चंडीगढ़। ऑनलाइन ठगी के बदलते तरीकों और वित्तीय अपराधों पर लगाम लगाने के लिए हरियाणा सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने निगरानी और जागरूकता व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। सोमवार को हुई राज्य स्तरीय समन्वय समिति की 16वीं बैठक में वित्तीय धोखाधड़ी, अनधिकृत रूप से जमा राशि जुटाने, निवेशकों की सुरक्षा और तेजी से उभर रहे साइबर खतरों की समीक्षा की गई। बैठक में खास तौर पर ऑनलाइन गेमिंग के जरिये युवाओं को फंसाकर उनके परिवारों से जुड़े बैंक खातों को निशाना बनाने वाले ठगी के तरीकों पर चर्चा हुई।
बैठक में यह भी बताया गया कि वित्तीय अपराधों में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध बैंक खातों की पहचान के लिए RBI की कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली MuleHunter.ai को 31 प्रमुख बैंकों में तैनात किया गया है। यह प्रणाली संदिग्ध लेनदेन और खातों के व्यवहार में असामान्य पैटर्न की पहचान करने में बैंकों की मदद करती है। RBI के अनुसार, म्यूल खाते साइबर ठगी से हासिल रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने और रकम की वास्तविक पहचान छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
बैठक में SACHET पोर्टल के नए संस्करण की जानकारी भी दी गई। वित्तीय अनियमितताओं और अनधिकृत वित्तीय गतिविधियों से संबंधित शिकायतों के लिए इस्तेमाल होने वाले इस पोर्टल को 25 जून 2026 को नए रूप में शुरू किया गया था। इसमें शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ उपयोगकर्ता सुविधा और पहुंच को बेहतर किया गया है। अब यह पोर्टल 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। दिव्यांग लोगों के लिए भी पहुंच संबंधी सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। शिकायत दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया समझाने के लिए एक प्रशिक्षण वीडियो भी जोड़ा गया है।
राज्य स्तरीय समन्वय समिति ने हरियाणा से SACHET पोर्टल के जरिये प्राप्त शिकायतों की स्थिति की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने राज्य में सामने आ रहे वित्तीय अपराधों से संबंधित बाजार सूचनाओं और नए ठगी के तरीकों पर भी विचार किया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय संदिग्ध गतिविधियों की शुरुआती पहचान और समय पर सूचना साझा करना जरूरी है।
ऑनलाइन गेमिंग के जरिये नया खतरा
बैठक में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े वित्तीय अपराधों को विशेष रूप से गंभीरता से लिया गया। ठग युवाओं को खेल के दौरान नकली इनाम, पुरस्कार या अन्य लाभ का लालच देकर भुगतान के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इसके बाद उन भुगतान माध्यमों या बैंक खातों को निशाना बनाया जा सकता है जो अभिभावकों से जुड़े होते हैं। इस तरह छोटे स्तर पर शुरू हुआ ऑनलाइन गेमिंग का लालच परिवार के बैंक खाते में अनधिकृत लेनदेन का कारण बन सकता है।
ऐसे मामलों में साइबर अपराधी केवल सीधे पैसे मांगने तक सीमित नहीं रहते। वे उपयोगकर्ता को संदिग्ध लिंक, भुगतान अनुरोध या अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिये ऐसी गतिविधि में फंसा सकते हैं, जिससे बैंक खाते तक उनकी पहुंच या भुगतान की प्रक्रिया आसान हो जाए। इसलिए बच्चों और अभिभावकों के बीच डिजिटल वित्तीय जागरूकता को मजबूत करना जरूरी माना गया है।
31 बैंकों में एआई से म्यूल खातों पर नजर
वित्तीय ठगी के मामलों में म्यूल खाते बड़ी चुनौती हैं। ऐसे खातों का इस्तेमाल ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करने और उसकी वास्तविक श्रृंखला को छिपाने के लिए किया जा सकता है। RBI की MuleHunter.ai प्रणाली इसी तरह के संदिग्ध खातों की पहचान करने के लिए विकसित की गई है। RBI Innovation Hub के दस्तावेजों के मुताबिक, यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित प्रणाली बैंकों को म्यूल खातों की पहचान अधिक सटीकता से करने में मदद करती है।
मार्च 2026 में सरकार ने भी बताया था कि MuleHunter.ai को म्यूल खातों की पहचान के लिए लागू किया जा रहा है और बैंकों को वास्तविक समय में लेनदेन की निगरानी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित उपकरणों के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।
हरियाणा में 25 हजार से ज्यादा जागरूकता कार्यक्रम
RBI ने बैठक में बताया कि हरियाणा में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए अब तक 25 हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर ठगी से बचाव के प्रति जागरूक करना है।
RBI ने वित्तीय विषयों को सरल तरीके से समझाने के लिए ‘RBI Talks: Paisa to Policy’ नाम से श्रव्य कार्यक्रम श्रृंखला भी शुरू की है। इसके जरिये आम लोगों को वित्तीय विषयों और सुरक्षित वित्तीय व्यवहार की जानकारी आसान भाषा में देने का प्रयास किया जा रहा है।
बैठक का मुख्य संदेश यही रहा कि वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए तकनीक, जागरूकता और संस्थागत समन्वय तीनों को साथ लेकर चलना होगा। ऑनलाइन गेमिंग से लेकर डिजिटल भुगतान और म्यूल खातों तक ठगी का दायरा लगातार बदल रहा है। ऐसे में संदिग्ध लेनदेन की शुरुआती पहचान, शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई और बैंकों तथा संबंधित एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था साइबर ठगी के खिलाफ सुरक्षा कवच को मजबूत कर सकती है।
