नई दिल्ली। ब्रिटेन में हवाई यातायात नियंत्रण सेवा प्रदाता NATS की प्रणाली में तकनीकी खराबी के कारण मंगलवार को हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। उड़ान आंकड़ा प्रसंस्करण प्रणाली में आई समस्या के चलते 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं, जबकि सैकड़ों उड़ानों में देरी हुई। हीथ्रो, गैटविक, लंदन सिटी, ल्यूटन, एडिनबर्ग और ब्रिस्टल समेत कई प्रमुख हवाईअड्डे प्रभावित रहे। विमानन कंपनियों ने यात्रियों को चेतावनी दी कि तकनीकी समस्या दूर होने के बाद भी उड़ानों का संचालन सामान्य होने में समय लग सकता है।
NATS ने बताया कि तकनीकी समस्या 18:34 GMT पर ठीक कर ली गई थी और इस दौरान विमानन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हुआ। हालांकि, बड़ी संख्या में उड़ानों के प्रभावित होने के कारण संचालन सामान्य करने में समय लगने की बात कही गई। NATS के मुख्य कार्यकारी मार्टिन रॉल्फ के अनुसार, तकनीकी खराबी के वास्तविक कारण की जांच अभी जारी थी और कंपनी को उस समय तक यह स्पष्ट नहीं था कि प्रणाली में गड़बड़ी किस वजह से हुई।
उड़ानों पर नजर रखने वाले आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को ब्रिटेन के हवाईअड्डों से आने-जाने वाली करीब 1,300 उड़ानें रद्द हुईं। बुधवार के लिए भी 177 उड़ानें रद्द होने की जानकारी सामने आई, जिनमें ज्यादातर हीथ्रो से जुड़ी थीं। हीथ्रो ने मंगलवार की शेष अवधि के लिए आने वाली उड़ानों को रोक दिया था, जबकि जाने वाली उड़ानों का संचालन दोबारा शुरू कर दिया गया। हालांकि, हवाईअड्डे ने यात्रियों को आगे भी व्यवधान की आशंका के बारे में आगाह किया।
उपलब्ध उड़ान आंकड़ों के मुताबिक, छह प्रमुख हवाईअड्डों से रवाना होने वाली करीब 490 उड़ानों में देरी हुई। इनके अलावा आने वाली 525 उड़ानें या तो रद्द हुईं या उनमें देरी हुई। हीथ्रो पर भी कई निर्धारित उड़ानें रद्द करनी पड़ीं या उनका संचालन नहीं हो सका। British Airways सबसे अधिक प्रभावित विमानन कंपनियों में रही और उसकी 333 निर्धारित उड़ानों में से 16 को रद्द करना पड़ा।
इस घटना ने ब्रिटेन की हवाई यातायात नियंत्रण व्यवस्था की विश्वसनीयता और आपातकालीन तैयारी पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब तीन वर्ष पहले भी NATS की उड़ान योजना प्रसंस्करण प्रणाली में खराबी के कारण ब्रिटेन के हवाईअड्डों पर बड़े पैमाने पर उड़ानें प्रभावित हुई थीं। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ घंटों की तकनीकी खराबी भी यूरोप की अत्यधिक व्यस्त और आपस में जुड़ी विमानन व्यवस्था में व्यापक असर डाल सकती है।
विमानन कंपनियों ने सुधार की मांग की
विमानन कंपनियों ने NATS की कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार की मांग तेज कर दी है। Ryanair ने कहा कि उसके करीब 1.5 लाख यात्री आठ घंटे तक की देरी से प्रभावित हुए और 200 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी ने NATS के मुख्य कार्यकारी मार्टिन रॉल्फ के इस्तीफे की मांग तक कर दी।
Wizz Air ने भी तत्काल सुधार की मांग करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी बार-बार होने वाली तकनीकी समस्याओं का खामियाजा विमानन कंपनियों, यात्रियों और हवाईअड्डों को नहीं भुगतना चाहिए। कंपनी ने मौजूदा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए।
Air India की उड़ानें भी प्रभावित
ब्रिटेन की हवाई यातायात नियंत्रण व्यवस्था में आई खराबी का असर Air India की ब्रिटेन आने-जाने वाली उड़ानों पर भी पड़ा। विमानन कंपनी ने यात्रियों के लिए जारी सलाह में बताया कि उसे कई उड़ानों का मार्ग बदलना पड़ा, कुछ उड़ानों में देरी हुई और कुछ को रद्द करना पड़ा।
Air India ने कहा कि समस्या का असर उसकी कुछ अन्य उड़ानों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि घटना के बाद उसके कुछ विमान और चालक दल अपने निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंच सके। यात्रियों से कहा गया है कि हवाईअड्डे के लिए रवाना होने से पहले अपनी उड़ान की नवीनतम स्थिति जरूर जांच लें।
कंपनी ने कहा कि वह स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और यात्रियों को होने वाली परेशानी कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। Air India ने इस घटना से हुई असुविधा के लिए यात्रियों से खेद जताया और कहा कि यह स्थिति उसके नियंत्रण से बाहर थी।
विमानन नियामक ने मांगी पूरी रिपोर्ट
ब्रिटेन के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने कहा कि वह NATS से मंगलवार की तकनीकी खराबी की पूरी रिपोर्ट मांगेगा। रिपोर्ट मिलने के बाद नियामक यह आकलन करेगा कि देश की हवाई यातायात नियंत्रण प्रणाली की विश्वसनीयता और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदमों की जरूरत है या नहीं।
इस घटना की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पिछले वर्षों में NATS की उड़ान योजना प्रसंस्करण प्रणाली से जुड़ी खराबियों के बाद उसे आपातकालीन व्यवस्था और वैकल्पिक योजनाओं की समीक्षा करने को कहा गया था। पिछले साल रडार से जुड़ी तकनीकी समस्या ने भी लंदन और अन्य क्षेत्रों के प्रमुख हवाईअड्डों पर कई घंटों तक उड़ानों को प्रभावित किया था।
ताजा घटना के बाद हवाई यातायात नियंत्रण व्यवस्था में बैकअप प्रणाली और आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करने की मांग फिर तेज हो गई है। तकनीकी समस्या दूर होने के बावजूद रद्द और विलंबित उड़ानों का बना हुआ दबाव यात्रियों और विमानन कंपनियों के लिए तत्काल चुनौती बना हुआ है।
