वॉशिंगटन। अमेरिका में H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर सख्ती के बीच अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने वर्मोंट की एक बड़ी IT परामर्श कंपनी के खिलाफ कार्रवाई का खुलासा किया है। एजेंसी के मुताबिक, कंपनी ने विदेशी कर्मचारियों के लिए दाखिल की गई H-1B याचिकाओं में कुशल तकनीकी पदों को ऐसे वेतन स्तर पर वर्गीकृत किया, जो उन पदों की वास्तविक जिम्मेदारियों, आवश्यकताओं और अपेक्षित कौशल से कम था। USCIS ने ऐसी कई याचिकाओं को खारिज करने के साथ पहले से मंजूर कुछ याचिकाओं को रद्द भी कर दिया।
USCIS ने बताया कि वर्मोंट में जांच के दौरान एक प्रमुख IT परामर्श कंपनी की H-1B याचिकाएं जांच के दायरे में आईं। अधिकारियों के अनुसार, कंपनी ने तकनीकी क्षेत्र के ऐसे पदों को कम वेतन स्तर के तहत दर्शाया, जिनकी जिम्मेदारियां और आवश्यक योग्यताएं उससे अधिक वेतन स्तर का समर्थन करती थीं। एजेंसी ने कहा कि इस तरह की प्रथा निर्धारित वेतन मानकों को कमजोर करती है और अमेरिकी कर्मचारियों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा कर सकती है।
H-1B कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल और विशेषज्ञता वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। इसके लिए नियोक्ताओं को संबंधित पद के लिए लागू वेतन नियमों का पालन करना होता है। किसी पद का वेतन स्तर निर्धारित करते समय नौकरी की प्रकृति, जिम्मेदारियों, आवश्यक अनुभव, कौशल और शैक्षणिक या पेशेवर योग्यताओं जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाता है।
USCIS के अनुसार, संबंधित कंपनी ने कुछ तकनीकी नौकरियों को उनकी वास्तविक प्रकृति की तुलना में निचले वेतन स्तर पर वर्गीकृत किया। एजेंसी ने इसे अमेरिकी कामगारों के हितों को प्रभावित करने वाली व्यवस्था बताया। इसके बाद कई H-1B याचिकाओं को मंजूरी देने से इनकार कर दिया गया, जबकि कुछ ऐसी याचिकाएं जिन्हें पहले स्वीकृति मिल चुकी थी, उन्हें भी रद्द कर दिया गया।
याचिका खारिज होने और पहले से स्वीकृत याचिका रद्द होने में अंतर होता है। सामान्य तौर पर खारिज याचिका का अर्थ है कि आवेदन को मंजूरी नहीं मिली। वहीं, स्वीकृत याचिका रद्द होने पर संबंधित H-1B कर्मचारी की आव्रजन स्थिति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इसका प्रभाव प्रत्येक कर्मचारी की व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है। यदि कर्मचारी के पास कोई दूसरी वैध आव्रजन स्थिति या अन्य स्वीकृत याचिका है, तो परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
इस कार्रवाई में एक अहम बात यह है कि USCIS ने संबंधित IT परामर्श कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि कुल कितनी H-1B याचिकाओं पर कार्रवाई की गई और किन विशेष तकनीकी पदों की जांच की गई। कंपनी की पहचान सामने नहीं आने के कारण सोशल मीडिया पर इस बात की अटकलें लगाई गईं कि क्या इनमें कोई बड़ी भारतीय IT कंपनी शामिल है। हालांकि, USCIS ने किसी भारतीय कंपनी का नाम नहीं लिया है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी विशिष्ट कंपनी को इस मामले से जोड़ना उचित नहीं होगा।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से H-1B कार्यक्रम में नियमों के अनुपालन पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियां निर्धारित वेतन और रोजगार मानकों का पालन करें। अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि यदि कंपनियां विदेशी कर्मचारियों के पदों को वास्तविक जिम्मेदारियों से कम वेतन स्तर पर दिखाती हैं, तो इससे अमेरिकी कर्मचारियों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक असमानता पैदा हो सकती है।
IT परामर्श कंपनियां आम तौर पर दूसरी कंपनियों को तकनीकी सेवाएं, विशेषज्ञ कर्मचारी और परियोजना आधारित समाधान उपलब्ध कराती हैं। कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को विभिन्न ग्राहकों की परियोजनाओं पर भी तैनात करती हैं। इसी वजह से H-1B कार्यक्रम के तहत ऐसे नियोक्ताओं द्वारा दाखिल की जाने वाली याचिकाओं में नौकरी की वास्तविक जिम्मेदारियों और वेतन स्तर की सटीक जानकारी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
USCIS ने अपनी कार्रवाई को अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा और रोजगार आधारित आव्रजन कार्यक्रम की विश्वसनीयता बनाए रखने से जोड़ा है। हालांकि, अभी कंपनी का नाम, प्रभावित याचिकाओं की संख्या और संबंधित कर्मचारियों की स्थिति सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इस कार्रवाई का वास्तविक दायरा फिलहाल स्पष्ट नहीं है। आगे USCIS या अन्य अमेरिकी अधिकारियों की ओर से अतिरिक्त जानकारी सामने आने पर यह पता चल सकेगा कि कितने कर्मचारियों और किन पदों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
