रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के अपने पूर्व आदेश का कथित तौर पर पालन नहीं होने पर राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने डीजीपी से जवाब मांगा है कि न्यायालय के निर्देश का अनुपालन नहीं होने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। डीजीपी को मामले में शपथपत्र दाखिल कर अब तक की कार्रवाई और अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने गुरुवार को स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। अदालत ने राज्य सरकार को पहले सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और इसकी जानकारी न्यायालय को देने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि पूर्व निर्देश के बावजूद अब तक इस दिशा में पूरी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अदालत ने डीजीपी से विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि राज्य के कितने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं और कितने थानों में यह व्यवस्था अभी बाकी है। इसके साथ ही जहां कैमरे नहीं लगाए गए हैं, वहां देरी के कारणों की जानकारी भी शपथपत्र के माध्यम से देने को कहा गया है। कोर्ट यह भी देखेगा कि पहले दिए गए निर्देश के बाद राज्य पुलिस और सरकार की ओर से अनुपालन के लिए क्या कदम उठाए गए।
थानों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। पुलिस थानों में हिरासत, पूछताछ और अन्य गतिविधियों से जुड़े मामलों में वीडियो रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से घटनाओं की वास्तविक स्थिति की जांच में मदद मिल सकती है। इसी उद्देश्य से अदालत ने सभी थानों में सीसीटीवी लगाने का निर्देश दिया था।
गुरुवार की सुनवाई में अदालत ने आदेश के अनुपालन में कथित देरी पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए अधिकारियों को चेताया कि ऐसी स्थिति पैदा नहीं की जानी चाहिए, जिसमें न्यायालय को कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़े। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेश के अनुपालन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने होंगे।
Algoritha Security Launches ‘Make in India’ Cyber Lab for Educational Institutions
हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव को भी आदेश के अनुपालन को गंभीरता से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। दोनों अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि न्यायालय के पूर्व आदेश को लागू करने के लिए संबंधित विभाग और पुलिस अधिकारी आवश्यक कदम उठाएं। अदालत ने संकेत दिया कि न्यायिक निर्देशों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही को सामान्य प्रक्रिया के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
डीजीपी को दाखिल किए जाने वाले शपथपत्र में अनुपालन की विस्तृत स्थिति बतानी होगी। इसमें सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता, लगाए गए कैमरों की संख्या, लंबित कार्य और देरी के कारणों का उल्लेख किया जा सकता है। अदालत अगली सुनवाई में इस शपथपत्र और राज्य की ओर से उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी।
अदालत की ओर से जारी अवमानना नोटिस का अर्थ यह नहीं है कि डीजीपी के खिलाफ अंतिम रूप से कोई दोष निर्धारित हो गया है। नोटिस के जरिए उन्हें कथित आदेश उल्लंघन की स्थिति पर अपना पक्ष रखने और अनुपालन से संबंधित तथ्य अदालत के सामने रखने का अवसर दिया गया है। आगे की कार्रवाई डीजीपी के जवाब और न्यायालय के मूल्यांकन पर निर्भर करेगी।
मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की गई है। उस दिन अदालत डीजीपी के शपथपत्र, सीसीटीवी लगाने की प्रगति और राज्य सरकार की ओर से किए गए अनुपालन की समीक्षा कर सकती है। यदि अदालत को आदेश के पालन में पर्याप्त प्रगति नहीं मिली तो वह आगे आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।
हाईकोर्ट की यह कार्रवाई पुलिस थानों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और न्यायिक निर्देशों के समयबद्ध अनुपालन पर जोर देती है। अब डीजीपी के साथ मुख्य सचिव और गृह सचिव की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो गई है। अगली सुनवाई में राज्य को यह बताना होगा कि पूर्व आदेश के बाद सीसीटीवी व्यवस्था लागू करने के लिए जमीन पर कितनी प्रगति हुई है।
