नोएडा। नोएडा एसटीएफ की ओर से पकड़े गए कथित अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके तार कई कंपनियों और बैंक खातों तक पहुंचते जा रहे हैं। रिमांड पर लिए गए चीनी नागरिक लियाओ लोंगहुई और उसके दो साथियों से पूछताछ में 20 से अधिक कथित फर्जी कंपनियों और उनसे जुड़े बैंक खातों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियां अब इन कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और विदेशों में मौजूद कारोबारी संस्थाओं से उनके संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।
एसटीएफ के मुताबिक, आरोपियों ने कर्मचारियों और परिचितों के दस्तावेजों का कथित तौर पर इस्तेमाल कर कई कंपनियां स्थापित कीं। इन्हीं कंपनियों के नाम पर अलग-अलग बैंकों में खाते खोले गए। जांच में आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल वास्तविक कारोबार की आड़ में रकम को इधर-उधर करने और हवाला नेटवर्क तक पहुंचाने के लिए किया जाता था।
अंडर-इनवॉयसिंग से रकम निकालने का आरोप
जांच में चीन से कच्चा माल आयात करने वाली कंपनियों की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि नेटवर्क से जुड़ी कंपनियां चीन से माल मंगाते समय उसकी वास्तविक कीमत की तुलना में काफी कम मूल्य दिखाती थीं। इसे अंडर-इनवॉयसिंग के जरिए सीमा पार धन के लेन-देन को छिपाने की कथित कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
आरोपियों से पूछताछ में यह भी सामने आया है कि भारत में माल बेचने के बाद वास्तविक बिक्री मूल्य और दस्तावेजों में दिखाई गई कीमत के बीच बची रकम को कथित हवाला चैनल के जरिए चीन भेजा जाता था। इस तरह आयात के दस्तावेजों में कम मूल्य दिखाकर भारत में बनी अतिरिक्त रकम को अलग चैनल से विदेश भेजने का आरोप है।
जांच में हांगकांग की कुछ कंपनियों का कनेक्शन भी सामने आया है। एसटीएफ अब भारत और विदेशों में बनाई गई कथित शेल कंपनियों के बीच रकम के लेन-देन की कड़ियां जोड़ रही है। आशंका है कि अलग-अलग कंपनियों और बैंक खातों के बीच रकम ट्रांसफर कर उसकी वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी को छिपाने के लिए लेयरिंग की गई।
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22 जुलाई को तीन आरोपी गिरफ्तार
नोएडा एसटीएफ ने 22 जुलाई को सेक्टर-93 स्थित पूर्वांचल सिटी सोसाइटी से चीनी नागरिक लियाओ लोंगहुई, संजीव कुमार और कौशलेंद्र को गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से कथित फर्जी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज और विभिन्न बैंकों के करीब ₹4.72 करोड़ के चेक बरामद किए गए थे।
जांच में लियाओ लोंगहुई के भारत में रहने को लेकर भी गंभीर तथ्य सामने आए। उसका वीजा वर्ष 2020 में ही समाप्त हो गया था। इसके बावजूद वह भारत में रह रहा था और कथित तौर पर नेटवर्क की गतिविधियों को संचालित कर रहा था। एसटीएफ अब उसके भारत में रहने की अवधि और इस दौरान किए गए कारोबारी तथा वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।
रिमांड के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर जांच एजेंसी कथित नेटवर्क से जुड़ी अन्य कंपनियों, बैंक खातों और लोगों की पहचान करने में जुटी है। खासतौर पर उन खातों की जांच की जा रही है, जिनमें बड़ी रकम आई या विदेश से जुड़े लेन-देन हुए।
वीजा उल्लंघन में चार बांग्लादेशी हिरासत में
इधर, दिल्ली में विदेशी नागरिकों के वीजा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। मध्य जिला पुलिस ने ‘ऑपरेशन विस्टा 1.0’ के तहत पहाड़गंज के नबी करीम इलाके के होटलों में जांच अभियान चलाया। इस दौरान कथित तौर पर वीजा नियमों का उल्लंघन कर रह रहे चार बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया।
हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान जोहरुल इस्लाम (41), काजी मोहम्मद नईमुर रहमान (25), मोहम्मद मुहित उद्दीन (34) और माहिम (21) के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, इस महीने वीजा नियमों के उल्लंघन के आरोप में पकड़े गए विदेशी नागरिकों की संख्या 35 हो गई है। इनमें से 31 को डिपोर्ट किया जा चुका है, जबकि बाकी चार के निर्वासन की प्रक्रिया जारी है।
दोनों मामलों में जांच एजेंसियों का फोकस दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और विदेशी संपर्कों की पड़ताल पर है। नोएडा में हवाला नेटवर्क की जांच से जहां अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन की नई कड़ियां सामने आने की उम्मीद है, वहीं दिल्ली में विदेशी नागरिकों के दस्तावेज और वीजा स्थिति की जांच लगातार की जा रही है।
