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Policy Watch

बच्चों की सुरक्षा पर Meta घिरा, CSEAM से जुड़े विज्ञापनों के आरोपों पर NCPCR की जांच

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 8, 2026No Comments4 Mins Read
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9 सितंबर को Meta India के प्रबंध निदेशक अरुण श्रीनिवास की पेशी; बाल अधिकार आयोग ने कंपनी के जवाब और मंचों पर कथित विज्ञापनों से जुड़े आरोपों की पड़ताल के लिए शुरू की औपचारिक कार्रवाई
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नई दिल्ली। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर Meta की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने कंपनी के सामाजिक मंचों पर बाल यौन शोषण एवं दुरुपयोग सामग्री (CSEAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों की मौजूदगी के आरोपों को लेकर औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया है। आयोग ने Meta India के प्रबंध निदेशक अरुण श्रीनिवास को 9 सितंबर को सुनवाई के लिए तलब किया है। मामले से जुड़े कंपनी के अन्य अधिकारियों को भी आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
यह कार्रवाई आयोग की ओर से स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई प्रक्रिया का हिस्सा है। NCPCR ने जुलाई में Meta को नोटिस जारी कर उसके मंचों पर CSEAM से संबंधित कथित विज्ञापनों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। कंपनी ने आयोग को अपना जवाब सौंप दिया था। जवाब की समीक्षा और मामले से जुड़ी उपलब्ध जानकारी पर विचार करने के बाद आयोग ने अब जांच को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

3 जुलाई को Meta को भेजा गया था नोटिस

NCPCR ने 3 जुलाई को Meta Platforms Inc. को नोटिस जारी किया था। इसमें कंपनी से उसके मंचों पर बाल यौन शोषण और दुरुपयोग सामग्री से जुड़े कथित विज्ञापनों की मौजूदगी के आरोपों पर जवाब मांगा गया था। Meta ने करीब एक सप्ताह बाद आयोग के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत किया। इसके बाद आयोग ने कंपनी की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण और मामले से संबंधित तथ्यों की समीक्षा की।
आयोग की कार्रवाई एक अंतरराष्ट्रीय समाचार जांच में सामने आए आरोपों के बाद शुरू हुई थी। रिपोर्ट में Meta के मंचों पर CSEAM से संबंधित विज्ञापनों की कथित मौजूदगी का मुद्दा उठाया गया था। बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और कंपनी से इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा।

9 सितंबर को अधिकारियों से होगी पूछताछ

NCPCR की ओर से 9 सितंबर को होने वाली सुनवाई मामले की जांच में अहम कदम मानी जा रही है। इसमें Meta India के प्रबंध निदेशक अरुण श्रीनिवास के अलावा कंपनी के अन्य अधिकारियों के भी शामिल होने की उम्मीद है। आयोग आरोपों के साथ-साथ Meta की ओर से जुलाई में दिए गए जवाब और उसके मंचों पर कथित विज्ञापनों से जुड़ी परिस्थितियों की पड़ताल करेगा।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

सुनवाई के दौरान यह जानने की कोशिश की जा सकती है कि यदि CSEAM से संबंधित विज्ञापन वास्तव में मंचों पर दिखाई दिए, तो वे किस प्रक्रिया के तहत उपयोगकर्ताओं तक पहुंचे। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि ऐसी सामग्री की पहचान, रोकथाम और हटाने के लिए कंपनी के पास कौन-से सुरक्षा तंत्र मौजूद हैं और कथित मामलों में उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया।

सामग्री निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल

सोशल मीडिया मंचों पर बच्चों की सुरक्षा लंबे समय से नियामकों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री न केवल बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि ऐसी सामग्री के प्रसार या उससे जुड़े विज्ञापन तंत्र को लेकर भी कड़े सवाल उठते हैं। डिजिटल मंचों पर सामग्री की बड़ी मात्रा और स्वचालित विज्ञापन प्रणाली के कारण निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता महत्वपूर्ण हो जाती है।
Meta के प्रमुख मंचों में Facebook और Instagram शामिल हैं, जिनका भारत में बड़ा उपयोगकर्ता आधार है। ऐसे में बाल शोषण से संबंधित सामग्री या विज्ञापनों की कथित मौजूदगी का मामला कंपनी की सामग्री निगरानी और बाल सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन गया है। आयोग यह भी देख सकता है कि कंपनी ने ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए क्या नीतियां और तकनीकी उपाय लागू किए हैं।

जांच के नतीजे का इंतजार

फिलहाल NCPCR की जांच प्रारंभिक चरण में है और आयोग ने आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया है। 9 सितंबर की सुनवाई में Meta का पक्ष सामने आने के बाद मामले में आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है। आयोग कंपनी के जवाब, उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
बाल अधिकार आयोग की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब बच्चों को ऑनलाइन शोषण, अनुचित सामग्री और डिजिटल अपराधों से बचाने को लेकर तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही पर लगातार जोर दिया जा रहा है। अब निगाहें 9 सितंबर की सुनवाई पर हैं, जहां Meta से कथित विज्ञापनों और बच्चों की सुरक्षा के लिए अपनाए गए उपायों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
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