अकोला। महाराष्ट्र के अकोला शहर में फर्जी दस्तावेजों के जरिए करीब ₹5 करोड़ मूल्य के एक प्लॉट को हड़पने का कथित मामला सामने आया है। आरोप है कि 84 वर्षीय महिला के नाम दर्ज जमीन को बेचने के लिए आरोपियों ने एक दूसरी महिला को मालिक के रूप में पेश किया और उसके नाम का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। स्थानीय अपराध शाखा ने मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित फर्जीवाड़े में दस्तावेज तैयार करने वाले और अन्य मददगार कौन-कौन लोग शामिल थे।
मामला शहर कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, शांता प्रकाश बाहेकर, उम्र 84 वर्ष, के नाम मलकापुर इलाके में सर्वे नंबर 8 स्थित प्लॉट नंबर 21 दर्ज है। करीब 5,075 वर्गफुट क्षेत्रफल वाले इस प्लॉट का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग ₹5 करोड़ बताया गया है। आरोप है कि इसी संपत्ति को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने की साजिश रची गई।
जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, संदिग्धों ने कथित तौर पर एक महिला को शांता बाहेकर का नाम और पहचान अपनाकर दस्तावेजी प्रक्रिया में पेश किया। इसके बाद उल्हासनगर और अकोला में फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी और बिक्री दस्तावेज तैयार किए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर जमीन के स्वामित्व और बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय अपराध शाखा की टीम ने आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने गोपनीय सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर संदिग्धों तक पहुंच बनाई।
जांच के दौरान राहुल अशोकराव जाधव, उम्र 43 वर्ष, निवासी नायगांव, पुराने शहर, अकोला; प्रियांका लक्ष्मण पाटील उर्फ प्रियांका नागेश चव्हाण, उम्र 30 वर्ष, निवासी सरस्वती नगर, रिंग रोड, अकोला; और आस्तिक श्रीकृष्ण चव्हाण, उम्र 30 वर्ष, निवासी संतोष नगर, मलकापुर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, तीनों की भूमिका की जांच की जा रही है और उनसे पूछताछ के आधार पर मामले की अन्य कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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पुलिस को आशंका है कि यह मामला केवल तीन आरोपियों तक सीमित नहीं हो सकता। जांचकर्ताओं का मुख्य फोकस इस बात पर है कि फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी और बिक्री दस्तावेज किसने तैयार किए और इन दस्तावेजों को आधिकारिक प्रक्रिया में इस्तेमाल कराने के लिए किस स्तर पर मदद ली गई। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य संपत्तियों को भी निशाना बनाया है।
अदालत ने गिरफ्तार आरोपियों को छह दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस दौरान पुलिस कथित फर्जी दस्तावेजों, संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड और आरोपियों के बीच संपर्क की जांच करेगी। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि जमीन की बिक्री से संबंधित किसी वित्तीय लेनदेन या अन्य लाभ का कोई रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं।
इस तरह के संपत्ति फर्जीवाड़े में अपराधी अक्सर वास्तविक मालिक की पहचान और दस्तावेजों की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। किसी संपत्ति के मालिक की गैरमौजूदगी या उम्रदराज होने की स्थिति में पहचान का गलत इस्तेमाल कर पावर ऑफ अटॉर्नी या बिक्री दस्तावेज तैयार करना गंभीर धोखाधड़ी का रूप ले सकता है।
संपत्ति कानून और दस्तावेज सत्यापन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन या प्लॉट खरीदने से पहले केवल बिक्री दस्तावेज देखना पर्याप्त नहीं है। खरीदार को पुराने स्वामित्व रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी, पहचान दस्तावेज और संबंधित पंजीकरण रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए। किसी संपत्ति के मालिक की पहचान और दस्तावेजों की पुष्टि संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय तथा कानूनी विशेषज्ञ से कराना महत्वपूर्ण है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि संपत्ति खरीदते समय जल्दबाजी में भुगतान न करें और स्वामित्व तथा दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूर करें। यदि किसी संपत्ति के दस्तावेज, पावर ऑफ अटॉर्नी या मालिक की पहचान को लेकर संदेह हो तो संबंधित विभाग और पुलिस को तत्काल सूचना दी जानी चाहिए। मामले की आगे की जांच से कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
