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Home»Policy Watch»ग्राहक डाटा की सुरक्षा पर आरबीआई सख्त, एआई वेंडरों से लेकर सर्वर तक निगरानी के निर्देश
Policy Watch

ग्राहक डाटा की सुरक्षा पर आरबीआई सख्त, एआई वेंडरों से लेकर सर्वर तक निगरानी के निर्देश

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 5, 2026No Comments4 Mins Read
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तय उद्देश्य के लिए जरूरी डाटा ही रख सकेंगे बैंक; भुगतान और लेनदेन की जानकारी का प्राथमिक भंडारण भारत में करना होगा, एआई मॉडल और बाहरी वेंडरों के जोखिम का भी आकलन जरूरी
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नई दिल्ली। बैंकों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहक डाटा की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बैंक ग्राहकों से जुड़ा केवल उतना ही डाटा अपने पास रखें, जितना किसी स्पष्ट और तय उद्देश्य के लिए जरूरी हो। अनावश्यक डाटा संग्रह और उसके इस्तेमाल से ग्राहक की गोपनीयता पर जोखिम बढ़ सकता है।
आरबीआई की रिपोर्ट में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एआई के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि बैंकों को एआई आधारित प्रणालियों के साथ डाटा सुरक्षा से जुड़े जोखिमों का भी लगातार आकलन करना होगा। ग्राहक की जानकारी किस उद्देश्य से ली जा रही है, उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा और उसे कितने समय तक सुरक्षित रखा जाएगा, इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।

भुगतान और लेनदेन का डाटा भारत में रखना होगा

आरबीआई ने कहा है कि भारत में काम करने वाले बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को ग्राहकों के भुगतान और लेनदेन से संबंधित डाटा का प्राथमिक भंडारण भारत में स्थित सर्वर और डेटा केंद्रों में करना होगा। इससे संवेदनशील वित्तीय जानकारी पर नियंत्रण और उसकी सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।
डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ बैंकों के पास ग्राहक संबंधी बड़ी मात्रा में डाटा उपलब्ध हो रहा है। यह जानकारी अलग-अलग प्रणालियों, तकनीकी मंचों और बाहरी सेवाओं के जरिए संसाधित की जाती है। ऐसे में डाटा के संग्रह, भंडारण, प्रसंस्करण और साझा किए जाने की व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी जरूरी हो गई है।

एआई मॉडल की जांच और निगरानी जरूरी

आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि यदि वे बैंकिंग सेवाओं में किसी एआई मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसकी तकनीकी क्षमता, सुरक्षा और संभावित जोखिमों का व्यापक मूल्यांकन करें। किसी बाहरी वेंडर से एआई मॉडल या संबंधित तकनीकी सेवा लेने पर बैंक को इस्तेमाल किए जा रहे सभी एआई मॉडल और वेंडरों की पूरी सूची अपने पास रखनी होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल बढ़ने के बावजूद अधिकांश बैंक एआई से जुड़े काम के लिए बाहरी कंपनियों और तकनीकी सेवा प्रदाताओं पर निर्भर हैं। कुछ बैंक ही अपने एआई मॉडल विकसित कर रहे हैं। ऐसे में तीसरे पक्ष की तकनीक पर निर्भरता ग्राहक डाटा की सुरक्षा और गोपनीयता के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकती है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

एक एआई मॉडल की खामी का असर कई बैंकों पर

आरबीआई ने विदेशी कंपनियों और बाहरी वेंडरों से जुड़े एआई मॉडलों के जोखिम का अलग से आकलन करने की जरूरत बताई है। यदि किसी व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जा रहे एआई मॉडल में गंभीर तकनीकी खामी सामने आती है या वह गलत तरीके से काम करता है तो उसका असर एक साथ कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में केवल किसी एक बैंक की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी। इसलिए एआई मॉडल के चयन से पहले उसकी जांच, इस्तेमाल के दौरान निगरानी और किसी तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए स्पष्ट व्यवस्था तैयार करनी होगी।

डाटा सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी बैंक की

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि ग्राहक डाटा की सुरक्षा और गोपनीयता की अंतिम जिम्मेदारी बैंक की ही होगी। किसी बाहरी कंपनी या तकनीकी वेंडर को काम सौंपने से बैंक अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक की जानकारी सुरक्षित तरीके से एकत्र, संसाधित और संग्रहीत की जाए।
केंद्रीय बैंक ने बैंकों को डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण कानून (डीपीडीपी) के प्रावधानों का पालन करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। इसके तहत ग्राहक डाटा के संग्रह और इस्तेमाल में उद्देश्य, आवश्यकता और गोपनीयता से जुड़े नियमों का ध्यान रखना होगा।

एआई के साथ बढ़ रही डाटा सुरक्षा की चुनौती

बैंकिंग सेवाओं में एआई का इस्तेमाल ग्राहक सेवा, धोखाधड़ी की पहचान, जोखिम आकलन और अन्य स्वचालित प्रक्रियाओं में बढ़ रहा है। इससे बैंकिंग सेवाएं तेज और अधिक स्वचालित हो रही हैं, लेकिन इसके साथ ग्राहक डाटा की सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ रही है।
आरबीआई के निर्देशों का जोर इसी संतुलन पर है कि बैंक नई तकनीक और एआई का इस्तेमाल करें, लेकिन ग्राहक की निजी और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा से समझौता न हो। बाहरी वेंडरों पर निर्भरता के बावजूद डाटा सुरक्षा की जवाबदेही बैंक की ही रहेगी। ऐसे में एआई मॉडल, तकनीकी साझेदारों, सर्वर और डाटा के इस्तेमाल पर निगरानी बैंकिंग व्यवस्था का अहम हिस्सा बनती जा रही है।
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