नई दिल्ली। लाल किला बम विस्फोट मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आरोप पत्र के जरिए आतंकी साजिश को लेकर कई अहम दावे किए हैं। पटियाला हाउस कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सामने आए आरोप पत्र में एजेंसी ने विस्फोट में मारे गए उमर उन नबी को कथित साजिश का मास्टरमाइंड बताया है। आरोप पत्र के मुताबिक, उमर उन नबी उर्फ पिंडा और राहुल भट्ट अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) मॉड्यूल के संचालन में प्रमुख भूमिका निभा रहा था।
बुधवार को मामले में सभी आरोपियों के वकीलों को आरोप पत्र की प्रतियां उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष विस्फोट से जुड़ी कथित साजिश, एजीयूएच मॉड्यूल की गतिविधियों और आरोपियों के बीच संपर्क के बारे में अपने निष्कर्ष रखे। आरोप पत्र में उमर उन नबी की भूमिका को साजिश के केंद्र में बताया गया है।
एनआईए के अनुसार, उमर उन नबी वर्ष 2022 की शुरुआत से ही कथित तौर पर निष्क्रिय पड़े एजीयूएच मॉड्यूल को दोबारा सक्रिय करने की योजना पर काम कर रहा था। एजेंसी का दावा है कि उसका उद्देश्य भारतीय राज्य के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित लोगों का नेटवर्क तैयार करना था। जांच एजेंसी ने एजीयूएच को भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा से जुड़ी एक पुनर्जीवित इकाई के तौर पर बताया है।
आरोप पत्र में उमर उन नबी पर युवाओं को कथित तौर पर कट्टरपंथ की ओर प्रभावित करने और शहादत का महिमामंडन करने के आरोप लगाए गए हैं। एजेंसी के मुताबिक, वह लोगों को आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार करने की दिशा में काम कर रहा था। इसके अलावा उस पर गुप्त बैठकें आयोजित करने, आतंकी प्रशिक्षण की व्यवस्था में मदद करने और मॉड्यूल के सदस्यों के लिए जरूरी रसद उपलब्ध कराने का भी आरोप है।
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि उमर उन नबी अफगानिस्तान जाने की योजना बना रहा था। आरोप पत्र के अनुसार, कथित साजिश में शामिल अन्य लोग उसके संपर्क में थे और आपसी संवाद के लिए एन्क्रिप्टेड संदेश सेवा सिग्नल का इस्तेमाल किया जाता था। जांचकर्ताओं ने इस डिजिटल संपर्क को नेटवर्क के सदस्यों के बीच समन्वय और गतिविधियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना है।
आरोप पत्र में कथित आतंकी नेटवर्क के विस्तार और उसकी गतिविधियों को लेकर भी जानकारी दी गई है। जांच एजेंसी का दावा है कि उमर उन नबी केवल व्यक्तिगत स्तर पर गतिविधियां नहीं चला रहा था, बल्कि एक संगठित मॉड्यूल को दोबारा खड़ा करने और उसके लिए लोगों को जोड़ने की कोशिश में था। इसके लिए कथित तौर पर युवाओं को प्रभावित करने, बैठकों के जरिए संपर्क बढ़ाने और प्रशिक्षण तथा रसद संबंधी व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया गया।
उमर उन नबी की विस्फोट में मौत के बावजूद जांच एजेंसी ने उसे मामले की कथित साजिश का प्रमुख व्यक्ति बताया है। अब अदालत में आरोप पत्र के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी। आरोप पत्र में लगाए गए आरोपों पर बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि अदालत में आरोप साबित होने के बाद ही तय होगी।
इंजीनियर राशिद की जमानत पर एनआईए से जवाब तलब
इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ इंजीनियर राशिद की जमानत याचिका पर एनआईए से जवाब मांगा है। बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि राशिद को दिल्ली में रहने की शर्त के साथ जमानत देने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एनआईए की ओर से जमानत का विरोध किए जाने के दौरान की। राशिद पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत आतंकी फंडिंग से जुड़े आरोप हैं और वह फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं।
अदालत ने एजेंसी से पूछा कि यदि उसकी मुख्य चिंता राशिद की कश्मीर में मौजूदगी और वहां उनके स्थानीय प्रभाव से जुड़ी है, तो क्या दिल्ली में रहने की शर्त के साथ जमानत दिए जाने पर भी आपत्ति होगी। पीठ ने यह भी पूछा कि यदि राशिद दिल्ली में रहने की व्यवस्था कर लें और उन्हें कश्मीर जाने की अनुमति न दी जाए, तो ऐसी स्थिति में एजेंसी का क्या रुख होगा।
अब एनआईए को अदालत के इस प्रस्ताव पर अपना जवाब देना है। आगे की सुनवाई में जमानत की संभावित शर्तों और एजेंसी की आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।
