेजा गया। जैसे ही ₹48,400 की रकम कथित तौर पर रिश्वत के रूप में सौंपी गई, सीबीआई की टीम ने कार्रवाई करते हुए तीनों अधिकारियों को मौके पर ही पकड़ लिया। जांच एजेंसी ने रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली।
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने मामले को केवल रिश्वत लेने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आरोपियों की संपत्ति और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच शुरू कर दी। जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने रांची और धनबाद में आरोपियों से जुड़े पांच ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। इस दौरान करीब ₹22 लाख नकद और जेवरात बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
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तलाशी के दौरान जमीन और रियल एस्टेट में निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा बैंक लॉकर से संबंधित जानकारी भी जांच एजेंसी के हाथ लगी है। सीबीआई अब इन दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरोपियों की घोषित आय और उनकी संपत्तियों तथा निवेश के बीच कोई असामान्य अंतर तो नहीं है।
जांच एजेंसी के अनुसार, तीनों अधिकारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी के मामले के साथ आय से अधिक संपत्ति से संबंधित पहलू की भी अलग से जांच की जाएगी। बरामद नकदी, जेवरात, जमीन और रियल एस्टेट से जुड़े दस्तावेज तथा बैंक लॉकर की जानकारी इस जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जा रहे हैं। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित संपत्तियां और निवेश किस स्रोत से किए गए और क्या उनका आरोपियों की वैध आय से कोई मेल है।
मामले की जांच अब रिश्वत के लेनदेन से आगे बढ़कर संबंधित बिलों और उनके भुगतान की पूरी प्रक्रिया तक पहुंच सकती है। सीबीआई यह पता लगा सकती है कि किन कर्मियों के टीए, सीईए या अन्य दावे लंबित थे, उनकी फाइलें किन स्तरों से गुजरीं और भुगतान में तेजी लाने या रोकने के लिए आरोपियों की क्या भूमिका थी। संबंधित कार्यालयी रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
सीबीआई तीनों गिरफ्तार अधिकारियों को शुक्रवार को सक्षम अदालत के समक्ष पेश करेगी। इसके बाद अदालत से उनकी हिरासत और आगे की जांच से संबंधित अनुमति मांगी जा सकती है। जांच एजेंसी आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित रिश्वत की मांग किस स्तर पर तय हुई थी और क्या इस प्रक्रिया में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।
सीबीआई की कार्रवाई के बाद आरपीएओ में लंबित बिलों के भुगतान की प्रक्रिया और संबंधित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। हालांकि, गिरफ्तार अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों पर भी जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
